Sunday, August 5, 2012

अच्छाई को एकजुट होकर फैलाना चाहिए

लोग यह चाहते हैं कि हमें न बदलना पड़े मगर दूसरे सब बदल जाएं। वे किसी की मुसीबत में काम न आएं। कोई सड़क पर पड़ा कराह रहा हो तो वे भले ही उसे नज़रअंदाज़ करके आगे बढ़ जाएं मगर उनकी तकलीफ़ को दूर करने के लिए भागे चले आएं।
यह समाज आज जैसा भी है। इसे ऐसा हमने ही बनाया है। हम में से हरेक ने इसे ऐसा बनाया है। समाज में आज अच्छाई अच्छे लोगों के दम से है। अच्छाई को बढ़ावा दिया जाए तो अच्छाई बढ़ेगी और ऐसा करने के लिए हमें अपनी बुरी आदतों को छोड़ना होगा।
बुरी आदतों को छोड़ने की प्रैक्टिस रोज़े के ज़रिये से हो जाती है और यह सामाजिक एकजुटता को भी ज़ाहिर करती है। अच्छाई को एकजुट होकर फैलाना चाहिए।

लव जिहाद से लैंड जिहाद तक

 जिहाद से जुड़ी शब्दावली शायद कहीं खत्म हो ऐसा लगता नहीं है मुस्लिम विरोधी संगठन राजनीति में अपनी बढ़त के लालच में नए नए शब्द गढ़ते जा रहे ...