Wednesday, April 25, 2012

क़ुरआन पढ़ने से पहले दिल निर्मल कीजिए और निष्पक्ष हो कर क़ुरआन पढ़िये


अदा नाम की एक ब्लागर ने क़ुरआन के खि़लाफ़ वही नफ़रत भरी बातें की हैं जो कि मुल्क के ग़ददारों की एक आम फ़ितरत है।
डा. अनवर जमाल साहब की पोस्ट इसका एक अच्छा जवाब है।
उनकी पोस्ट का उनवान है-

[Blog News] क़ुरआन के बारे में ग़लतफ़हमियों का निवारण (Swami Lakshmi Shankaracharya) & Archarya Sanjay Dwivedi



लोग बूढ़े हो जाएं तो यह नहीं होता कि उनके दिल का मैल भी दूर हो जाए। दिल साफ़ होता है तब जबकि उसकी सफ़ाई की जाए। बूढ़े होने का मतलब यह भी नहीं है कि उसे ज्ञान मिल गया। ज्ञान भी तब ही मिलता है जबकि उसे ज्ञानियों से प्राप्त किया जाए।
आईना टेढ़ा हो तस्वीर भी टेढ़ी ही दिखेगी। दिल भी एक आईना है। क़ुरआन पढ़ने से पहले इसे निर्मल कीजिए और निष्पक्ष हो कर क़ुरआन पढ़िये। तब पता चलेगा कि जो इल्ज़ाम क़ुरआन पर लगा रहे थे, वह बस इल्ज़ाम ही थे, जिनकी कोई सच्चाई कभी थी ही नहीं।
कुछ वजहों से आदमी क़ुरआन का नाम सुनता है लेकिन उसे पढ़ता कभी नहीं है। जब वह पढ़ता है तो उसे लगता है कि मुझसे बड़ी ग़लती हुई जो मैंने क़ुरआन के बारे में औल फ़ौल बका।
स्वामी लक्ष्मीशंकराचार्य ऐसे ही व्यक्ति हैं।
उनकी पोस्ट को यहां देखा जा सकता है-

इस्लाम आतंक ? या आदर्श


इसी के साथ देखिए यह वीडियो कि क़ुरआन क्या सिखाता है ?




Ex-Shankarcharya Sanjay Dwivedi : How Vedas Guide me to Islam from Hinduism



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