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Showing posts from February, 2012

बैल से "ऋषभक" तक, एक बहस

शाकाहारी भाइयों को यह गवारा नहीं है कि कोई यह कहे कि वैदिक यज्ञों में पशु बलि होती थी. निरामिष ब्लॉग पर एक पोस्ट देखिये : ऋषभ कंद - ऋषभक का परिचय ।। वेद विशेष ।।
चित्र स्रोत के लिए क्लिक करें  इस पर यह कहा गया है:पूछने वाले ने तो पहले यह पूछा था कि-
वह कौन सी औषधि है जिसके पैर , आंखें और 26 पसलियां हों ?
### क्या इस न मिलने वाले "ऋषभक" के पैर , आंखें और 26 पसलियां हैं ?
### अगर नहीं हैं तो फिर यह "ऋषभक" कहाँ हुआ ?
‘आपको यह जानकर हैरानी होगी कि प्राचीन कर्मकांड के मुताबिक़ वह अच्छा हिंदू नहीं जो गोमांस नहीं खाता. उसे कुछ निश्चित अवसरों पर बैल की बलि दे कर मांस अवश्य खाना चाहिए.‘
(देखें ‘द कंपलीट वकर््स आफ़ स्वामी विवेकानंद, जिल्द तीन, पृ. 536)
इसी पुस्तक में पृष्ठ संख्या 174 पर स्वामी विवेकानंद ने कहा है ,
‘भारत में एक ऐसा समय भी रहा है जब बिना गोमांस खाए कोई ब्राह्मण ब्राह्मण नहीं रह सकता था.‘

भाई साहब ब्राह्मणों पर हम कोई आक्षेप नहीं लगा रहे हैं बल्कि जो कुछ स्वामी विवेकानंद जी आदि बता रहे हैं उसी का उद्धरण हम यहां दे रहे हैं और आप ऐसा नहीं कह सकते कि उन्हें वैदिक सं…

देख तमाशा दुनिया का - 'एक लिंक्स चर्चा'

1- आज की चर्चा में आप सबका हार्दिक स्वागत है एक प्रिंसिपल चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी नियुक्त नहीं कर सकता, लेकिन उसने राजपत्रित अधिकारियों ( प्रवक्ता ) की नियुक्ति की । हरियाणा सरकार बैकडोर इंट्री के रूप में हुई इस भर्ती को जायज ठहराने की हर संभव कोशिश कर रही थी , लेकिन हाई कोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि सरकार अतिथि अध्यापकों के दवाब में काम कर रही है , यह भर्ती न्यायसंगत नहीं है । यह फैसला झटका है गेस्ट टीचर्स को और ऊँगली उठाता है हरियाणा सरकार की कार्य प्रणाली पर । अतिथि कब जाओगे ? ( चर्चामंच - 798 )  प्रस्तुतकर्ता दिलबाग विर्क चर्चा  मंच पर2-
लंबे बच्चे चाहिए तो दूर की बीवी लाएं
BBCसुनने में यह बात अजीब-सी लग सकती है, लेकिन पोलैंड के वैज्ञानिकों का दावा है कि अगर पति और पत्नी एक ही शहर के हैं तो उनके बच्चे का कद नाटा रहेगा।





3-
सफ़ेद बाल काले कीजिए नीम सेनीम का तेल नाक के नथुनों में चंद क़तरे रोज़ाना टपकाएं आपके बाल अगर उम्र से पहले सफ़ेद हो गए हैं तो वे काले हो जाएंगे।
प्रस्तुतकर्ता

