Saturday, February 4, 2012

मीडिया, सीबीआई और अदालत कौन ख़रीद पाया है ?

इनके बिकने का इल्ज़ाम वही लगाता है जो कि ख़ुद इन्हें न ख़रीद पाया हो, जो भी इनके बिकने का इल्ज़ाम लगाता है, वह देश के क़ानून से लोगों का भरोसा उठाने का काम करता है और देश में बग़ावत भड़काने का काम सिर्फ़ ग़ददार ही किया करते हैं।

अपने फ़र्ज़ के लिए क़त्ल होने वाले पत्रकारों की फ़ेहरिस्त लंबी है और ऐसे ही लोग सीबीआई और अदालत में भी हैं। देश से भागे हुए ग़ददार इनकी वफ़ादारी पर उंगली उठाकर दरअसल यह बता रहे हैं कि वे ख़ुद बिकाऊ माल हैं और ऐसा ही वे दूसरों के बारे में सोचते हैं।

3 comments:

Shah Nawaz said...

Agar manmafik faisla aata to yahi adalat sachchi deshbhakt lagti in logo ko...

Meetha-Meetha Gapp-Gapp... Kadva-Kadva thu-thu...

Vaise bhi apni haar se tilmila rahein hai kuchh log...

DR. ANWER JAMAL said...

chunavi paintre hain ye sab ilzaam. Kursi par qabze ke liye nafrat phailana thik nahi hai.

चंदन said...

पर सच्चाई अलग है महोदय...आपने निचली अदालतों जहां से हमारा आपका काम होता है वहाँ कि परिस्थितियाँ तो देखि होगी,...यही बात सी बी आई और पत्रकारों के साथ भी होता है...आप सच्चाई से दूर जाना चाह रहे हैं.....

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