Wednesday, April 11, 2012

हिंदी ब्लॉगर्स के क्रिया कलाप का पोस्टमार्टम बिल्कुल ताज़ा ताज़ा द्वारा डा. अनवर जमाल




ब्लॉगर चुक गए हैं या चुकते जा रहे हैं।
हिंदी ब्लॉगर्स की ताज़ा पोस्ट्स देखकर ऐसा लगता है।
ख़ुद के लिए आज़ादी चाहता है और दूसरों पर ऐतराज़ करता है और ख़ुद पर ऐतराज़ किया जाता है तो बर्दाश्त नहीं कर पाता।
समझ नहीं आता कि जब अपने दिल की कह नहीं सकते और दूसरे के दिल की झेल नहीं सकते तो ब्लॉगर क्यों बन गए ?
क्या सिर्फ़ इसलिए कि ऑफ़िस में मुफ़्त का कम्प्यूटर हाथ आ गया इत्तेफ़ाक़ से ?
या इसलिए कि दिल्ली में पैदा हो गए ?
कोई पत्थर फेंक रहा है और कोई बैठा हुआ गिनती गिन रहा है, उनके लगे सगे वहां बैठे हुए उन्हें राई के पहाड़ पर उगे हुए चने के झाड़ पर चढ़ा रहे हैं।
इन दिल्ली वाले ब्लॉगर्स ने हिंदी ब्लॉगिंग को ऐसा बना दिया है कि अब लोगों ने शर्मो हया लुट जाने पर आत्महत्या करना ही छोड़ दिया है।
वे सोचते हैं कि जब हिंदी ब्लॉगर्स सम्मान से जी सकते हैं तो फिर हम क्यों नहीं ?

8 comments:

रविकर said...

nice
कोई पत्थर फेंक रहा है और कोई बैठा हुआ गिनती गिन रहा है ||

DR. ANWER JAMAL said...

शीर्षक में भी अपने पेशे का लिहाज़ ख़ूब रखा आपने ।

सुशील कुमार जोशी said...

वोही आदमी है जो बाजार में दिख जाता है
ब्लोगर बनता है पर बाजार में भी आता है
आदतों से मजबूर भी तो है बेचारा
झगड़े फसाद जिंदगी के साथ भी लाता है ।

Rajesh Kumari said...

समझ नहीं आता कि जब अपने दिल की कह नहीं सकते और दूसरे के दिल की झेल नहीं सकते तो ब्लॉगर क्यों बन गए ?nice Q??
vicharniye post.

दिलबागसिंह विर्क said...

आपकी पोस्ट चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
http://charchamanch.blogspot.in/2012/04/847.html
चर्चा - 847:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

Gyan Darpan said...

दूसरों पर ऐतराज़ करता है और ख़ुद पर ऐतराज़ किया जाता है तो बर्दाश्त नहीं कर पाता।
@ ऐसी मानसिकता वालों को दोगला कहते है|

Ayaz ahmad said...

ज़र्रा नवाज़ी के लिए शुक्रिया .
अगर ग़लत बात को आप जैसे चंद संजीदा लोग मिलकर ग़लत कह दें तो ग़लत आदमी का हौसला टूट जायेगा.

shyam gupta said...

वो आदमी है आदमी सी हर बात करता है।
ब्लोगर है तो क्या हुआ, किसी से डरता है?

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