Skip to main content

सड़क पर न्याय


आज कल सड़क पर न्याय करने की ग्रंथि भारत में खूब विकसित हुई है। इस ग्रन्थि का शिकार अधिकतर अल्पसंख्यक, सरकार के राजनैतिक विरोधी वैचारिक विरोधी अफ्रीकी देशों के काले लोग दूसरे राज्य के मजदूर, दलित व आदिवासी आदि लोग होते हैं।
सड़क पर न्याय करने वाले ज्यादातर संगठित लोग होते हैं, इसके अलावा कभी कभी अंसगठित लोग भी किसी अफवाह या घटना की प्रतिक्रिया में शामिल हो जाते हैं।
देश मंे इस समय बहुत सारे संगठन कुकरमुत्तों की तरह उग गए है। पहले ये संगठन प्रेस विज्ञप्ती से किसी समस्या की निंदा कर लेते थे या फिर धरना ज्ञापन आदि में लगे रहते थे। परन्तु समय के साथ-साथ बाद इन संगठनों ने कानून हाथ में ले लिया और लगे सड़क पर न्याय करने।
हालंाकि इस न्याय व्यवस्था ने इस संगठन का साथ स्थानीय सरकारें भी देती है। क्यांेकि सरकार की ओर से इन संगठनों की कार्यवाही का भय नही होता इसलिए ये संगठन रात दिन तरक्की करते हैं इस समय इस तरह की न्याय व्यवस्था कायम करने वालों के पास सबसे बड़ा मुददा गोहत्या है। इसी मुददे को लेकर सबसे ज्यादा सड़क पर न्याय हो रहा है। और जहां तहां लोग इस का शिकार हो रहे हैं। पिछले  दिनों 6 अगस्त 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने इसी मुददे को लेकर इस तरह के संगठनों को चेताया भी था मगर राज्य सरकार की प्रभावी कार्यवाही के अभाव में समस्या कज की जस है।
इस तरह की घटनाओं में आम तौर पर संगठन  अपने न्याय की पूरी वीडियो रिकार्डिंग करते हैं और उसे फिर सोशल मीडिया पर अपलोड करते हैं क्यांेकि उन्हें कानून का तो भय नही है इस तरह के मामलों में पुलिस खानापूर्ति की करती है और सड़क पर न्याय करने वाले साफ छूट जाते है। हालांकि हमारे देश का कानून हर तरह के अपराधी को सजा देने में सक्षम है। लेकिन मुकदमों को बोझ बहुत अधिक है और जजो की संख्या सीमित होने के कारण न्याय मिलने में बहुत ज्यादा देरी हो जाती है। इसके अलावा भ्रष्टाचार अधिक होने के कारण भी सही न्याय नही मिल पाता जिसके कारण समाज में एक जनाक्रोश उत्पन्न होता है।
इसी जनाक्रोश का सहारा लेकर कुछ संगठन खुद ही सड़क पर न्याय करने लग जाते हैं, वह कुछ मुददे ढूढते है जिससे लोग जज्बाती तौर पर जुडे हो ताकि लोग साथ न दे तो विरोध भी न करें।
अब से कुछ समय पहले देश में अगर दंगा होता तो जिस जगह होता वहां के अलावा कहीं और महौल कम खराब होता था लेकिन सड़क पर न्याय करने वालों ने तो अब सभी जगह पर यही माहौल बना दिया है कि जाने कब किसे कहां पीटे और कब हत्या कर दें।
उ0प्र0 राज्य में योगी सरकार के गठन के बाद अल्पसंख्यकों और दलितों में सरकार से बहुत ज्यादा उम्मीदें नही है। सरकार गठन के बाद प्रशासन भी अति उत्साह में है और मुसलमानो के सभी काम वैध और अवैध देखें जा रहे है। हालांकि मुख्यमंत्री योगी जी के ब्यान इस सब पर मरहम का काम भी करते हैं और फिर भी विश्वास कायम होने और अपने लोगों का संभालने में योगी जी को काफी वक्त लगेगा।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी का कहना है कि सरकार किसी के साथ भेदभाव नही करेगी वह धर्म या जाति के आधार पर किसी पर जुल्म नही होने देंगे। और उनकी प्रथमिकता सर्वप्रथम बिना भेदभाव विकास है।
चलो विकास की बात तो अच्छी है परन्तु अल्पसख्यों व दलितों के लिए सबसे बड़ा मुददा सुरक्षा एवं रोजगार है साथ ही कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे लोगों एवं संगठन पर लगाम लगाना जरूरी है जो सड़क पर न्याय कर रहे हैं पुलिस व न्याय व्यवस्था मजबूत हो वह ही दोषियों पर कार्यवाही करें। अगर कोई व्यक्ति अपराध करता है तो  उस पर पुलिस कार्यवाही करें कानून उसे सजा दे। अगर इसमें भ्रष्टाचार आड़े आ रहा है तो भ्रष्टाचार दूर होने का प्रयास होना चाहिए न कि कानून लोग अपने हाथ में ले और खुद भ्रष्टों वाला व्यवहार करें। एक सभ्य देश मंे इस तरह का व्यवहार शोभा नही देता जहंा इस देश में भारत रत्न भीम राव अम्बेडकर द्वारा रचित मजबूत संविधान है जो हो हमें एक सम्पूर्ण लोकतंत्र का एहसास कराता है। अधूरे लोकतन्त्र वाले पाकिस्तान का हाल हम देख ही रहे हैं। अब जरूरी है कि नही हम भी उसी पाकिस्तान का अनुसरण करें और पाकिस्तान की तरह विफल राष्ट्र साबित हों।



Comments

Popular posts from this blog

क्या आप सूअर की चर्बी खा रहे हैं ?

