Skip to main content

अनवर बाबू की ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ का असर


ब्लागर दिव्या ने अपना कमेंट बॉक्स हटा लिया।
‘ब्लॉग की ख़बरें‘ ने उनकी ताज़ा नीति का ख़ुलासा ही इस तरह किया।
शीर्षक -

Zealzen Blog एक सस्पेंस , एक पहेली

ब्लागर दिव्या ने शिकायत करते हुए डा. अनवर जमाल साहब से यह कहा है कि 
पर उनकी यही बात हमें पसंद नहीं आती कि वे गाय भैंस की लाश खाते हैं जबकि आजकल कटहल अरवी पनीर रायता पुलाव खाना चाहिए।
अगर उनसे बस यही एक शिकायत है तो वह उनकी ग़लतफ़हमी है।
ब्लाग जगत शुरू से ही उनके बारे में जानता है कि हाज़्मे की दिक्क़त के चलते वह गाय भैंस का मांस तो क्या, वह अंडा तक नहीं खाते।
शादी ब्याह में भी कहीं हमारे साथ जाते हैं तो वह वेजेटेरियन्स के साथ रायता पुलाव ही खाते हैं।

मुझे भी ब्लागर दिव्या की पोस्ट पढ़कर हंसी छूटी कि कमेंट करने वाले सारे ही भाग खड़े हुए। यह तो अपने हाथों अपनी बेइज़्ज़ती ख़ुद करना हुआ। तीन पांच कमेंट लेने की आदत नहीं है। इसलिए कमेंट के बॉक्स को लॉक करना ही ठीक लगा।
हंसिए डा. दिव्या, आप हंसिए. 
आप हंसेगी तो आपके टेंशन्स कुछ तो दूर होंगे।
हंसते हुए इंसान का चेहरा वैसे भी ख़ूबसूरत हो जाता है।
बातों पर भी कुछ न कुछ असर तो ज़रूर ही आएगा।

सच पूछो तो हमें कभी कभी यह भी लगता है कि ब्लागर अनवर और ब्लागर दिव्या अंदरख़ाने कहीं आपस में दोस्त तो नहीं हैं ?
क्योंकि उनके खि़लाफ़ ब्लाग पर लिखने वाले कई ब्लागर के फ़ोन उनके पास आते रहते हैं और हमारे सामने ही वे खिलखिलाकर ऐसे बातें करते हैं जैसे कि वे आपस में दोस्त हों।
ब्लाग जगत में बड़ा गेम चलता है।
पर्दे के पीछे की कहानी कौन जानता है ?
अब जबकि सब वंदना जी के मसले पर सिर खपा रहे थे तब अचानक अनवर साहब ने दिव्या पर पोस्ट लिख डाली और इस तरह अब ब्लाग जगत के चर्चा के केंद्र में दिव्या है।
यह सच है कि अनवर साहब जैसा आदमी विरोध करे तो शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचेगा ही ब्लागर।
दिव्या ने भी यह माना है.

Comments

DR. ANWER JAMAL said…
डा. दिव्या श्रीवास्तव जी की बात ही निराली है।
एक लाइन भी बोलेंगी तो आदमी के चरित्रहनन की कोशिश करेंगी। उनका यह मिज़ाज शुरू से ही है।
हमें उनका परिचय जिस पोस्ट से मिला, वहां भी वह यही करती हुई हमें मिली थीं। तब हम उनकी इस ख़ासियत से अन्जान थे। हमने उस पोस्ट पर उनकी हिमायत की थी। जिसे आप आज भी देख सकते हैं।
डा. दिव्या श्रीवास्तव का परिचय हमें कैसे मिला ? Dr. Divya Shriwastawa's Introduction

Popular posts from this blog

क्या आप सूअर की चर्बी खा रहे हैं ?

