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Showing posts from 2012

Blog News: कर्बला : इमाम हुसैन की शहादत को श्रद्धांजलि Imam Hasain & Moharram

Blog News: कर्बला : इमाम हुसैन की शहादत को श्रद्धांजलि Imam Hasain & Moharram: इमाम हुसैन की शहादत को नमन करते हुए हमारी ओर से श्रद्धांजलि

पैग़ाम ए मुहब्बत "अमन का पैग़ाम " बन जाता है.  …..एस0 एम0 मासूम  'हिन्दी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेश्नल' पर

हिन्दुस्तान में सज़ा ए मौत बाक़ी रहे या इसे ख़त्म कर दिया जाए ? Kasab:Hang Till Death -DR. ANWER JAMAL

हिन्दुस्तान में सज़ा ए मौत बाक़ी रहे या इसे ख़त्म कर दिया जाए ? Kasab:Hang Till DeathDR. ANWER JAMALatHindi Bloggers Forum International (HBFI) - 5 hours ago इस पर एक लंबे अर्से से विचार चल रहा है। 21 नवंबर 2012 को कसाब को फांसी दिए जाने के बाद एक बार फिर यह मुददा उठाया जा सकता है। उसे फांसी दिए जाने से 2 दिन पहले ही संयुक्त महासभा कि मानवाधिकार समिति दुनिया भर में सज़ा ए मौत को ख़त्म करने का प्रस्ताव पास किया था। दुनिया के 140 देश सज़ा ए मौत ख़त्म कर चुके हैं और अब सिर्फ़ 58 देश ही यह सज़ा बाक़ी है। कोई भी फ़ैसला लेने से पहले यह देखना ज़रूरी है कि जिन देशों में फांसी की सज़ा नहीं है। उन देशों में जुर्म का ग्राफ़ नीचे के बजाय ऊपर जा रहा है । इग्लैंड के लोग तो अपना वतन ही छोड़ कर जा रहे हैं, जो जा सकते हैं और जिनके पास विकल्प है।  ...आखि़रकार यहां हरेक के लिए मौत है। जो फांसी से बच जाएगा, उसके लिए भी अंत है।यह तो समाज के सामने का सच है और एक सच वह है जो इंसान की मौत के बाद सामने आता है। भारत की आध्यात्मिक विरासत यही है कि यहां मौत के बाद के हालात को भी उतनी ही अहमितयत दी जाती है जितनी कि…

जी हाँ, ब्लौग जगत जिंदा है अभी ... सुबूत यह है---

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ जी की पोस्ट पर हिंदूत्ववादी भाइयों का ऐतराज़ कितना जायज़ है  ?
देखिये यह पोस्ट :
चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’का सन्देश
जी हाँ, ब्लौग जगत जिंदा है अभी ... सुबूत के लिए ऊपर लिंक है। आपका क्या कहना है ?

नमाज़ में जिस्मानी कसरत के फायदे भी हैं और इसमें मन को सकारात्मक विचार भी मिलते हैं

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एक्सरसाइज के मामले में भारतीय काफी पिछड़े हुए हैं। शहरों में रहने वाली हमारी आबादी का एक बेहद छोटा सा हिस्सा भी व्यायाम में दिलचस्पी नहीं लेता। जबकि दूसरी सच्चाई यह है कि भारतीय शहरों में तेजी से समृद्धि बढ़ रही है और लोग पहले से ज्यादा कैलोरी ले रहे हैं। लेकिन शारीरिक गतिविधियां कम होने से उनमें ब्लडप्रेशर, डाइबिटीज और दूसरी लाइफस्टाइल बीमारियां बढ़ रही हैं। इन बीमारियों से दूर रहने का एक ही आसान तरीका है।   एक्सरसाइज  नमाज़ में जिस्मानी कसरत के फायदे भी हैं और इसमें मन को सकारात्मक विचार भी मिलते हैं . नमाज़ हरेक एक्सरसाइज़ से बढ़कर है। नमाज़ में सुना जाने वाला कुर'आन नमाज़ी को उसकी समस्याओं का समाधान भी देता है। नमाज़ इंसान के घमंड को भी ख़त्म करती है और आस पड़ोस से लेकर शहर और दुनिया के लोगों को मस्जिद में इकठ्ठा करके आपस में जोडती भी है। नमाज़ में दिमाग़ी एक्सरसाइज़ भी होती है क्योंकि कुर'आन की बात को उचित सन्दर्भ में समझना भी पड़ता है। ये सब लाभ उसे मिलते हैं जो नमाज़ का हक अदा करता है। उसे स…

बड़ा ब्लागर कैसे बनें ?: ‘लंगोटिया ब्लॉगिंग‘: परिभाषा, उपयोग और सावधानियां Hindi Blogging

Comment's garden: धन वर्षा अब आपके अपने हाथ में है How To Make Amla Hair Oil At Home .