बी. एस. पाबला  जी का लेख देख कर मन में यही विचार आया, क्योंकि हम तो लेज़ खाते नहीं हैं और हो सकता है कि दूसरे प्रोडक्ट्स में E 631 हम भी खा रहे हों जो कि हक़ीक़त में सूअर की चर्बी का कोड है . यूरोप और अमेरिका में जा बसे हिन्दू मुसलमान कहाँ तक बच पाते होंगे सूअर की चर्बी से . मुस्लिम देशों में इसे गाय या भेड़ की चर्बी कह प्रचारित किया गया लेकिन इसके हलाल न होने से असंतोष थमा नहीं और इसे प्रतिबंधित कर दिया गया। बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नींदउड़गई। आखिर उनका 75 प्रतिशत कमाई मारी जा रही थी इन बातों से। हार कर एक राह निकाली गई। अबगुप्तसंकेतोवालीभाषा का उपयोग करने की सोची गई जिसे केवल संबंधित विभाग ही जानें कि यह क्या है! आम उपभोक्ता अनजान रह सब हजम करता रहे। तब जनमहुआ E कोडका
तब से यह E631 पदार्थकईचीजोंमेंउपयोग किया जाने लगा जिसमे मुख्य हैं टूथपेस्ट, शेविंग क्रीम, च्युंग गम, चॉकलेट, मिठाई, बिस्कुट, कोर्न फ्लैक्स, टॉफी, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ आदि। सूची में और भी नाम हो सकते हैं। हाँ, कुछ मल्टी-विटामिनकी गोलियों में भी यह पदार्थ होता है। शिशुयों, किशोरों सहित अस्थमा और गठिया के रोगियों को

क्या आप मूत्र पीने के शौक़ीन हैं ?

मल मूत्र का नाम आते ही आदमी घृणा से नाक भौं सिकोड़ने लगता है लेकिन ऐसे लोगों की संख्या करोड़ों में है जो कि मूत्र पीते हैं। मूत्र पीने को आजकल बाक़ायदा एक थेरेपी के रूप में भी प्रचारित किया जाता है। मूत्र का सेवन करने वालों में आज केवल अनपढ़ और अंधविश्वासी जनता ही नहीं है बल्कि बहुत से उच्च शिक्षित लोग भी हैं और ऐसे लोग भी हैं जो कि दूसरे समुदाय के लोगों को आए दिन यह समझाते रहते हैं कि उन्हें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए लेकिन खुद कभी अपने पीने पर ध्यान नहीं देते कि वे क्या पी रहे हैं और क्यों पी रहे हैं ? बहरहाल यह दुनिया है और यहां रंग बिरंगे लोग हैं। सबकी अक्ल और सबकी पसंद अलग अलग है। जो लोग पेशाब पीते हैं , उन्हें भला कौन रोक सकता है ? देखिए एक लिंक -
Complete Guide Urine Therapy (Coen Van Der Kroon)  Urine therapy consists of two parts: internal appication (drinking urine) and external application (massaging with urine). Both aspects comple-ment each other and are important for optimal results. The basic principle of urine therapy is therefore quite simple: you drink and massag…

बवासीर

दोस्तों बवासीर ऐसी बीमारी है जो किसी भी आदमी का रात दिन का चैन सुकून छीन लेता है.....देसी दवाइयों से इसका कामयाब इलाज संभव है यदि परहेज़ ध्यान रखा जाए
............... पाइल्स (बवासीर, अर्श): वात, पित, कफ़ ये तीनो दोष त्वचा, मांस, मेदा को दूषित करके गुदा के अंदर और बाहरी स्थानों मैं मांस के अंकुर (मस्से/फफोले) तैयार करते हैं. इन्ही मांस के अंकुरों को बवासीर या अर्श कहते हैं ! ये मांस के अंकुर गुदामार्ग का अवरोध करते हैं और मलत्याग के समय शत्रु की भांति पीड़ा करते हैं ! इसलिए इनको अर्श भी कहा जाता है. ( चरक) बवासीर का सबसे उत्तम उपचार आयुर्वेद के द्वारा ही किया जा सकता है ! आयुर्वेदिक उपचार एक बहुत ही सुलझा और बिना साइड इफ़ेक्ट का उपचार है ! पाइल्स को पूरी तरह से आयुर्वेदिक तरीके से ही ठीक किया जा सकता है| बाहरी लक्षणों के कारण भेद: बवासीर 2 प्रकार (kind of piles) की होती हैं। एक भीतरी(खूनी) बवासीर तथा दूसरी (बादी) बाहरी बवासीर। भीतरी / ख़ूनी बवासीर / आन्तरिक / रक्‍त स्रावी अर्श / रक्तार्श ख़ूनी बवासीर में मलाशय की आकुंचक पेशी के अन्दर अर्श होता है तो वह म्युकस मेम्ब्रेन (Mucous Membran…