चिरकुटानंद ब्लॉगर किसे कहते हैं ?, पुरस्कार वितरण विवाद

मनोज साहब ने ईनाम बांटने का काम शुरू किया। ईनाम उन्होंने कम को बांटा और ज़्यादातर को उन्होंने ‘चिरकुट‘ का खि़ताब दे दिया। कहते हैं कि जो ब्लॉगर प्रब्लेस शिखर पुरस्कार के लिए प्रविष्टि न भेजे या किसी के नाम का अनुमोदन न करें और हमारे पुरस्कार वितरण की समीक्षा करे तो वे ब्लॉगर ‘चिरकुटानंद‘ हैं। यह स्तर है प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ के सर्वेसर्वा के सोचने का, और इसके बावजूद वह चाहते हैं कि विद्वान हिंदी ब्लॉगर उनसे पुरस्कार पाने के लिए लाइन लगाकर खड़े हो जाएं।
‘ब्लॉग की ख़बरें‘ की पोस्ट पर उनकी टिप्पणियों में उनकी सोच का लेवल आप ख़ुद देखिए इस लिंक पर जाकर ब्लॉगर्स को प्रब्लेस शिखर सम्मान मुबारक हो ! PrizeKhushdeep Sehgal said... दो दोस्तों ने फलों के कारोबार का फैसला किया...एक संतरे का टोकरा लेकर बैठ गया...एक केले का...दोनों ने फैसला किया सिर्फ कैश बिक्री करेंगे, उधार का कोई काम नहीं...थोड़ी देर बाद संतरे वाले को भूख लगी, उसने दो का सिक्का केले वाले को देकर केला लेकर खा लिया...केले वाले ने कहा, चलो बोहणी तो हुई...शाम तक दोनों के टोकरे खाली हो गए...पास ही संतरे और केले के छिलके के…

अपनी बेटियों के सफ़ेद बाल काले कीजिए नीम से Hair care

गज़ब के लिंक्स जमा किये हैं ब्लॉगर्स मीट वीकली में. सेहत, करिअर और ब्लॉगिंग के ताज़ा मुद्दे जैसे कि पुरस्कार वितरण. सभी कुछ है.  बाल काले करने का नुस्खा भी है और मर्दाना ताक़त बढ़ाने का भी. वाह ...
हमारी पोस्ट शामिल करने के लिए शुक्रिया . इस मीट का लिंक -  ब्लॉगर्स मीट वीकली (31) Carrier in Homoeopathy

आज का मुददा है पुरस्कार वितरण

इसका पता हमें ‘ब्लॉग की ख़बरें‘ से चला।
दरअसल यह कोई मुददा ही नहीं है लेकिन इसे मुददा बना दिया है मुददा बनाने वालों ने और जब मुददा बन ही गया है तो लोगों को रस भी आने लगा है इसकी चर्चा में।
कैसे कोई बरसों लिखता रहता है और उसे पुरस्कार में मिलते हैं अपने बीवी बच्चों के ताने और कैसे कोई दूसरों के लिखे पर लिखता है लेकिन वह शोहरत के साथ दाम भी कमा लेता है।
जब दुनिया में यही हो रहा है तो फिर ब्लॉगिंग में भी यही होगा। जिसका सौदा जहां पटेगा, वह वहीं सैट हो जाएगा।
जब तक जूते सिर पर नहीं पड़े थे तो 2 जी और 3 जी वालों के भी अभिनंदन धड़ल्ले से किए जा रहे थे।
ब्लॉगिंग में भी यह सब तो होना ही है।
आखि़र सब जगह इंसान ही तो हैं।

कब्ज (कांस्टीपेशन) का इलाज.

