Skip to main content

आगे बढ़कर सत्य को मानें और दूसरों के लिए एक मिसाल बनें जैसे कि पं. श्री दुर्गाशंकर सत्यार्थी जी महाराज

ZEAL: बढती मुस्लिम आबादी एक विश्व-संकट (Muslim demographics (Europe, USA, Scandinavia) पर ग़ौरो फ़िक्र किया जाए तो कुछ बातें सामने आती हैं और जो बातें सामने आती हैं, उन्हें जानने के बाद दिल को बहुत सुकून मिलता है।
मुसलमानों की आबादी बढ़ रही है या नहीं और बढ़ रही है तो कितनी बढ़ रही है ?
इस पर आज ध्यान देने की ज़रूरत है और उससे भी ज़्यादा ज़रूरत इस बात पर देने की है कि हिंदुस्तान के पंडित और शास्त्री पहले से ही बता रहे हैं कि अब जल्दी ही सतयुग आने वाला है।
वह सतयुग इसी रूप में आएगा कि सत्य को मानने वाले ही विश्व पर छा जाएंगे।
तब क्यों न आप पहले से ही आगे बढ़कर सत्य को मानें और दूसरों के लिए एक मिसाल बनें जैसे कि पं. श्री दुर्गाशंकर सत्यार्थी जी महाराज ने भी कहा है कि
वेद और क़ुरआन हक़ीक़त में एक ही धर्म के दो ग्रंथ हैं।
इसी बात को छिपाए रखने के लिए और हिंदू और मुसलमानों को आपस में लड़ाए रखने के लिए अंग्रेज़ बहादुर ने बहुत चालाकी से काम लिया और आज तक ले रहे हैं और कम समझ नादान लोग उनके सुर में सुर मिलाए जा रहे हैं। विदेशों में बैठे हुए कुछ लोग आज भी हिंदुओं के मन में मुसलमानों के लिए नफ़रत के बीज बोते रहते हैं और उसका फ़ायदा उनके आक़ाओं को ही मिलता है।
पंडित सत्यार्थी साहब का मज़्मून ऐसी हरेक साज़िश को नाकाम कर देता है, उसे पढ़िए और उसे शेयर भी कीजिए।

वेद में सरवरे कायनात स. का ज़िक्र है Mohammad in Ved Upanishad & Quran Hadees

वस्तुतः वेद और क़ुरआन, दोनों का एक साथ अस्तित्व नास्तिकों के लिए घोर परेशानी का कारण बना हुआ है और अंग्रेज़ इस संभावना से आतंकित थे कि यदि यह रहस्य हिंदुओं और मुसलमानों पर खुल गया कि वेद और क़ुरआन, दोनों की सैद्धांतिक शिक्षाएं सर्वथा एक समान हैं और दोनों एक ही धर्म के आदि और अंतिम ग्रंथ हैं, तो हिंदुओं और मुसलमानों में वह मतैक्य संस्थापित होगा कि उन्हें हिंदुस्तान से पलायताम की स्थिति में आने के अतिरिक्त कोई और विकल्प नहीं रहेगा। यही कारण है कि अंग्रेज़ों ने वेद के बहुदेवोपास्यवादी अनुवाद कराना अपना सर्वप्रथम कार्य निश्चित किया।

Comments

Fun and Learns said…
Welcome to www.funandlearns.com

You are welcome to Fun and Learns Blog Aggregator. It is the fastest and latest way to Ping your blog, site or RSS Feed and gain traffic and exposure in real-time. It is a network of world's best blogs and bloggers. We request you please register here and submit your precious blog in this Blog Aggregator.

Add your blog now!

Thank you
Fun and Learns Team
www.funandlearns.com
अब जल्दी ही सतयुग आने वाला है।
वह सतयुग इसी रूप में आएगा कि सत्य को मानने वाले ही विश्व पर छा जाएंगे।
@ सतयुग तो पता नहीं आएगा या नहीं पर उसके आने से पहले यह (बढती आबादी) समस्या कलियुग के चरम का अहसास जरुर करवा देगी|
रविकर said…
क्या आपकी उत्कृष्ट-प्रस्तुति

शुक्रवारीय चर्चामंच

की कुंडली में लिपटी पड़ी है ??

