Thursday, April 26, 2012

अनवर बाबू की ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ का असर


ब्लागर दिव्या ने अपना कमेंट बॉक्स हटा लिया।
‘ब्लॉग की ख़बरें‘ ने उनकी ताज़ा नीति का ख़ुलासा ही इस तरह किया।
शीर्षक -

Zealzen Blog एक सस्पेंस , एक पहेली

ब्लागर दिव्या ने शिकायत करते हुए डा. अनवर जमाल साहब से यह कहा है कि 
पर उनकी यही बात हमें पसंद नहीं आती कि वे गाय भैंस की लाश खाते हैं जबकि आजकल कटहल अरवी पनीर रायता पुलाव खाना चाहिए।
अगर उनसे बस यही एक शिकायत है तो वह उनकी ग़लतफ़हमी है।
ब्लाग जगत शुरू से ही उनके बारे में जानता है कि हाज़्मे की दिक्क़त के चलते वह गाय भैंस का मांस तो क्या, वह अंडा तक नहीं खाते।
शादी ब्याह में भी कहीं हमारे साथ जाते हैं तो वह वेजेटेरियन्स के साथ रायता पुलाव ही खाते हैं।

मुझे भी ब्लागर दिव्या की पोस्ट पढ़कर हंसी छूटी कि कमेंट करने वाले सारे ही भाग खड़े हुए। यह तो अपने हाथों अपनी बेइज़्ज़ती ख़ुद करना हुआ। तीन पांच कमेंट लेने की आदत नहीं है। इसलिए कमेंट के बॉक्स को लॉक करना ही ठीक लगा।
हंसिए डा. दिव्या, आप हंसिए. 
आप हंसेगी तो आपके टेंशन्स कुछ तो दूर होंगे।
हंसते हुए इंसान का चेहरा वैसे भी ख़ूबसूरत हो जाता है।
बातों पर भी कुछ न कुछ असर तो ज़रूर ही आएगा।

सच पूछो तो हमें कभी कभी यह भी लगता है कि ब्लागर अनवर और ब्लागर दिव्या अंदरख़ाने कहीं आपस में दोस्त तो नहीं हैं ?
क्योंकि उनके खि़लाफ़ ब्लाग पर लिखने वाले कई ब्लागर के फ़ोन उनके पास आते रहते हैं और हमारे सामने ही वे खिलखिलाकर ऐसे बातें करते हैं जैसे कि वे आपस में दोस्त हों।
ब्लाग जगत में बड़ा गेम चलता है।
पर्दे के पीछे की कहानी कौन जानता है ?
अब जबकि सब वंदना जी के मसले पर सिर खपा रहे थे तब अचानक अनवर साहब ने दिव्या पर पोस्ट लिख डाली और इस तरह अब ब्लाग जगत के चर्चा के केंद्र में दिव्या है।
यह सच है कि अनवर साहब जैसा आदमी विरोध करे तो शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचेगा ही ब्लागर।
दिव्या ने भी यह माना है.

1 comment:

DR. ANWER JAMAL said...

डा. दिव्या श्रीवास्तव जी की बात ही निराली है।
एक लाइन भी बोलेंगी तो आदमी के चरित्रहनन की कोशिश करेंगी। उनका यह मिज़ाज शुरू से ही है।
हमें उनका परिचय जिस पोस्ट से मिला, वहां भी वह यही करती हुई हमें मिली थीं। तब हम उनकी इस ख़ासियत से अन्जान थे। हमने उस पोस्ट पर उनकी हिमायत की थी। जिसे आप आज भी देख सकते हैं।
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