अनियमित खान-पान के चलते लोगों में कब्ज एक आम बीमारी की तरह प्रचलित है। यह पाचन तन्त्र का प्रमुख विकार है। मनुष्यों मे मल निष्कासन की फ़्रिक्वेन्सी अलग अलग पाई जाती है। किसी को दिन में एक बार मल विसर्जन होता है तो किसी को दिन में २-३ बार होता है। कुछ लोग हफ़्ते में २ य ३ बार मल विसर्जन करते हैं। ज्यादा कठोर,गाढा और सूखा मल जिसको बाहर धकेलने के लिये जोर लगाना पडे यह कब्ज रोग का प्रमुख लक्छण है।ऐसा मल हफ़्ते में ३ से कम दफ़ा आता है और यह इस रोग का दूसरा लक्छण है। कब्ज रोगियों में पेट फ़ूलने की शिकायत भी साथ में देखने को मिलती है। यह रोग किसी व्यक्ति को किसी भी आयु में हो सकता है हो सकता है लेकिन महिलाओं और बुजुर्गों में कब्ज रोग की प्राधानता पाई जाती है।
कब्ज निवारक नुस्खे इस्तेमाल करने से कब्ज का निवारण होता है और कब्ज से होने वाले रोगों से भी बचाव हो जाता है--

१---कब्ज का मूल कारण शरीर मे तरल की कमी होना है। पानी की कमी से आंतों में मल सूख जाता है और मल निष्कासन में जोर लगाना पडता है। अत: कब्ज से परेशान रोगी को दिन मे २४ घंटे मे मौसम के मुताबिक ३ से ५ लिटर पानी पीने की आदत डालन…

दलिद्दर दूर करने की तिलस्माती तकनीक

डा. अनवर जमाल की एक शाहकार पेशकश 
ब्लॉगर्स मीट वीकली (30) Sun & The Spirit
भविष्य बताने वाले और कष्ट दूर करने वाले ज्योतिषियों और बाबाओं की तिलिस्मी तकनीकरोज़ी रोटी की तो क्या यहां हलवा पूरी की भी कोई समस्या नहीं है
नज्म सितारे को कहते हैं और नूजूमी उसे जो सितारों की चाल से वाक़िफ़ हो।
सितारों की चाल के असरात ज़मीन की आबो हवा पर तो पड़ते ही हैं। शायद इसी से लोगों ने समझा हो कि हमारी ज़िंदगी के हालात पर भी सितारों की चाल का असर पड़ता है।
कुछ हमने भी यार दोस्तों के हाथों की लकीरें देखी हैं और इसी दौरान मनोविज्ञान से भी परिचित हुए।
कोई आदमी सितारों और उनकी कुंडलियों को न भी जानता हो लेकिन वह इंसान के मनोविज्ञान को जानता हो तो वह इस देश में ऐश के साथ बसर कर सकता है।
सच बोलने वाले का यहां जीना दुश्वार है लेकिन मिथ्याभाषण करने वाला राजा की तरह सम्मान पाता है।

ख़ैर, अपने प्रयोग के दौरान हमने यह जाना है कि लोग मुसीबत में हैं और उन्हें उससे मुक्ति चाहिए। इसी तलाश में आदमी हर तरफ़ जाता है और इसी दुख से मुक्ति की तलाश में वह अपना हाथ दिखाने या अपनी कुंडली बंचवाने आएगा।
1.कुंवारी को उत…

तीन तलाक़ एक साथ देने वाले की पीठ पर कोड़े बरसाते थे इस्लामी ख़लीफ़ा

आवारगी को औरत की आजादी का नाम न दें : आलिम-ए-खवातीन भोपाल। ताजुल मसाजिद परिसर में आयोजित दो दिनी 12वें खवातीन इज्तिमा (औरतों का सम्मेलन) का रविवार को समापन हो गया। लगभग 20 हजार खवातीन के मजमे के बीच आलिम-ए-खवातीन ने दीन पर चलने और अल्लाह के हुक्म को मानने की नसीहत देते हुए कहा कि औरतों को शरीअत और इस्लाम के साये में ही जिंदगी बसर करना चाहिए। इसमें ही उनकी भलाई है।
आखिरी और दूसरे दिन का आगाज मोहतरमा अकीका साहिबा के दर्से कुरआन से हुआ। इसके बाद मोहतरमा निदा साहिबा ने ‘आजादी और निस्बा फरेब और नारा’ पर कहा कि आवारगी को औरत की आजादी का नाम दिया जा रहा है। आजादी का ये अर्थ किसी भी तरह से कुबूल नहीं किया जा सकता कि औरत बेबाकी से मर्दो के साथ घुल मिल जाये। व्यावासायिक कारोबार के लिए उसके हुस्नों जमाल को इस्तेमाल किया जाये। आर्थिक उन्नति के नाम पर शैक्षणिक संस्थाओं में बेहयाई और सेक्स को बढ़ावा दिया जाये। मोहतरमा अनीसा साहिबा ने कहा कि इस्लामिक शिक्षा की रोशनी में औरत का लिबास ऐसा होना चाहिए कि उसका बदन पूरी तरह ढंका रहे। घर से बाहर निकलें तो अपनी ‘जीनत’ जेबर, कपड़े और चेहरा आदि को …

