Friday, January 26, 2018

लव जिहाद से लैंड जिहाद तक

 जिहाद से जुड़ी शब्दावली शायद कहीं खत्म हो ऐसा लगता नहीं है मुस्लिम विरोधी संगठन राजनीति में अपनी बढ़त के लालच में नए नए शब्द गढ़ते जा रहे हैं जब लव जिहाद नामक शब्द का अविष्कार हुआ तो आम मुसलमान भौंचक्का ही रह गया था उसको तो सपने में भी पता नहीं था इस तरह का भी जिहाद हो सकता है मुसलमानों ने कई साल तक इस लफ्ज़ को झेला और अत्याचार सहे कई मुसलमानों की हत्या भी हुई और पिटाई भी जगह जगह इस नाम पर मुसलमानों के साथ मार पिटाई होना आम सा हो गया है लेकिन मुसलमानों ने फिर भी सब्र से काम लिया सोचा शायद अब इस नाम पर होने वाली राजनीति खत्म हो इसी को लेकर राजस्थान में शंभूलाल नामक व्यक्ति ने एक बंगाली मुस्लिम  अफरोज़ुल को मौत के घाट उतार दिया मुसलमानों ने थोड़े बहुत धरना प्रदर्शन कर फिर चुप्पी साध ली है लेकिन मजहब से नफरत ही नफरत यहीं खत्म ना हुई सांप्रदायिक तत्वों ने एक बार फिर लैंड जिहाद के नाम पर मुसलमानों पर अत्याचार करने की ठान ली इस मामले में मेरठ के इस्माइल गर्ल्स डिग्री कॉलेज के कर्मचारी नसीम इसका पहला शिकार हुए उन्होंने पाई-पाई करके और उनके बेटे नोमान ने कुछ लोन लेकर मेरठ के हिंदू बहुल मोहल्ले  मोरी पाड़ा मैं एक मकान संजीव रस्तोगी से खरीदा जिसको लेकर बाद में हिंदू संगठनों के लोगों ने एक हंगामा खड़ा कर दिया और इसे ही लैंड जिहाद का नाम दिया गया मुसलमानों के हिंदू बहुल मोहल्ले में रहने पर पहले भी एतराज होते रहे हैं लेकिन लैंड जिहाद का यह पहला मामला है इस प्रकार इस्माइल डिग्री कॉलेज के एक छोटे से कर्मचारी नसीम का नाम इतिहास में लिखा जाना चाहिए क्योंकि वह पहले ज्ञात लेंड जेहादी है इस देश के कानून के अनुसार कोई भी व्यक्ति पूरे देश में कहीं भी जायदाद खरीद सकता है लेकिन ऐसा मालूम होता है कि भारत की जमीन मुसलमानों के लिए तंग होती जा रही है कभी कभी मुस्लिम बहुल मोहल्लों को मिनी पाकिस्तान कहने वाले यह लोग अब हिंदू बहुल मोहल्लों को क्या बनाना चाहते हैं यह तो यह संगठन ही जाने लेकिन इस तरह की शब्दावली देश के लिए एक खतरनाक संकेत है हालांकि यह कोशिश पिछले 100 साल से चल रही है और इस पर दशकों से कोशिश होती आ रही है लेकिन हिंदू मुस्लिम को बांटना पिछले एक दशक से ही संभव हो पाया है जो इस तरह की शब्दावली से आगे भी मजबूती से होता रहेगा लेकिन यह देश के लिए खतरनाक संकेत है आज अपने फायदे के लिए देश के सांप्रदायिक सद्भाव को खत्म करने वाली यह पार्टियां संगठन शायद देश का भविष्य नहीं देख पा रही हैं जिसमें देश का सद्भाव खत्म होना लाजमी है आज पाकिस्तान के हालात देखकर हम भली भांति समझ सकते हैं वहां भी इसी तरह की राजनीति हुई थी सांप्रदायिक संगठन वहां भी सरकार में चढ़ बैठे थे आज उस देश पाकिस्तान का हाल बुरा है और वह बटने की कगार पर है भारत देश के लोगों को इस पर फैसला करना ही होगा कि हमारा हाल हमारे देश का हाल पाकिस्तान जैसा ना हो सांप्रदायिक लोगों का काम तो लोगों के बीच से सांप्रदायिक सद्भाव खत्म करना ही होता है लेकिन आज देश के लोगों को सांप्रदायिक लोगों का बहिष्कार करना चाहिए

1 comment:

palash said...

सच मे सोचने का विषय है
आखिर हम किस दिशा मे आगे बढ रहे हैं

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