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अपने- अपने नारे


                                           
कवि गुरु वीरेन्द्र वीर संस्कारी

                                          केवल यही दुआ है दिल से, सबका घर आबाद रहे 
                                          बटन दबाने से पहले सबको बगांल कैराना याद रहे
चुनाव के दिनो में बहुत सारे नारे सुनने को मिले आजकल सोशल मिडिया के दौरे में नारों का आदान प्रदान बहुत आसान हो गया है लोग सोषल मिडिया से ही पार्टी और प्रत्याशी  का प्रचार कर रहें है ऊपर लिखा नारा हमरे एक निकटतम दोस्त ने भेजा जो की धर्म से हिन्दु है लेकिन हमारी दोस्ती के बीच धर्म आडे नही आता इस नारे से जहा एक ओर दुआ दी गई है दुसरी और भाजपा द्वारा उठाए गए पलायन के ;कैरानाद्ध मुद्दे को भी दर्शाया गया। साफ है कि यह नारा भाजपा के पक्ष में है इसमे बहुसंख्यको को अल्पसख्ंयको से डराया गया है और उन्हें एहसास दिलाया गया है कि दे मे हिन्दु खतरे में है और अगर हमे वोट न दिया तो सारे दे में ही हिन्दुओ का पलायन होगा इसी तरह का माहौल पिछले दिनों बनया गया था जब भी कोई चुनाव आता है तो इस तरह के नारे सिर्फ एक पक्ष की और से ही नही दिये जाते है अपुति ऐसे नारे तो सभी पार्टियाँ वोटरो को अपनी ओर करने के लिए देती है आज के दौर जब किसी बात या अफवाह को फैलाने मंे बहुत ज्यादा वक्त नही लगता यह सभी जगह एक साथ ही फैल जाती है इस तरह के नारे जनता में खतरनाक असुरक्षा का रूझान पैदा करते है मुसलमानो में असुरक्षा की भावना पहले से ही मौजूद है वो वोट ही अपनी सुरक्षा के नाम पर देते है मुसलमानो के यहां विकास कोई मुद्दा ही नही होता। ऐसी ही भावना अगर हिन्दुओ में पैदा हो जाए तो देष का क्या भविष्य होगा इसे समझदार लोग समझ रहें है। इन जैसे नारों के कारण लोगो मंे जहाँ अविश्वास  बढ रहा है वही दिलो में बेर की भावना आ रही है लेकिन संघ परिवार या भाजपा का वोट बैंक मजबूत हो रहा है इस कारण शायद ही ऐसे नारों में कमी आए।
भारत एवं भारतीय सस्कृति ने हमेशा से अच्छी बातो को कबूल किया। यहां के त्यौहार भी बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक है लेकिन राजनैतिक पार्टीयाँ साम, दाम, दण्ड भेद की नीती अपनाकर हर तरह के पैतरे इस्तेमाल करती है आज दे में विकास कोई मुद्दा नही है कोई पार्टी कह रही है संघ आ रहा है हमें वोट डालो हम आपको बचाएगें, कोई राजनैतिक दल दूसरे धर्माे के लोगो को मुसलमानो की बढती आबादी के बारे में चेता रहा है कोई जाति की राजनीति कर रहा है तो कोई क्षेत्र वाद को बढावा देकर देष की अंखडता को खतरे में डाल रहा है सबके अपने-अपने नारे है अब समय आ गया है राजनैतिक दल दे के भविष्य के बारे मंे भी सोचें। क्योकि अब अगर अब जनता खामोश है तो आने वाली पीढीया उनसे ज़रूर जवाब मांगेगी।

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