Comment's garden: धन वर्षा अब आपके अपने हाथ में है How To Make Amla Hair Oil At Home .: आप अपने लिए महाभृंगराज का तेल ख़ुद बनाइये। आंवले का तेल भी आप ख़ुद बना सकते हैं। तरीक़ा बहुत आसान है।
तेल का रिज़ल्ट आपके तेल की सेल बढ़ा देगा। कुछ दूसरे तरीक़ों से भी आप तेल तैयार कर सकते हैं। इन्हें आप यूट्यूब में उपलब्ध वीडियो में देख सकते हैं। इसी तरह आप फ़ेस पैक तैयार कर सकती हैं। इसे नींबू के रस और पानी में मिलाकर चेहरे पर लगाएं। ज़िददी कील-मुहांसे ग़ायब हो जाएंगे.

Blog News: एस. एम. मासूम साहब का Major Operation

Blog News: एस. एम. मासूम साहब का Major Operation
पता चला है कि ‘अमन का पैग़ाम‘ देने वाले जनाब एस. एम. मासूम साहब के दिमाग़ में ब्लड की क्लॉटिंग हो गई थी। जिसकी वजह से उन्हें मेजर आप्रेशन से गुज़रना पड़ा। इस मौक़े पर हम सब उनकी सेहत के लिए मालिक से दुआ करते हैं और उम्मीद करते हैं कि वह जल्द ही सेहतयाब होकर फिर से अमन का पैग़ाम देंगे।

बड़ा ब्लागर कैसे बनें ?: बूढ़े शरीर में भी आंख जवान रखता है बड़ा ब्लॉगर

बड़ा ब्लागर कैसे बनें ?: बूढ़े शरीर में भी आंख जवान रखता है बड़ा ब्लॉगर
अगर ब्लॉगर होम्योपैथी का जानकार भी हो तो ख़तरा और भी ज़्यादा बढ़ जाता है। डैमियाना, एसिड फॉस और कैलकेरिया फ़्लोरिका खाने वाले पर बुढ़ापा आता ही कब है ?

जब पैसे के लिए अंग्रेजी ब्लोगर्स हिन्दी में ब्लोगिंग करने लगेंगे

आजकल एक विषय पर बहुत पोस्ट आ रही हैं। दूसरे विषय पर लिखने वाले यह सोच रहे हैं कि कोई हमारी पोस्ट तो ढंग से पढ़ ले। मैं इतना भी नहीं सोच रहा हूँ क्योंकि ब्लोगिंग में बहुत दिनों बाद बहार आई है। बहुत से मुर्दा ब्लॉग जिंदा से दिख रहे हैं . मैं तो इसका लुत्फ़ उठा रहा हूँ। आप भी ब्लोगिंग की बहार का लुत्फ़ लीजिये।  किसी को समझाना बेकार है। यहाँ सभी बालिग़ हैं। यहाँ सभी कमाने आये हैं . कोई इज्ज़त कमाने आया है और कोई पैसा। बहुत से तो पैसे के लिए अंग्रेजी ब्लोगिंग में चले गए हैं।  मज़ा तब आएगा जब पैसे के लिए अंग्रेजी ब्लोगर्स हिन्दी में ब्लोगिंग करने लगेंगे।  कौन नहीं चाहता कि ऐसा दिन आये ?

Ved Quran: जब आरएसएस के पूर्व प्रमुख के. सी. सुदर्शन जी ईद की नमाज़ अदा करने के लिए चल दिए मस्जिद की ओर Tajul Masajid