मीडिया, सीबीआई और अदालत कौन ख़रीद पाया है ?

इनके बिकने का इल्ज़ाम वही लगाता है जो कि ख़ुद इन्हें न ख़रीद पाया हो, जो भी इनके बिकने का इल्ज़ाम लगाता है, वह देश के क़ानून से लोगों का भरोसा उठाने का काम करता है और देश में बग़ावत भड़काने का काम सिर्फ़ ग़ददार ही किया करते हैं।
अपने फ़र्ज़ के लिए क़त्ल होने वाले पत्रकारों की फ़ेहरिस्त लंबी है और ऐसे ही लोग सीबीआई और अदालत में भी हैं। देश से भागे हुए ग़ददार इनकी वफ़ादारी पर उंगली उठाकर दरअसल यह बता रहे हैं कि वे ख़ुद बिकाऊ माल हैं और ऐसा ही वे दूसरों के बारे में सोचते हैं।

अकबर महान क्यों नहीं ? और हिंदू मुसलमान भाई क्यों नहीं ?

जो लोग अकबर को महान कहने पर ऐतराज़ करते हैं वे भी यह मानते हैं कि हिंदू राजा महान होते हैं। एक महान हिंदू राजा में जो गुण होते हैं, उन गुणों को अकबर में देख लिया जाए कि वे गुण उसमें हैं कि नहीं, बात साफ़ हो जाएगी कि अकबर उनके समान ही या उनसे बढ़कर महान है। उसकी महानता के गुण उसके काल के ब्राह्मणों ने भी गाए हैं।
यहीं के हिंदू ऊंचनीच और छूतछात से मुक्ति पाने के लिए मुसलमान बने हैं, यह एक साबितशुदा हक़ीक़त है। इससे पता चलता है कि हिंदू और मुसलमान भाई भाई ही हैं। भाई भाई में झगड़े राम के दौर में भी हुए और कृष्ण के दौर में भी। झगड़ों की वजह से ख़ून के रिश्ते नहीं बदल जाते।
राजशाही चली गई और बादशाही भी चली गई, इसलिए नफ़रतों को भी चले जाना चाहिए।

वेद में हज़रत मुहम्मद (स.) का ज़िक्र

वेद भाष्य ऋग्वेद 1,1,2 के अन्तर्गत पं. दुर्गाशंकर महिमवत् सत्यार्थी
वेदमें सरवरे कायनात स. काज़िक्र हैस्वर्गीय आचार्य शम्स नवेद उस्मानी की प्रख्यात रचना ‘अगर अब भी न जागे तो ...‘ (प्रस्तुति: एस. अब्दुल्लाह तारिक़) ने इस संदर्भ में एक पृथकतः स्वतंत्र अध्याय पाया जाता है।
सरवरे कायनात (स.) ही इस सृष्टि का प्रारंभ हैं।

‘सबसेपहलेमशिय्यतकेअनवारसे,
नक्शेरूएमुहम्मद (स.) बनायागया
फिरउसीनक्शसेमांगकररौशनी
बज़्मेकौनोमकांकोसजायागया
-मौलाना क़ासिम नानौतवी
संस्थापक दारूल उलूम देवबंद