charchamanch.blogspot.com
DR. ANWER JAMAL said…
सत्य के अनुसरण से ही सतयुग आएगा Towards Satyug
भाई रतन सिंह शेख़ावत जी ! मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है। दुख की बात यह है कि मुसलमानों की नफ़रत में इंसान इस हद तक गिर गया है कि वह ईश्वर की कृतियों की पैदाइश पर ही पाबंदी की बातें सोचने लगा है। ये वे लोग हैं जो कि अपने ख़र्चे पर अपने ही पेटों में ईश्वर की कृति को सिर्फ़ इसलिए क़त्ल कर देते हैं कि वह लड़की है। समस्या वास्तव में यही लालची सोच है। जिस दिन आदमी अपने लालच पर क़ाबू पा लेगा, उस दिन उसके दिल से बढ़ती आबादी का डर भी निकल जाएगा। उसके दिल से यह डर तब निकलेगा जब उसके दिल में ईमान आएगा कि मूलतः योजना बनाने और अपना हुक्म चलाने का अधिकार मनुष्य को नहीं है। जगत का सच्चा योजनाकार वास्तव में एक ईश्वर है। पैदा करने वाला वही है। जिसे वह पैदा कर रहा है, उसका अन्न पानी भी वही देगा। इस देश से भ्रष्टाचार ख़त्म हो जाए और पूंजीवादियों के हितों को पूरा करने से बचा जाए तो आज भी धरती इतना अन्न फल उपजाती है कि वह हम सबके लिए काफ़ी है।
इस ज़मीन से ज़रूरतें तो सबकी पूरी हो सकती हैं लेकिन हवस तो किसी एक की भी पूरी नहीं हो सकती।
हवस की दलदल से निकलने की आज सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।
ईश्वर की योजना क्या है और उसका आदेश क्या है ?
इसका पता आज केवल क़ुरआन से ही चल सकता है जो कि ऐतिहासिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित है। मुसलमानों से नफ़रत हवस के मारों को क़ुरआन से दूर ले जा रही है और फिर वे जान ही नहीं पाते कि उनकी पैदाइश से उस मालिक का उददेश्य क्या था ?
वे बस खा पीकर और जल कुढ़कर ही मर जाते हैं।
जलना ही उनकी तक़दीर है दुनिया में भी और दुनिया से जाने के बाद भी।
उनके लिए आग है यहां भी और वहां भी।
शांति केवल ईश्वर की शरण में है और उसके आदेश के अनुसरण में है। सत्य के अनुसरण से ही सतयुग आएगा।
इसी में मनुष्य की सफलता है।
आइए अपने जीवन को हम सफल बनाएं।
प्रेम करें और प्रेम पाएं।
जिससे हम प्रेम करते हैं, उसे बढ़ते देखना हम पसंद करते हैं।
रहने के लिए केवल धरती ही तो नहीं है, अब तो ईश्वर ने आकाश मार्ग भी हमारे लिए खोल दिया है, जहां अरबों खरबों ग्रह मौजूद हैं।
ऊंचा सोचिए और ऊंचा पहुंचिए।
--------------------------
यह कमेन्ट निम्न पोस्ट Link पर दिया गया है :
http://commentsgarden.blogspot.in/2012/02/towards-satyug.html
Shah Nawaz said…
कुछ लोगो को हौव्वा खड़ा करके राजनीती चमकाने की आदत होती है, और जो दरें उन्होंने बताई हैं वह जन्मदर नहीं है, इन देशों में अक्सर लोग इस्लाम अपना रहे हैं, और इसीलिए मुसलमानों की संख्या बढ़ रही है.
Shah Nawaz said…
वैसे भी मुसलामानों को 'आतंकवादी' कहने वालो से इससे ज्यादा और उम्मीद भी क्या की जा सकती है???
आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
http://charchamanch.blogspot.in/2012/02/777.html
चर्चा मंच-777-:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

Popular posts from this blog

क्या आप सूअर की चर्बी खा रहे हैं ?