Ved Quran: एक दान-पर्व है ईद-उल-फितर Eid 2012

रिश्वत लेना-देना हराम है

तीन साल पहले दिल्ली के एक वकील साहब बचपन के किसी मुकदमे में सजायाब होकर तिहाड जेल पहुंचे, जेल में बहुत चर्चे थे, कि दिल्ली हाईकोर्ट के इतने बडे वकील साहब जेल में आ गए हैं, वकील साहब के बाकायदा दाढी थी, बडे मौलाना लगते थे, सब कैदी उनसे दबे रहते, मुकदमों के सिलसिले में मशवरा करते, वो मुफीद मशवरा देते, लोग उनसे मालूम करते कि आप इतने बडे वकील हैं फिर भी जेल में आगए, उन्होंने कहा जज रिश्‍वत मांग रही थी, मैं ने रिश्वत देने के मुकाबले में जेल को मुनासिब समझा, लोग कहते कि रिश्वत दे देनी चाहिए थी, तो वो कहते, रिश्वत देने से, मरने के बाद खतरनाक जेल जहन्नुम में जाने के बजाए यह आरजी अर्थात कुछ समय की तिहाड जेल अच्छी है। (रिश्वत लेना-देना हराम है) आगे की कहानी - एक मुलाकात interview

अच्छाई को एकजुट होकर फैलाना चाहिए

लोग यह चाहते हैं कि हमें न बदलना पड़े मगर दूसरे सब बदल जाएं। वे किसी की मुसीबत में काम न आएं। कोई सड़क पर पड़ा कराह रहा हो तो वे भले ही उसे नज़रअंदाज़ करके आगे बढ़ जाएं मगर उनकी तकलीफ़ को दूर करने के लिए भागे चले आएं।
यह समाज आज जैसा भी है। इसे ऐसा हमने ही बनाया है। हम में से हरेक ने इसे ऐसा बनाया है। समाज में आज अच्छाई अच्छे लोगों के दम से है। अच्छाई को बढ़ावा दिया जाए तो अच्छाई बढ़ेगी और ऐसा करने के लिए हमें अपनी बुरी आदतों को छोड़ना होगा।
बुरी आदतों को छोड़ने की प्रैक्टिस रोज़े के ज़रिये से हो जाती है और यह सामाजिक एकजुटता को भी ज़ाहिर करती है। अच्छाई को एकजुट होकर फैलाना चाहिए।

फिर खुल जाएगी एक खुली हुई हक़ीक़त

अरविन्द केजरीवाल की अक्ल बड़ी है और उस से भी कई गुना बड़ा है उनका फैसला . उनकी लड़ाई का फायदा लेने के लिए जो अब तक उनके हक में चिल्ला रहे थे , वे अब अन्ना टीम के राजनीति में आने के फैसले को गलत बता रहे हैं .  अगर अन्ना टीम हारती है तो इसका मतलब यही होगा कि अन्ना जिस जनता के लिए लड़ रहे हैं उसे भ्रष्टाचार के बजाय जातिगत और सांप्रदायिक हितों की चिंता है. अन्ना टीम की हार जीत भारतीय जनता के मिज़ाज की हक़ीक़त भी सामने ले आने वाली है.

राखी के त्यौहार पर सभी बहनों को मुबारकबाद

इरादा मज़बूत हो तो याद दिलाने के लिए राखी का कच्चा धागा भी काफ़ी होता है।
राखी के त्यौहार पर सभी बहनों को मुबारकबाद और भाइयों को भी।

अपनी हैसियत बढ़ाने की ख्वाहिश में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की आदत

बारिश हो रही है। आम की फ़सल चल रही है। रमज़ान का महीना है। सहरी और इफ़तार सब हो रहा है। ज़कात-फ़ितरे का हिसाब लगा लिया गया है। ये सब ख़ुशियां हैं। ईद भी आएगी। यह भी ख़ुशी होगी लेकिन कभी कभी सोचता हूं कि जो अमन और जो ख़ुशियां हमें नसीब हैं वे हरेक को नसीब क्यों नहीं होतीं।
कहीं दंगा है तो कहीं आतंक। कहीं ग़रीबी और भूख है तो कहीं बेरोज़गारी और बंजर ज़मीनें। कहीं अशिक्षा है तो कहीं दहेज। कहीं सरकार की लापरवाही है तो कहीं ख़ुद अपनी कमज़ोरी।
हमारा अपना लालच और अपनी लापरवाही हमें एक ख़ुशहाल क़ौम बनने से रोके हुए है। गर्व करने के लिए कोई वजह ज़रूरी नहीं है। लोग फिर भी गर्व कर लेते हैं।
भारत भ्रष्टाचार में जकड़ा हुआ है और भ्रष्टाचार से लड़ने वाली टीम अन्ना को देश की जनता तन्हा छोड़ चुकी है। लोकपाल तो जैसे तैसे अब बन कर ही रहेगा मगर क्या मुल्क की अवाम को अपने आप को बदलने का अहसास हो पाएगा ?
अहम मुददे भी यहां अपने अहं की भेंट चढ़ा दिए जाते हैं।
ब्लॉग जगत में भी मुददे को नहीं नाम और हैसियत को समर्थन दिया जाता है। नाम और पद ठीक ठाक हो तो मर्दाना बीमारी की पोस्ट पर भी हाज़िरी लगा दी जाती है। ब्लॉगर विदेश में रहता हो…

