Monday, June 25, 2012

आत्महत्या, ड्रग्स और परिवार नियोजन

आज भारत में हर चौथे मिनट पर एक नागरिक आत्महत्या कर रहा है. हरेक उम्र के आदमी मर रहे हैं. अमीर ग़रीब  सब मर रहे हैं. उत्तर दक्षिण में सब जगह मर रहे हैं। हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई सब मर रहे हैं। बच्चे भी मर रहे हैं। जिनके एक दो हैं वे ज्यादा मर रहे हैं और जिनके दस पांच हैं वे कम मर रहे हैं। जिनके एक बच्चा था और वही मर गया तो माँ बाप का परिवार नियोजन सारा रखा रह  जाता  है। दस पांच में से एक चला जाता है तो भी माँ  बाप के जीने के सहारे बाक़ी रहते हैं। जिन्हें दुनिया ने कम करना चाहा वे बढ़ रहे हैं और जो दूसरों का हक़ भी अपनी औलाद के लिए समेट  लेना चाहते थे उनके बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं  या फिर ड्रग्स लेकर मरने से बदतर जीते रहते हैं। 
कोई अक्लमंद अब इन्हें बचा नहीं सकता। ऊपर वाला ही बचाए तो बचाए . 
लेकिन वह किसी को क्यों बचाए जब वह  उसकी मानता ही नहीं .
जिसके सुनने के कान हों वह सुन ले।

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