बी. एस. पाबला  जी का लेख देख कर मन में यही विचार आया, क्योंकि हम तो लेज़ खाते नहीं हैं और हो सकता है कि दूसरे प्रोडक्ट्स में E 631 हम भी खा रहे हों जो कि हक़ीक़त में सूअर की चर्बी का कोड है . यूरोप और अमेरिका में जा बसे हिन्दू मुसलमान कहाँ तक बच पाते होंगे सूअर की चर्बी से . मुस्लिम देशों में इसे गाय या भेड़ की चर्बी कह प्रचारित किया गया लेकिन इसके हलाल न होने से असंतोष थमा नहीं और इसे प्रतिबंधित कर दिया गया। बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नींदउड़गई। आखिर उनका 75 प्रतिशत कमाई मारी जा रही थी इन बातों से। हार कर एक राह निकाली गई। अबगुप्तसंकेतोवालीभाषा का उपयोग करने की सोची गई जिसे केवल संबंधित विभाग ही जानें कि यह क्या है! आम उपभोक्ता अनजान रह सब हजम करता रहे। तब जनमहुआ E कोडका
तब से यह E631 पदार्थकईचीजोंमेंउपयोग किया जाने लगा जिसमे मुख्य हैं टूथपेस्ट, शेविंग क्रीम, च्युंग गम, चॉकलेट, मिठाई, बिस्कुट, कोर्न फ्लैक्स, टॉफी, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ आदि। सूची में और भी नाम हो सकते हैं। हाँ, कुछ मल्टी-विटामिनकी गोलियों में भी यह पदार्थ होता है। शिशुयों, किशोरों सहित अस्थमा और गठिया के रोगियों को

बवासीर

दोस्तों बवासीर ऐसी बीमारी है जो किसी भी आदमी का रात दिन का चैन सुकून छीन लेता है.....देसी दवाइयों से इसका कामयाब इलाज संभव है यदि परहेज़ ध्यान रखा जाए
............... पाइल्स (बवासीर, अर्श): वात, पित, कफ़ ये तीनो दोष त्वचा, मांस, मेदा को दूषित करके गुदा के अंदर और बाहरी स्थानों मैं मांस के अंकुर (मस्से/फफोले) तैयार करते हैं. इन्ही मांस के अंकुरों को बवासीर या अर्श कहते हैं ! ये मांस के अंकुर गुदामार्ग का अवरोध करते हैं और मलत्याग के समय शत्रु की भांति पीड़ा करते हैं ! इसलिए इनको अर्श भी कहा जाता है. ( चरक) बवासीर का सबसे उत्तम उपचार आयुर्वेद के द्वारा ही किया जा सकता है ! आयुर्वेदिक उपचार एक बहुत ही सुलझा और बिना साइड इफ़ेक्ट का उपचार है ! पाइल्स को पूरी तरह से आयुर्वेदिक तरीके से ही ठीक किया जा सकता है| बाहरी लक्षणों के कारण भेद: बवासीर 2 प्रकार (kind of piles) की होती हैं। एक भीतरी(खूनी) बवासीर तथा दूसरी (बादी) बाहरी बवासीर। भीतरी / ख़ूनी बवासीर / आन्तरिक / रक्‍त स्रावी अर्श / रक्तार्श ख़ूनी बवासीर में मलाशय की आकुंचक पेशी के अन्दर अर्श होता है तो वह म्युकस मेम्ब्रेन (Mucous Membran…

शुक्राणुहीनता NIL SPERM

शुक्राणु की कमी के कारण और निवारण आदमी दिखनें में तन्दरुस्त हो ताकतवर हो लेकिन उसके शुक्राणु अगर दुर्बल हैं तो वो गर्भ धारण नहीं करवा सकते - तो जानें वीर्य में स्वस्थ शुक्राणुओं को बढ़ाने के चंद तरीके - पुरुष के वीर्य में शुक्राणु होते हैं ये शुक्राणु स्त्री के डिम्बाणु को निषेचित कर गर्भ धारण के लिये जिम्मेदार होते हैं - वीर्य में इन शुक्राणुओं की तादाद कम होने को शुक्राणु अल्पता की स्थिति कहा जाता है। शुक्राणु की कमी को ओलिगोस्पर्मिया कहते हैं लेकिन अगर वीर्य में शुक्राणुओं की मौजूदगी ही नहीं है तो इसे एज़ूस्पर्मिया संज्ञा दी जाती है ऐसे पुरुष संतान पैदा करने योग्य नहीं होते हैं। वीर्य में स्वस्थ शुक्राणुओं की तादाद कम होने के निम्न कारण हो सकते हैं-- * वीर्य का दूषित होना * अंडकोष पर गरमी के कारण वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है। ज्यादा तंग अन्डर वियर पहिनने,गरम पानी से स्नान करने, बहुत देर तक गरम पानी के टब में बैठने और मोटापा होने से शुक्राणु अल्पता हो जाती है। * हस्तमैथुन से बार बार वीर्य स्खलित करना * थौडी अवधि में कई बार स्त्री समागम करना * अधिक शारीरिक और मानसिक …