Friday, March 8, 2013

औरत की तरक्क़ी जारी है...


औरत ने तरक्क़ी की है। औरत आज हरेक मैदान में सरगर्म है। फिर सेहत और सुरक्षा के मामले में उसकी हालत अच्छी नहीं है। पिछले 40 सालों के दौरान औरतों के खि़लाफ़ होने वाले जरायम में 875 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसने औरत की तरक्क़ी की ख़ुशी को मद्धम कर दिया है।
सख्त क़ानून के बाद भी रेप और इसी क़िस्म के दूसरे जरायम कम होने के बजाय लगातार बढ़ रहे हैं। बहुत तरह के रहनुमा हैं और बहुत तरह की बातें हैं। कोई किस तरफ़ जाए ?
यह तय नहीं हो पा रहा है। इसलिए फ़िलहाल तो समाज अंग्रेज़ों के तरीक़े पर जी रहा है। वहां शादी से पहले जिन्सी ताल्लुक़ात आम बात हैं तो यहां भी हो चुके हैं।
औरत के शोषण का एक यह रूप जो नहीं था। यह भी तरक्क़ी के नाम पर चलन में आ चुका है।

अफ़सोस ! इस मैदान में भी औरत की तरक्क़ी जारी है।

5 comments:

रविकर said...

बढ़िया विषय-

निष्पक्ष विश्लेषण-

औरत रत निज कर्म में, मिला सफलता मन्त्र ।

सेहत से हत भाग्य पर, नरम सुरक्षा तंत्र ।

नरम सुरक्षा तंत्र, जरायम बढ़ते जाते ।

करता हवश शिकार, नहीं कामुक घबराते ।

जिन्सी ताल्लुकात, तरक्की करता भारत ।

शादी बिन बारात, बिचारी अब भी औरत ॥

रविकर said...

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

DR. ANWER JAMAL said...

दुख का निवारण औरतों को उनके हक़ देने में है

उम्दा पोस्ट के लिए शुक्रिया.

अज़ीज़ जौनपुरी said...

mahilao ki pragati pradatt adhikaro avm adhikaro ke prayog se hai ,bold hona padega

Dinesh pareek said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ !
सादर

आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
अर्ज सुनिये

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