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अपनी हैसियत बढ़ाने की ख्वाहिश में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की आदत

बारिश हो रही है। आम की फ़सल चल रही है। रमज़ान का महीना है। सहरी और इफ़तार सब हो रहा है। ज़कात-फ़ितरे का हिसाब लगा लिया गया है। ये सब ख़ुशियां हैं। ईद भी आएगी। यह भी ख़ुशी होगी लेकिन कभी कभी सोचता हूं कि जो अमन और जो ख़ुशियां हमें नसीब हैं वे हरेक को नसीब क्यों नहीं होतीं।
कहीं दंगा है तो कहीं आतंक। कहीं ग़रीबी और भूख है तो कहीं बेरोज़गारी और बंजर ज़मीनें। कहीं अशिक्षा है तो कहीं दहेज। कहीं सरकार की लापरवाही है तो कहीं ख़ुद अपनी कमज़ोरी।
हमारा अपना लालच और अपनी लापरवाही हमें एक ख़ुशहाल क़ौम बनने से रोके हुए है। गर्व करने के लिए कोई वजह ज़रूरी नहीं है। लोग फिर भी गर्व कर लेते हैं।
भारत भ्रष्टाचार में जकड़ा हुआ है और भ्रष्टाचार से लड़ने वाली टीम अन्ना को देश की जनता तन्हा छोड़ चुकी है। लोकपाल तो जैसे तैसे अब बन कर ही रहेगा मगर क्या मुल्क की अवाम को अपने आप को बदलने का अहसास हो पाएगा ?
अहम मुददे भी यहां अपने अहं की भेंट चढ़ा दिए जाते हैं।
ब्लॉग जगत में भी मुददे को नहीं नाम और हैसियत को समर्थन दिया जाता है। नाम और पद ठीक ठाक हो तो मर्दाना बीमारी की पोस्ट पर भी हाज़िरी लगा दी जाती है। ब्लॉगर विदेश में रहता हो तो भी वहां हाज़िरी देना अपना फ़र्ज़ समझा जाता है और कहीं सिर्फ़ मुददा ही हो लेकिन उससे जुड़कर अपनी हैसियत में इज़ाफ़ा न होता हो तो फिर वहां समर्थन देना फ़िज़ूल समझ लिया जाता है।
असल मुददों का बुरा हश्र जनता भी कर रही है और ब्लॉगर भी। सब अपनी ख़ातिर जी रहे हैं। दूसरों की ख़ातिर जान देना तो अब मूर्खता मानी जाने लगी है।
रोज़ा दूसरों की भूख-प्यास और परेशानी को ख़ुद पर झेल कर उसका अहसास करने का नाम है। दूसरों का दुख ख़ुद पर बीतेगा तो उसे दूर करने का जज़्बा भी जागेगा।
दूसरों का दुख-दर्द दूर करने का जज़्बा सब में जागे, इस रमज़ान में यही दुआ है।

Comments

Shah Nawaz said…
सही कहा भाई...
ब्लॉग जगत में वही सबका मित्र है जो "अच्छी प्रस्तुति","सार्थक आलेख" कहकर चलता बनता है। मुद्दों की बात आपने छेड़ी,कि खेमा बना।
DR. ANWER JAMAL said…
अहम मुददे भी यहां अपने अहं की भेंट चढ़ा दिए जाते हैं।
सही कहा भाई...

नेक नसीहत देती हुई इस पोस्ट को ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ पर सजा दिया गया है।
‘ब्लॉग की ख़बरें‘ हिंदी ब्लॉग जगत का पहला समाचार पत्र है जो कि ब्लॉग की ख़बरें देता है और नैतिकता के प्रतिमान अपने पाठकों के सामने रखता है ताकि वे धोखे और ज़िल्लत के रास्ते से बच सकें।

भ्रष्टाचार का कारण है जायज़ और नाजायज़ का फ़र्क़ भुला देना
http://blogkikhabren.blogspot.in/2012/07/blog-post_31.html

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