Skip to main content

Posts

Showing posts from February, 2013

मदरसे और मस्जिद के लिए चंदे इकठ्ठा करने के नाम पर ठगी का धंधा

हज़रत मुहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मस्जिद बिल्कुल सादा थी। शुरू में उसमें सिर पर छत और पांव के नीचे चटाई भी न थी। वह मस्जिद बिल्कुल क़ुदरती माहौल में थी। नमाज़ पढ़ने वालों पर सूरज की रौशनी हर तरफ़ से पड़ती थी, उन्हें ताज़ा हवा मिलती थी। उनके पांव ज़मीन से टच होते थे और उनके सिर पर खुला आसमान होता था। क़ुदरती माहौल सुकून देता है और बहुत सी बीमारियों से बचाता है। नए तर्ज़ की मस्जिदें बनाने की होड़ में नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मस्जिद की तर्ज़ को भुला दिया गया है। मस्जिदों को सादा रखा जाता तो उनके नाम पर धंधा और ठगी करने वाले पनपते ही नहीं। ऐसे भी मदरसे हैं। जिनकी तरफ़ से चंदा वसूल करने वाला कोई जाता ही नहीं है। जिसे भी देना होता है। वह ख़ुद ही मनी ऑर्डर कर देता है या किसी के हाथ भेज देता है। कुछ मदरसों ने ऐसे लोगों की तनख्वाह मुक़र्रर कर रखी है। यह ठीक है। उनके घर का ख़र्च भी चलना चाहिए। कमीशनख़ोरी और ठगी इससे बिल्कुल अलग चीज़ है। चंदा वुसूल करने वाले ये लोग भी दाढ़ी, टोपी और शरई लिबास में होते हैं। इनके वेश-भूषा को देखकर धोखा न खाएं और अपनी रक़म चंदे में देने से पहले य…

आतंकवाद का राजनीतिक लाभ किसे मिलेगा ?

किसी आदमी की हत्या के बाद पुलिस इस बात पर भी विचार करती है कि इस आदमी की हत्या रंजिशन की गयी है या फिर किसी लाभ के लिये की गयी है ?
आतंकवाद का मक़सद राजनीतिक लाभ उठाना होता है. इसलिये आतंकवादी घटनाओं के बाद यह भी देखा जाना चाहिये कि इस आतंकवादी घटना का राजनीतिक लाभ किसे मिलेगा ?
बम धमाकों का मक़सद लोगों को मारना नहीं होता. बम धमाकों से ज़्यादा लोग तो शराब पीकर मर जाते हैं या ब्याजखोर महाजन के डर से आत्महत्या कर लेते हैं.
ये आतंकवादी दरअसल अमन के दुश्मन हैं। इनके कुछ आक़ा हैं, जिनके कुछ मक़सद हैं। ये लोकल भी हो सकते हैं और विदेशी भी। जो कोई भी हो लेकिन इनके केवल राजनीतिक उद्देश्य हैं। ये लोग चाहते हैं कि भारत के समुदाय एक दूसरे को शक की नज़र से देखें और एक दूसरे को इल्ज़ाम दें। कुछ तत्व नहीं चाहते कि जनता अपनी ग़रीबी और बर्बादी के असल गुनाहगारों को कभी जान पाए। जनता का ध्यान बंटाने और उन्हें बांटकर आपस में लड़ाने की साज़िश है यह किसी की। इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं, उन तक पहुंचना भी मुश्किल है और उन्हें खोद निकालना भी। कुछ जड़ों से तो लोग श्रृद्धा और समर्पण के रिश्ते से भी जुड़े हुए हैं। ऐसे…

