Thursday, May 2, 2013

जो लोग मुस्लिम हितो की सियासत कर रहे हैं ...


झूठे सपने दिखाने वालों के पीछे चलने से कुछ हासिल नहीं होने वाला, ख़याली  पुलाव पकाने की आदत ने आज मुस्लिमो को देश के दलितों से भी दलित, पिछडो से भी पिछड़े वर्ग में ला कर खड़ा कर दिया हैं,

गरीबी, बेरोजगारी, अंधविश्वास, अशिक्षा ने मुस्लिम की विकासशील विचारधारा को पूरी तरह से समाप्त कर कर दिया हैं इनका कसूरवार कौन हैं मेरी नज़र पिछले 65 सालो से जो लोग मुस्लिम की सियासत कर रहे हैं मैं उन्हें सबसे ज्यादा इसका दोषी मानता हूँ, हाँ वो गुनाहगार हैं वर्ना राजनैतिक चेतना से आज देश में दलित क्रांति ने पिछडो और शुद्रो को न केवल एकीक्रत किया हैं अपितु उन्होंने अपने विकास को भी सुनिश्चित किया हैं और लगातार सामाझिक, राजनैतिक स्तर पर अपनी क्रांति को आगे लेकर जा रहे हैं

मगर मुस्लिमो की हालत अपने ही वतन में परदेशीयो जैसी हो गई हैं अफ़सोस जो राजनैतिक दल मुस्लिम हितो की बात करते हैं वो ही मुस्लिमो की इस हालत के दोषी भी हैं क्युकी वो ही आज़ादी के बाद लगातार सत्ता में रहे और उन्होंने ही मुस्लिमो को विकसित नहीं होने दिया।

जो वतन से चले गए वो मुहाजिर हो गए
हम तो हाज़िर रहके भी गैरहाज़िर हो गए

आज देश में बढती भिखारियों की संख्या पर नज़र डालिए आंकड़े चौकाने वाले हैं और अब भिखारियों पर नज़र डालिए उनमे मुस्लिम बहुसंख्यक हैं

हमें एक होकर अपने विकास की राजनीती को अपनाना होगा ...

(साभार)

3 comments:

Ratan singh shekhawat said...

राजनेताओं द्वारा किये जाने वाले दिखावे के मुस्लिम तुष्टिकरण ने मुस्लिमों को पिछड़ा ही नहीं रखा बल्कि बहुसंख्यक समाज से भी दूर किया है|
पर इस बात को मुस्लिमों को ही समझना पड़ेगा और वोट बैंक की खातिर तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले दलों से दूर रहना होगा|

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (03-05-2013) के "चमकती थी ये आँखें" (चर्चा मंच-1233) पर भी होगी!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

DR. ANWER JAMAL said...

वाकई समस्या गंभीर है !

लव जिहाद से लैंड जिहाद तक

 जिहाद से जुड़ी शब्दावली शायद कहीं खत्म हो ऐसा लगता नहीं है मुस्लिम विरोधी संगठन राजनीति में अपनी बढ़त के लालच में नए नए शब्द गढ़ते जा रहे ...