Thursday, April 12, 2012

...तब आपकी रूह आपकी सही रहनुमाई करेगी

अगर ग़लत बात को चंद संजीदा लोग मिलकर ग़लत कह दें तो ग़लत आदमी का हौसला टूट जायेगा.
सच को सच कहना जितना ज़रूरी है उतना ही ज़रूरी है ग़लत को ग़लत कहना.
जो आदमी किसी से भी बुरा नहीं बनना चाहता वह सच का साथ क्या दे पायेगा ?
इंसाफ करो और ज़ुल्म को बुरा समझो और ज़ालिम की मुखालिफ़त करो.
बुरों को समझाओ और ना मानें तो दुत्कारो.
खुद बुरा करो तो अपने आप को भी मलामत करो तब आपकी रूह आपकी सही रहनुमाई करेगी.

हिंदी ब्लॉगर्स के क्रिया कलाप का पोस्टमार्टम बिल्कुल ताज़ा ताज़ा द्वारा डा. अनवर जमाल

पर एक इज़हारे ख़याल 


2 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

डा. अयाज़ साहब ! आपने जो कुछ कहा है वह अमल में लाया जाए तो दुनिया बेहतर बन सकती है।
शुक्रिया !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

सर्वप्रथम बैशाखी की शुभकामनाएँ और जलियाँवाला बाग के शहीदों को नमन!
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर लगाई गई है!
सूचनार्थ!

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