Tuesday, July 10, 2012

ब्लॉगिंग क्या है ?

अपने ख़यालात ज़ाहिर करने का एक तरीक़ा है.
जो लोग ब्लॉगिंग नहीं करते, वे भी अपने ख़यालात ज़ाहिर करते ही हैं. कोई पान की दुकान पे तो तो कोई यूं ही बिना किसी दुकान के. औरतें भी अपना ख़याल ज़ाहिर करती हैं और मर्दों से ज़्यादा करती हैं.
हरेक का ख़याल है कि वह सबसे ज़्यादा अक्लमंद है और दूसरे उसकी बात मान लें तो उनका बेड़ा पार हो जाएगा. ऐसा सोचने में कोई हरज भी नहीं है. अपना दिल है जो चाहे सोचो. दिक्कत तब आती है जब ख़यालात आपस में टकरा जाएं. ख़याल आपस में टकरा जाते हैं तो दरहक़ीक़त दिल आपस में टकराते हैं. इसका दिल टूटे या उसका या दोनों का. टकराव होगा तो टूट फूट ज़रूर होगी.
आपकी ब्लॉगिंग में आपकी शख्सियत झलकती है
तंज़ करने वाले भी तंज़ सहने की ताक़त नहीं रखते. पढ़े लिखे लोगों की मजलिस में बुरी बातें देखकर एक लंबे अर्से तक ब्लॉग पर कुछ लिखने का जज़्बा ही सर्द पड़ गया था .
ब्लॉगिंग को जुड़ने का ज़रिया बनाया जाए तो अच्छा रहेगा. अपनी बात कहिए और दूसरे की सुनिए. धौंस धमकी और अपमान की भाषा बोलने से बचिए. इसके लिए अपने दिल को धोइये. जब तक नफ़रतें दिल में रहेंगी ज़ुबान से आप मुहब्बत के फूल खिला ही नहीं सकते.
अपने घमंड की ख़ातिर कभी औरत मर्द का मुददा यहां बना दिया जाता है और कभी उसे हिन्दू मुस्लिम का मुददा बना दिया जाता है. यह बुरी बात है. 

8 comments:

रविकर फैजाबादी said...

सटीक विषय ||

दिलबाग विर्क said...

आपकी पोस्ट कल 12/7/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें

चर्चा - 938 :चर्चाकार-दिलबाग विर्क

क्रिएटिव मंच-Creative Manch said...

blogging/ blogger/dharm aur 'ablaa naari'/striyon ka ka samaaj mei sthan]..
aise topic hain jin par log vichar karna kuchh adhik pasand karte hain.
kyonki inmei vivaad kaafi hota hai,aur blog likhne wala light[limelight] mei aa jata hai!
:) yahan suna Km aur 'sunaaya' adhik jaane lagaa hai.

रविकर फैजाबादी said...

सोने पे सुहागा
जानिए ब्लागिंग को



बढ़िया विषय -



इंटरवल के बाद लोग जब, कथा समझने आते हैं ।

एक पक्ष की बातें अक्सर, नहीं समझ वे पाते हैं ।

खलनायक नायक से केवल, पिक्चर आगे नहीं बढ़े है -

कुछ पात्र सकारण आ जाते, मुश्किल में घिर जाते हैं ।

Asha Saxena said...

अच्छा विषय चुना है व् अच्छी जानकारी भी दी है |
आशा

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

जो ब्लॉगिंग में फँस गया, वो है रचनाकार।
पागलपन इसको कहे,सारा ही संसार।।

veerubhai said...

बढिया जानकारी उससे भी बढ़िया गुफ़्त -गु .बढिया बात कही है आपने ब्लोगिंग के बारे में .

veerubhai said...

बढिया जानकारी उससे भी बढ़िया गुफ़्त -गु .बढिया बात कही है आपने ब्लोगिंग के बारे में .सकारात्मक रहना ,अ -सहमती को सही सन्दर्भ और भावना से लेना ज़रूरी है .

लव जिहाद से लैंड जिहाद तक

 जिहाद से जुड़ी शब्दावली शायद कहीं खत्म हो ऐसा लगता नहीं है मुस्लिम विरोधी संगठन राजनीति में अपनी बढ़त के लालच में नए नए शब्द गढ़ते जा रहे ...