लहसुन को गरीबों का 'मकरध्वज' कहा जाता है

Hindi Bloggers Forum International (HBFI): लहसुन को गरीबों का 'मकरध्वज' कहा जाता है
लहसुन के सेवन से रक्त में थक्का बनने की प्रवृत्ति बेहद कम हो जाती है, जिससे हृदयाघात का ख़तरा टलता है। यह बिंबागुओं (Platelates) को चिपकने से रोकता है। थक्कों को गलाता है। धमनियों को फैलाकर रक्तचाप घटाता है। हाई ब्लड प्रेशर वालों के लिए यह अमृत के समान है। नियमित लहसुन को दूध में उबालकर लेते रहने से ब्लडप्रेशर कम या ज़्यादा होने की बीमारी नहीं होती। कॉलेस्ट्रोल की समस्या से पीड़ित लोगों के लिए लहसुन का नियमित सेवन अमृत साबित हो सकता है। वैज्ञानिकों ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है कि लगातार चार हफ्ते तक लहसुन खाने से कॉलेस्ट्रोल का स्तर 12 प्रतिशत तक या उससे भी कम हो सकता है। जिगर के अंदर मेटाबोलिज्म में सुधार लाकर कोलेस्ट्रॉल कम करता है और एरिथमिया को नियमित करता है। 'जर्नल ऑफ न्यूट्रीशन' के एक अध्ययन के मुताबिक लहसुन के सेवन से कोलेस्ट्रॉल में 10 फीसदी गिरावट आती है। यदि रोज नियमित रूप से लहसुन की पाँच कलियाँ खाई जाएँ तो हृदय संबंधी रोग होने की संभावना में कमी आती है।लहसुन की तीक्ष्णता और…

Blog News: 'औरत की हक़ीक़त' ब्लॉग पर एक नई कहानी "औरत का क़ानूनी जलवा"

Sabhar: Blog News: 'औरत की हक़ीक़त' ब्लॉग पर एक नई कहानी "औरत का क़ानूनी जलवा"

औरत का क़ानूनी जलवानए क़ानून के असर की एक सत्यकथा जो भविष्य में घटित होगी। चपरासी के अलावा ऑफ़िस के सभी लोग जा चुके थे। सीईओ अपने रूम में जुटे हुए थे। हालाँकि उनकी उम्र काफ़ी हो चुकी थी फिर भी बस एक जोश था, जो उन्हें अब भी नौजवानों की तरह जुटे रहने के लिए मजबूर करता था लेकिन जवानी बीत जाए तो सिर्फ़ जोश से ही काम नहीं चलता। सीईओ साहब जल्दी ही निपट गए।  उनकी सेक्रेटरी को भी जो कुछ ठीक करना था, हमेशा की तरह ठीक कर लिया। सीईओ साहब ने अपनी सेक्रेटरी के चेहरे पर नज़र डाली। वहां कोई शिकायत न थी। वह मुतमईन हो गए और अपना ब्रीफ़ेकेस उठाकर चलने ही वाले थे कि सेक्रेटरी ने आज का न्यूज़ पेपर उनके सामने रख दिया, जिसमें यौन हमले और शोषण का अध्यादेश लागू होने की ख़बर थी। सेक्रेटरी मुस्कुराते हए बोली -‘आप क्या चुनना पसंद करेंगे, 20 साल की क़ैद या ...?‘ ‘क...क...क्या मतलब ?‘- सीईओ साहब हकला भी गए और बौखला भी गए। --------- पूरी कहानी के लिए लिंक पर जाएँ - औरत का क़ानूनी जलवा

इसलाम धर्म: स्वर्गिक शांति का ख़ज़ाना है नमाज़ How to perfect your prayers (video)

इसलाम धर्म: स्वर्गिक शांति का ख़ज़ाना है नमाज़ How to perfect your prayers (video)
नशा और ब्याज हराम और वर्जित है, यह बात केवल और केवल क़ुरआन ही बताता है।
विधवा को दोबारा विवाह करने का और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार है, यह बात केवल और केवल क़ुरआन ही बताता है।
क़ुरआन ऐसी बहुत सी बातें बताता है, जिनसे अन्याय और अत्याचार का ख़ात्मा होता है और जिन्हें जानना और मानना हरेक इंसान के लिए लज़िम है। इसीलिए हरेक इंसान को नमाज़ के लिए बुलाया जाता है ताकि हरेक इंसान क़ुरआन सुने और उसे जाने।
नमाज़ कम जानने वालों को ज़्यादा जानने वालों के साथ एक जगह इकठ्ठा कर देती है। इससे लोगों का ज्ञान बढ़ता है और यह बात अकेले प्रार्थना करने से हरगिज़ हासिल नहीं हो सकता।
नमाज़ ईश्वर का साक्षात्कार भी तुरंत कराती है।
ईश्वर वह है जो आदमी की नज़र और उसकी अक्ल की पहुंच से बहुत परे है।
नमाज़ यही अहसास कराती है।

आप नमाज़ अदा करके देखिए,
इसके फ़ायदे और इसके प्रभाव को आप ख़ुद ही जान जाएंगे।