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Sunday, July 22, 2012

[प्यारी माँ] एक आवाज़ बीमार भ्रूण हत्या के खि़लाफ़

ईमेल से प्राप्त :-
प्यारी बेटी अनम की याद में, जो जन्नत का फूल बन गई है.
अनम ने हमें बताया है कि हर साल न जाने कितने करोड़ ऐसे अनाम मासूम होते हैं, जिनके क़त्ल में हमारी ख़ामोश हिस्सेदारी है, जिन्हें हमने कभी देखा नहीं बल्कि जिन्हें हम जानते तक नहीं हैं।
अनम हमारे दिलों में आज भी मौजूद है। हम भी उसकी मौजूदगी को बनाए रखना चाहते हैं। अनम की याद के बहाने हम उस जैसे करोड़ों मासूमों को याद कर पाते हैं। हो सकता है कि कभी लोगों में समझदारी जागे और वे इनके हक़ में भी कभी आवाज़ बुलंद करें।
बीमार भ्रूणों की रक्षा के लिए आप यह पोस्ट देखें और इस आवाज़ को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करें-

यह एक सामाजिक मुददा है। यह तवज्जो चाहता है। विकलांग या बीमार होना कोई जुर्म नहीं है। उनके लिए भी हमारे दिलों में और हमारी दुनिया में जगह होनी चाहिए।

3 comments:

Sunil Kumar said...

हम कब जागेंगे ......

DR. ANWER JAMAL said...

Jazakallah.

एस.एम.मासूम said...

अच्छे विचार हैं |