हदीसों (= स्मृति ग्रंथों ?) से केवल इतना ही ज्ञात नहीं होता कि रसूलुल्लाह (स.) की नुबूव्वत भगवान मनु के शरीर में आत्मा डाले जाने से पहले थी, प्रत्युत हदीसों से यह भी प्रमाणित होता है कि हज़रत मुहम्मद मुज्तबा (स.) का निर्माण संपूर्ण सृष्टि, देवों, द्यावापृथिवी और अन्य सृष्टियों और परम व्योम (= मूल में ‘अर्शे इलाही‘) से भी पहले हुई थी और फिर नूरे-अहमद (स.) ही को ईशान परब्रह्म परमेश्वर ने अन्य संपूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति का माध्यम बनाया।
(‘अगर अब भी न जागे तो ...‘ पृ. सं. 105 उर्दू से अनुवाद, दुर्गाशंकर महिमवत् सत्यार…

सतयुग कैसे आएगा ? , पर एक बहस

इस्लाम की तरफ बढ़ते रुझान से और मुसलामानों की बढ़ती तादाद से 'सतयुग' का क्या सम्बन्ध है ? हमारी पिछली पोस्ट पर इस मौज़ू पर एक अच्छी चर्चा हुई है .  ईश्वर सत्य है और वह एक है. उसका आदेश सबसे ऊपर होना चाहिए , सबको धर्म यही बताता है. लोगों ने जबसे यह भुलाया है तबसे कलियुग चल रहा है. इसे ख़त्म करने के लिए भूली हुई बात को याद करना बहुत ज़रूरी है.  मुसलमान वही भुला दी गयी बात याद दिलाते हैं ,  देखिये इस ब्लॉग की हमारी पिछली यादगार पोस्ट : आगे बढ़कर सत्य को मानें और दूसरों के लिए एक मिसाल बनें जैसे कि पं. श्री दुर्गाशंकर सत्यार्थी जी महाराज

आगे बढ़कर सत्य को मानें और दूसरों के लिए एक मिसाल बनें जैसे कि पं. श्री दुर्गाशंकर सत्यार्थी जी महाराज

ZEAL: बढती मुस्लिम आबादी एक विश्व-संकट (Muslim demographics (Europe, USA, Scandinavia) पर ग़ौरो फ़िक्र किया जाए तो कुछ बातें सामने आती हैं और जो बातें सामने आती हैं, उन्हें जानने के बाद दिल को बहुत सुकून मिलता है।
मुसलमानों की आबादी बढ़ रही है या नहीं और बढ़ रही है तो कितनी बढ़ रही है ?
इस पर आज ध्यान देने की ज़रूरत है और उससे भी ज़्यादा ज़रूरत इस बात पर देने की है कि हिंदुस्तान के पंडित और शास्त्री पहले से ही बता रहे हैं कि अब जल्दी ही सतयुग आने वाला है।
वह सतयुग इसी रूप में आएगा कि सत्य को मानने वाले ही विश्व पर छा जाएंगे।
तब क्यों न आप पहले से ही आगे बढ़कर सत्य को मानें और दूसरों के लिए एक मिसाल बनें जैसे कि पं. श्री दुर्गाशंकर सत्यार्थी जी महाराज ने भी कहा है कि
वेद और क़ुरआन हक़ीक़त में एक ही धर्म के दो ग्रंथ हैं।
इसी बात को छिपाए रखने के लिए और हिंदू और मुसलमानों को आपस में लड़ाए रखने के लिए अंग्रेज़ बहादुर ने बहुत चालाकी से काम लिया और आज तक ले रहे हैं और कम समझ नादान लोग उनके सुर में सुर मिलाए जा रहे हैं। विदेशों में बैठे हुए कुछ लोग आज भी हिंदुओं के मन में मुसलमानों के लिए नफ़रत के बीज बोत…