Saturday, April 20, 2013

5 वर्षीय बच्ची के साथ रेप, लोग अब क्या करेंगे ?


दिल्ली में एक 5 वर्षीय बच्ची के साथ रेप हुआ। उसे 4 दिनों से बंधक बनाकर रखा गया। उसके साथ रेप किया गया। उसके पेट से तेल की शीशी और मोमबत्ती निकली है। उसकी हालत गंभीर है। दिल्ली के बाहर के लोग दुखी हैं और दिल्ली के रहने वाले पुलिस से भिड़ रहे हैं। 3 अधिकारी निलंबित कर दिए गए हैं।
क्या इस बार लोग फिर सख्त क़ानून बनाने की मांग करेंगे ?
...लेकिन क़ानून तो पहले ही सख्त बनाया जा चुका है !
...तो फिर लोग अब क्या करेंगे ?
(एक मज़मून  से साभार)
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यह सचमुच एक बड़ा सवाल है। इसका हल कौन बताएगा ?
सोचना हम सबको ही है. 

2 comments:

रविकर said...

दाग लगाए दुष्टता, पर दिल्ली दिलदार ।
शील-भंग दुष्कर्म पर, चुप शीला-सरकार ।

चुप शीला-सरकार, मिनिस्टर सन्न सुशीला ।
दारुण-लीला होय, नारि की अस्मत लीला ।

नीति-नियम कानून, व्यवस्था से भर पाए ।
पुलिस दाग के तोप, दाग पर दाग लगाए ॥

DR. ANWER JAMAL said...

एक खबर के अनुसार दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओं और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार पोर्न साइट्स पर पाबंदी लगाने की तैयारी में है। साइबर अपराध शाखा और खुफिया विभाग की जांच टीम ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट में बताया है कि इंटरनेट के जरिए 60 प्रतिशत तक अश्लील साइट्स को देखा जाता है। यानी इंटरनेट के जरिए की जाने वाली कुल सर्फिंग में से करीब 60 फीसदी ये साइट्स देखी जाती हैं। लगभग 546 साइट्स को प्रतिबंधित करने के लिए चिह्नित किया जा चुका है। इन साइट्स पर प्रतिबंध लगाने के लिए सरकार गूगल और याहू जैसी इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनियों की भी मदद लेगी। उल्लंघन करने पर सर्च इंजन पर रोक जैसे कड़े कदम भी उठाए जा सकते हैं।


अब सवाल यही उठता है कि आज की नौजवान पीढ़ी इंटरनेट जैसे साधनों का प्रयोग क्या सिर्फ अश्लील फिल्में देखने के लिए ही करते है?

जवाब काफी हद तक हॉं में ही होगा। लोगों ने एक से बढ़कर एक मोबाइल फोन लिया है, इंटरनेट की गति 2जी से 3 जी और अब अंबानी की कृपा से 4 जी होने वाली है। लेकिन संचार के इन आधुनिक साधनों का प्रयोग जितना सकारात्मक नहीं हो रहा है उसे ज्यादा नकारात्मक होने लगा है। आपको मेट्रो से लेकर सड़क तक पर लोग मोबाइल फोन में उलझे हुए मिल जाएंगे लेकिन ध्यान से देखिए वह कर क्या रहे हैं या तो फेसबुक जैसे सोशल नेटवर्किंग साइटों पर प्यार की गुटर—गू चल रही है या फिर आइटम सांग से लेकर अश्लील मूवियां देखी जा रही है। ऐसे—ऐसे लोग जो कि ठीक से इंग्लिश पढ़ना भी नहीं जानते लेकिन उन्हें आप कहोंगे कि पोर्न मूर्वी देखनी है तो वह एक मिनट में 1760 वेबसाइट आपके सामने खोल देंगे। उनका ज्ञान सिर्फ इतना ही है। मोबाइल, इंटरनेट मतलब अश्लील मूवी, गाने, फिल्में बस।

अब इन बंदरों को तो इंसान नहीं बनाया जा सकता। इसलिए सरकार को पोर्न वेबसाइट बंद करना ही एक विक्लप होना चाहिए। लेकिन यह विकल्प इंटरनेट तक न सीमित होकर इसके प्रसार करने वाले तक पर भी होना चाहिए। हालांकि जब मोबाइल, कम्प्यूटर इंटरनेट शुरु हुए थे तब भी लोगों ने इसे अपनी हवस बुझाने का हथियार बना लिया था। उस समय भी बहुत से सारे लोग पुलिस द्वारा पकड़े जाते थे जो कि घर पर सीडी द्वारा अश्लील फिल्में देखने का मजा लिया करते थे। इस तरह के बढ़ते केसों को देखकर न्यायाधीश ने कहा था कि अगर 'अश्लील फिल्में देखने पर लोग को जेल भेजने लगे तो पूरा देश ही जेल में चला जाएगा'। इसलिए अब यह अपराध नहीं रहा।

जज साहब की इस टिप्पणी से देश के नागरिकों का चरित्र भी सामने आ जाता है.