सच्चाई से रू ब रू होता है यहां इंसां
महिमा गायें पंथ सब, सभी सिखाते दान |बांटो अपना खास कुछ, करो जगत उत्थान |करो जगत उत्थान, फर्ज है समझदार का |मानवता का कर्ज, उतारो हर प्रकार का |जो निर्बल मोहताज, करे कुछ गहमी गहमा |होय मुबारक ईद, दान की हरदम महिमा ||
Post a Comment
1 comment:
महिमा गायें पंथ सब, सभी सिखाते दान |
बांटो अपना खास कुछ, करो जगत उत्थान |
करो जगत उत्थान, फर्ज है समझदार का |
मानवता का कर्ज, उतारो हर प्रकार का |
जो निर्बल मोहताज, करे कुछ गहमी गहमा |
होय मुबारक ईद, दान की हरदम महिमा ||
Post a Comment