Sunday, May 27, 2012

सफलता उन्हें ही मिलती है जो सफलता के लिए दृढ़ संकल्प होकर प्रयास करते हैं


सफलता में मेहनत का कोई विकल्प नहीं


करिअर निर्माण में लाखों छात्र अपने-अपने ढंग से सफलता के लिए जद्दोजहद करते नज़र आते हैं। परन्तु अधिकांश छात्रों को यह शिकायत रहती है कि उन्हें सफलता नहीं मिली जबकि उन्होंने इसके लिए कड़ी मेहनत की थी। आखिर अधिकतर छात्रों को यह शिकायत क्यों होती है? क्यों उन्हें लगता है कि सफलता उन्हें नहीं मिली जबकि वे इसके लिए सतत प्रयासरत थे। अधिकतर छात्र इससे निराश हो जाते हैं तथा उनका मनोबल गिरता जाता है और इससे उनकी क्षमता अत्यधिक प्रभावित होती है। इससे उनकी रुचि तथा यहां तक कि याददाश्त क्षमता भी प्रभावित हो जाती है। इससे अगली विफलता का मार्ग प्रशस्त हो जाता है और उनकी सारी योजनाएं धरी रह जाती हैं।

विफलता अगली सफलता को प्रभावित करती है जबकि छात्रों को विफलता का उपयोग अगली बार सफलता को प्राप्त करने में करना चाहिए। यह मान्य तथ्य है कि छात्रों के पास समय का अभाव होता है तथा एक निश्चित अवधि के भीतर ही उन्हें अपनी सभी योजनाओं को कार्यान्वित करना होता है। फलस्वरूप अधिकांश छात्र किसी ऐसे मंत्र या जादू की तलाश में लग जाते हैं जो पलक झपकते ही उनकी मुश्किलें आसान कर दे।


छात्रों को एक बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए या यूं कहें कि गांठ बाध लेनी चाहिए कि मेहनत का कोई अन्य विकल्प न तो किसी जमाने में था, न अब है और न ही किसी जमाने में होगा। सफलता के लिए आपको खुद ही एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाना होगा। आप खुद अवलोकन करें तो संभव है कि आप कुछ ऐसी बातों को समझ पाएंगे कि कौन-कौन सी बातें आपको सहायता प्रदान कर सकती हैं यथा किस वक्त आप अधिक स्मरण कर सकते हैं, किस वक्त आपको कौन-सी सामग्री का अध्ययन अधिक रमता है, किस वक्त आपको सो जाना चाहिए, किस वक्त आप उठकर अधिक गहनता से अध्ययन कर पाते हैं। ये कुछ ऐसी बातें हैं जो निश्चय ही आपकी क्षमता में वृद्धि कर सकती हैं। परन्तु यहां इस बात को समझ लें कि यह मेहनत का विकल्प नहीं, बल्कि कुछ सहायक बातें हैं, जो आपके द्वारा की जा सकती हैं। इससे आपकी कड़ी मेहनत को आयाम मिलेगा तथा उसके द्वारा अधिक से अधिक सफलता मिलने की संभावना बढ़ेगी।


कई प्रकार के सर्वेक्षणों में भी यह बात सामने आई है कि अधिक मेहनती व्यक्ति, जो सामान्य बुद्धि वाला होता है, सफलता प्राप्त करता है। उनके मुकाबले जो कुशाग्र तो होते हैं, किन्तु कम मेहनत करते हैं, सफलता तक नहीं पहुंच पाते। छात्रों को यह बात अपने जेहन में हमेशा याद रखनी चाहिए कि उनका कार्य कड़ी मेहनत करना है, जिसकी दिशा एवं दशा ठीक और समयानुकूल होनी चाहिए। उसके पश्चात अगर इन्हें असफलता मिलती है तो भी धैर्य खोने की आवश्यकता नहीं अपितु यह देखना चाहिए कि आखिर कहां चूक हो गई। उसमें सुधार कर वे अगली सफलता सुनिश्चित कर सकते हैं। याद रखिए कि सफलता उन्हें ही मिलती है जो सफलता के लिए दृढ़ संकल्प होकर प्रयास करते हैं(अनिल कुमार,दैनिक ट्रिब्यून,7.12.11)।

2 comments:

Rajesh Kumari said...

आपकी इस उत्कृष्ठ प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार 29/5/12 को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी |

Dr.Dayaram Aalok said...

राजेश कुमारीजी ,सोने पे सुहागा के अंतर्गत"कब्ज (कांस्टीपेशन) का ईलाज मेरे लिखित चिकित्सा आलेखों में से एक है। मेरी यह पोष्ट सबसे पहिले जान है तो जहान है ब्लाग पर कापी पेस्ट की गई। और अब डा.अयाज ने मेरे पोष्ट को वहां से चुराकर याने कापी पेस्ट कर "सोने पे सुहागा" के अंतर्गत प्रकाशित कर दिया है। इंटरनेत पर मशहूर लेखकों के लेखों की चोरी आम समस्या बन चुकी है।

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