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हिन्दुस्तान में सज़ा ए मौत बाक़ी रहे या इसे ख़त्म कर दिया जाए ? Kasab:Hang Till Death -DR. ANWER JAMAL


हिन्दुस्तान में सज़ा ए मौत बाक़ी रहे या इसे ख़त्म कर दिया जाए ? Kasab:Hang Till Death

DR. ANWER JAMAL at Hindi Bloggers Forum International (HBFI) - 5 hours ago
इस पर एक लंबे अर्से से विचार चल रहा है। 21 नवंबर 2012 को कसाब को फांसी दिए जाने के बाद एक बार फिर यह मुददा उठाया जा सकता है। उसे फांसी दिए जाने से 2 दिन पहले ही संयुक्त महासभा कि मानवाधिकार समिति दुनिया भर में सज़ा ए मौत को ख़त्म करने का प्रस्ताव पास किया था। दुनिया के 140 देश सज़ा ए मौत ख़त्म कर चुके हैं और अब सिर्फ़ 58 देश ही यह सज़ा बाक़ी है। कोई भी फ़ैसला लेने से पहले यह देखना ज़रूरी है कि जिन देशों में फांसी की सज़ा नहीं है। उन देशों में जुर्म का ग्राफ़ नीचे के बजाय ऊपर जा रहा है । इग्लैंड के लोग तो अपना वतन ही छोड़ कर जा रहे हैं, जो जा सकते हैं और जिनके पास विकल्प है। 
...आखि़रकार यहां हरेक के लिए मौत है। जो फांसी से बच जाएगा, उसके लिए भी अंत है।यह तो समाज के सामने का सच है और एक सच वह है जो इंसान की मौत के बाद सामने आता है। भारत की आध्यात्मिक विरासत यही है कि यहां मौत के बाद के हालात को भी उतनी ही अहमितयत दी जाती है जितनी कि जीवन को। यही आध्यात्मिक सत्य ऐसा है जो कि आम आदमी को बुद्धत्व के पद तक ले जा सकता है बल्कि उससे भी आगे ले जा सकता है।

हरेक समस्या का हल मौजूद है लेकिन हमें समस्या के मूल तक पहुंचना होगा। शरीफ़ लोग जी सकें इसलिए ख़ून के प्यासे इंसाननुमा दरिंदों को मरना ही चाहिए।

Comments

रविकर said…
फांसी का भय भी नहीं, लगता अब पर्याप्त ।

त्रस्त आम-जन हो रहे, खून-खराबा व्याप्त ।

खूनखराबा व्याप्त, मरें निर्दोष करोड़ों ।

धरा चाहती शान्ति, दण्ड को नहीं मरोड़ो ।

मानवता की हार, बचे नहिं काबा काशी ।

धारदार कानून, ख़त्म क्यूँ करना फांसी ।।
सही कहा आपने | फांसी की सजा कभी खत्म नहीं होनी चाहिए |
ऐसे भी भारत में फांसी की सजा बहुत ही कम दी जाती है | और उस से बचने के लिए भी न जाने कितने मौके दिये जाते हैं |
रविकर said…
आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।
दकसाब जैसे आतंकी, देशद्रोही, वच्चों महिलाओं पर ्त्याचार करने वाले ऐसों के लिये तो फांसी का प्रावधान होना ही चहिये । वैसे ही हमारी सरकार तो टालमटोल करके काफी वक्त जाया कर देती है ।

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