बी. एस. पाबला  जी का लेख देख कर मन में यही विचार आया, क्योंकि हम तो लेज़ खाते नहीं हैं और हो सकता है कि दूसरे प्रोडक्ट्स में E 631 हम भी खा रहे हों जो कि हक़ीक़त में सूअर की चर्बी का कोड है . यूरोप और अमेरिका में जा बसे हिन्दू मुसलमान कहाँ तक बच पाते होंगे सूअर की चर्बी से . मुस्लिम देशों में इसे गाय या भेड़ की चर्बी कह प्रचारित किया गया लेकिन इसके हलाल न होने से असंतोष थमा नहीं और इसे प्रतिबंधित कर दिया गया। बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नींदउड़गई। आखिर उनका 75 प्रतिशत कमाई मारी जा रही थी इन बातों से। हार कर एक राह निकाली गई। अबगुप्तसंकेतोवालीभाषा का उपयोग करने की सोची गई जिसे केवल संबंधित विभाग ही जानें कि यह क्या है! आम उपभोक्ता अनजान रह सब हजम करता रहे। तब जनमहुआ E कोडका
तब से यह E631 पदार्थकईचीजोंमेंउपयोग किया जाने लगा जिसमे मुख्य हैं टूथपेस्ट, शेविंग क्रीम, च्युंग गम, चॉकलेट, मिठाई, बिस्कुट, कोर्न फ्लैक्स, टॉफी, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ आदि। सूची में और भी नाम हो सकते हैं। हाँ, कुछ मल्टी-विटामिनकी गोलियों में भी यह पदार्थ होता है। शिशुयों, किशोरों सहित अस्थमा और गठिया के रोगियों को

बवासीर

दोस्तों बवासीर ऐसी बीमारी है जो किसी भी आदमी का रात दिन का चैन सुकून छीन लेता है.....देसी दवाइयों से इसका कामयाब इलाज संभव है यदि परहेज़ ध्यान रखा जाए
............... पाइल्स (बवासीर, अर्श): वात, पित, कफ़ ये तीनो दोष त्वचा, मांस, मेदा को दूषित करके गुदा के अंदर और बाहरी स्थानों मैं मांस के अंकुर (मस्से/फफोले) तैयार करते हैं. इन्ही मांस के अंकुरों को बवासीर या अर्श कहते हैं ! ये मांस के अंकुर गुदामार्ग का अवरोध करते हैं और मलत्याग के समय शत्रु की भांति पीड़ा करते हैं ! इसलिए इनको अर्श भी कहा जाता है. ( चरक) बवासीर का सबसे उत्तम उपचार आयुर्वेद के द्वारा ही किया जा सकता है ! आयुर्वेदिक उपचार एक बहुत ही सुलझा और बिना साइड इफ़ेक्ट का उपचार है ! पाइल्स को पूरी तरह से आयुर्वेदिक तरीके से ही ठीक किया जा सकता है| बाहरी लक्षणों के कारण भेद: बवासीर 2 प्रकार (kind of piles) की होती हैं। एक भीतरी(खूनी) बवासीर तथा दूसरी (बादी) बाहरी बवासीर। भीतरी / ख़ूनी बवासीर / आन्तरिक / रक्‍त स्रावी अर्श / रक्तार्श ख़ूनी बवासीर में मलाशय की आकुंचक पेशी के अन्दर अर्श होता है तो वह म्युकस मेम्ब्रेन (Mucous Membran…

शुक्राणुहीनता NIL SPERM

शुक्राणु की कमी के कारण और निवारण आदमी दिखनें में तन्दरुस्त हो ताकतवर हो लेकिन उसके शुक्राणु अगर दुर्बल हैं तो वो गर्भ धारण नहीं करवा सकते - तो जानें वीर्य में स्वस्थ शुक्राणुओं को बढ़ाने के चंद तरीके - पुरुष के वीर्य में शुक्राणु होते हैं ये शुक्राणु स्त्री के डिम्बाणु को निषेचित कर गर्भ धारण के लिये जिम्मेदार होते हैं - वीर्य में इन शुक्राणुओं की तादाद कम होने को शुक्राणु अल्पता की स्थिति कहा जाता है। शुक्राणु की कमी को ओलिगोस्पर्मिया कहते हैं लेकिन अगर वीर्य में शुक्राणुओं की मौजूदगी ही नहीं है तो इसे एज़ूस्पर्मिया संज्ञा दी जाती है ऐसे पुरुष संतान पैदा करने योग्य नहीं होते हैं। वीर्य में स्वस्थ शुक्राणुओं की तादाद कम होने के निम्न कारण हो सकते हैं-- * वीर्य का दूषित होना * अंडकोष पर गरमी के कारण वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है। ज्यादा तंग अन्डर वियर पहिनने,गरम पानी से स्नान करने, बहुत देर तक गरम पानी के टब में बैठने और मोटापा होने से शुक्राणु अल्पता हो जाती है। * हस्तमैथुन से बार बार वीर्य स्खलित करना * थौडी अवधि में कई बार स्त्री समागम करना * अधिक शारीरिक और मानसिक …