Friday, March 30, 2018

मुजफ्फरनगर दंगे और देवबंद एके-47 केस


मुजफ्फरनगर दंगे और देवबंद के एके-47 केस में कोई समानता नहीं है लेकिन हाल ही के लिए गए निर्णयों में जहां मुजफ्फरनगर भीषण दंगो के केस वापस लिए गए वही फल विक्रेता अफजाल की मौत के फलस्वरुप हुए प्रदर्शन मेंsp के गनर की  लूट ली गई एके-47 के केस को दोबारा खोल दिया गया और उसकी जांच एटीएस द्वारा दोबारा की जा रही है
पूरे देश में गुजरात से बड़ा दंगा कहे जाने वाले मुजफ्फरनगर के 2013 के दंगों के भयानक तस्वीरें और जली  झोपड़ियों की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई और विस्थापित दंगा पीड़ितों के आंसू अभी सूखे भी नहीं कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने दंगा आरोपियों के 131 मुकदमे वापस लेने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं इन दंगों में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 60 से ज्यादा लोगों की हत्या की जबकि गैर सरकारी तौर पर सैकड़ों में यह तादाद है इसके अलावा 40000 से ज्यादा लोग बेघर हो गए यह दंगा 2013 में हुआ दंगों के बाद 1455 लोगों के खिलाफ 530 केस दर्ज किए गए तब समाजवादी पार्टी की सरकार थी अब जबकि प्रदेश में बीजेपी सरकार है तब खाप पंचायतों के प्रतिनिधिमंडल के साथ विधायक उमेश मलिक व भाजपा सांसद संजीव बालियान का प्रतिनिधिमंडल 5 फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्य योगी आदित्यनाथ से मिलकर उन्हें 179 केस की लिस्ट सोंपकर जिसमें कि सारे आरोप आरोपी हिंदू थे इन केसों को वापस लेने की मांग की जिसके बाद हरकत में आई सरकार ने मुकदमों की वापसी की प्रक्रिया शुरू की
इसके विपरीत देवबंद में 23 अप्रैल 2013 को कथित तौर पर पुलिस द्वारा मारे गए डंडे से अफजाल नामक एक फल विक्रेता की मौत हो गई जिसके प्रतिक्रियास्वरूप मुस्लिम समुदाय के कुछ नौजवानों ने हाईवे पर जाम लगाकर तोड़फोड़ की इसी तोड़फोड़ के दरमियान  तत्कालीनsp के गनर कि एके 47 राइफल भी छीन ली गई बाद में पुलिस क ने कार्रवाई करते हुए कुछ लोगोउको गिरफ्तार करके लूटी गई एके-47 को बरामद करने का प्रयास भी किया इसके बावजूद हिंदू संगठनों के लोग इसमें और गिरफ्तारी की मांग करने लगे तथा एके-47 को बरामद करने के लिए सरकार पर दबाव बनाने लगे सरकार बदलते ही यह संगठन इस केस की सीबीआई जांच की मांग करते आ रहे थे जिस कारण योगी सरकार ने संज्ञान लेते हुए हैं यह केस एसटीएफ से जांच कराने के निर्देश दिए इस पूरे मामले की जांच कराते ही पूरे प्रकरण में नया मोड़ आ गया जिसमें स्थानीय पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए  80 लोगों के विरुद्ध गैर जमानती वारंट लेकर उनके घर पर नोटिस चस्पा कर दिए गए और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास होने लगे जिसके बाद कोर्ट में मामला जाने की पर फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक है अब जहां सरकार देवबंद एके-47 जैसे छोटे मामले मैं इतनी तत्परता से कार्यवाही कर रही है इसके विपरीत मुजफ्फरनगर दंगे के आरोपियों के केस वापस ले रही है इससे सरकार की मंशा पर सवाल उठना जाहिर है इस तरह के मामलों से देश में इंसाफ की उम्मीद धूमल पड़ती है और लोगों में असंतोष फैलता है यह देश के लिए अच्छी बात नहीं सरकार चाहे किसी की भी हो और आरोपियों का धर्म चाहे कोई भी हो कार्रवाई में इंसाफ होना चाहिए

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