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Blog News: धर्म के नाम पर 'सेक्स' का खेल

अख्तर खान साहब ने वह पोस्ट ही मिटा डाली है जो उनके सचिव ने भास्कर डोट कॉम से एक अंश उठाकर उनके ब्लॉग  पर पोस्ट बना दी थी. जिन ब्लॉगर्स ने अख्तर साहब के ब्लॉग पर मात्र एक अंश पर आपत्ति प्रकट की , उनमें से किसी ने भास्कर डोट कॉम की पूरी पोस्ट  पर भी कोई आपत्ति प्रकट नहीं की जो कि 8 गुना ज़्यादा है , है न कमाल की बात ?
कुछ हिंदी ब्लॉगर्स ऐसी दोहरी सोच लेकर भी बुद्धिवादी कहलाते हैं.
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Blog News: धर्म के नाम पर 'सेक्स' का खेल
PHOTOS: धर्म के नाम पर कुछ यूं खेला जाता रहा है 'सेक्स' का खेल!

Comments

रचना said…
blog or print medium do alag cheez haen
print medium ki galtiyaan wo sudhaar hi daegae jo us maadhyam sa ejudae haen
ham blog sae judae haen to agar yahaan kuchh galat daekhaegae to aaptti karaegae hi

print media sae kuchh bhi uthaa kar blog par chipka dena aur wo bhi bina link diyae is par aap ki nazar kyun nahin gayee

kyaa orijinal post par wo link diyaa gayaa thaaa ???
kisii ki likhaii ko apnae blog par bina link diyae chhapna chori hotaa haen

kyaa is prakaar sae kuchh bhi likhnae sae pehlae akhtar khaan ne sochaa thaa ki wo bina link diyae agar kuchh bhi blog par likh daegae to wo chori kehlaataa haen

kyun nahin wo link usii post me diyaa gayaa

hamari dohri maansiktaa ki baat karnae sae pehlae kanun ki baat kar lae to behtar hogaa
Shah Nawaz said…
ब्लॉग जगत और दोगले-पन का तो गहराई से नाता है... अपने धर्म या समाज के खिलाफ कोई पोस्ट होगी तो फ़ौरन विरोध करेंगे और खुद दूसरों के धर्म का मज़ाक उडाएंगे.... हालाँकि अपने आपको सत्य और हक का मसीहा बताने वालों की बातें भी सच और हक की होनी चाहिए....

मैं अख्तर भाई के द्वारा पोस्ट को हटाये जाने का समर्थक हूँ और मानता हूँ कि ऐसा अख्तर भाई ही कर सकते हैं.... वर्ना बाकी तो अपनी गलतियों पर भी अड़े रहते हैं...

अख्तर भाई को दिल से सलाम करता हूँ...
Shah Nawaz said…
इसका एक नमूना यहाँ देखिये, जहाँ अपने ब्लॉग पर कमल कुमार सिंह (नारद ) जी, बिना सबूत के, सुनी सुनाई बातों पर और बिना मामले की तह पर गए पुरे मुस्लिम समाज को ही बल्कि धर्म को गुनाहगार ठहराने की कोशिश करने लगे... और हद तो यह है कि एक मासूम बच्ची के साथ हुई घिनौनी हरकत की आड़ में एक पूरे समाज के लोगो को आतंकित करने और उनके घरों को आग लगाने की घटना का समर्थन कर रहे हैं... केवल इसलिए कि उस समाज के लोगो पर इलज़ाम है... जब कि अभी तक तो वह केवल मुलजिम है, मुजरिम भी नहीं....

http://kalyugeenarad.blogspot.in/2012/07/blog-post_02.html


लेकिन कहीं कोई विरोध नहीं...
DR. ANWER JAMAL said…
@ रचना जी ! ब्लॉगर को टोका जाय और अखबार को छोड़ दिया जाय, यह नीति ठीक नहीं है. ग़लत लगे तो सबको टोको, इसमें अपना पराया मत देखो. हमारा तो यही मानना है और जो हम मानते हैं वही करते हैं.
मल्टीनेशनल कंपनियों की पूँजी पर आज अखबार और कुछ ब्लॉगर दोनों चल रहे हैं.
अपने ईमान को भुलाकर ये हमेशा सच के ख़िलाफ़ ही बोलते हैं.

भास्कर की पोस्ट के नीचे भी पाठकों से उनके विचार मांगे गए हैं. अखतर साहब के लिंक देने के बाद भी कोई उधर न गया ?
देखते हैं अपनी आपत्ति जताने अब कौन उधर जाता है ?
---
@@ रचना जी ! 'ब्लॉग की ख़बरें' ब्लॉग जगत की घटनाओं को सामने लाने का निष्पक्ष हो कर काम करता है. एक खबर को कई जगहों से सामने लाना कोई बुरी बात नहीं है.
हमारी खबर में लिंक भी दिए गए हैं और आपका नज़रिया भी बिना किसी संपादन के दिया गया है, तब इसमें आपको क्या ऊलजलूल लगा ?
एक पत्रकार के धर्म को समझेंगी तो ही आप वस्तु-स्थिति समझ पाएंगी.
शाहनवाज जी आप लोग यार रोते बहुत हो.. वो भी घूम घूम के , एक लिंक और देता हूँ मै आपको ... http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/NAARAD/entry/%E0%A4%AC%E0%A4%B2-%E0%A4%A4-%E0%A4%95-%E0%A4%B0-%E0%A4%95-%E0%A4%AE-%E0%A4%B5-%E0%A4%B5%E0%A4%9C
रचना said…
akhtar aur ravikar ne is vishay sae sambadhit post delet kar dii haen

ab kyaa aap sae umeed ki jaa saktii haen ki aap bhi yae post delete kar dae aur sabkaa saath dae

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