कवि व्यभिचारी चोर -सुधीश पचौरी, हिंदी साहित्यकार

एक दिन एक कवि ने शिकायत की कि आप हिंदी के लेखकों को ही क्यों ठोकते हैं? अन्य भाषाओं वाले पढ़ते होंगे, तो क्या सोचते होंगे?’
‘न ठोकता, तो तुम क्या यह सवाल करते? इस पर भी न हंसूं, तो क्या करूं? मैं तो हर बार अपने ऊपर ही हंसता हूं।’
‘जो हास्यास्पद हैं, उन पर हंसें। बाकी पर क्यों? इतने बड़े और महान लेखक हैं और आप उनकी महानता में सुई चुभाते रहते हैं!’
‘हमारे उत्तर-आधुनिक शब्दकोश में ‘महान’ शब्द ‘संदिग्ध’ है। महानता अनेक तुच्छताओं से गढ़ी जाती है। और साथी हिंदी में ऐसा कौन है, जो हास्यास्पद नहीं है? ..........
आगे बढ़ें-  कवि व्यभिचारी चोर -सुधीश पचौरी, हिंदी साहित्यकार

लोग "दूसरों" की विकृतियों के माहिर हो चले हैं

विकृति को समझना मुनाफ़े का सौदा है। कविता और लेख लिखो तो कोई टिप्पणी नहीं देता मगर किसी की विकृति को पहचान लो लोग अपनी राय देने आ जाते हैं मगर शर्त यह है कि विकृति ‘दूसरों‘ में से किसी की होनी चाहिए।
अपना कोई हो तो उसे संविधान और झंडे की तौहीन करने की भी पूरी छूट है। कोई नंगेपन और समलैंगिकता का हामी हो तो हो। उसकी सोच विकृति नहीं मानी जाएगी क्योंकि वह अपने गुट का है। अपनी विकृति पर चर्चा न करना और दूसरों की विकृतियों पर तब्सरा करना भी एक विकृति है। इसे कौन समझ पाएगा ?
दूसरा सुनेगा नहीं और अपनी विकृति लोग दूर करेंगे नहीं तो सुधार कैसे होगा ?

खुदा की इबादत का महीना है रमज़ान, इन बातों का रखें ध्यान

हिजरी कैलेंडर का नवां महीना रमज़ान होता है। पूरी दुनिया में फैले इस्लाम के अनुयायियों के लिए रमज़ान का पवित्र महीना एक उत्सव होता है। इस्लाम धर्म की परंपराओं में रमज़ान में रोजा रखना हर मुसलमान के लिए जरुरी फर्ज होता है, उसी तरह जैसे 5 बार की नमाज अदा करना जरुरी है। इस बार रमज़ान के पाक महीने की शुरुआत 21 जुलाई, शनिवार (यदि 20 जुलाई को चांद नहीं दिखा तो रमज़ान 22 से शुरु होगा) से हो रही है।




इस्लाम धर्म में रमज़ान के महीने में रोजा गहरी आस्था के साथ रखे जाते हैं। किंतु इस्लाम धर्म का रोजा सिर्फ भूखे या प्यासे रहने की परंपरा मात्र नहीं है बल्कि रोजे के दौरान कुछ मानसिक और व्यावहारिक बंधन भी जरुरी बताए गए हैं। जानते हैं रोजे के दौरान पालन किए जाने वाले नियमों को -

1- रोजे के दौरान सिर्फ  भूखे-प्यासे ही न रहें बल्कि आंख, कान और जीभ का भी गलत इस्तेमाल न करें यानी न बुरा देखें, न बुरा सुनें और न ही बुरा कहें।

- हर मुसलमान के लिए जरुरी है कि वह रोजे के दौरान सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के बीच के समय में खान-पान न करे। यहां तक कि कुछ गलत सोचे भी नहीं। 

- रोजे की सबसे अहम परंपराओं में सेहरी बहुत लो…

रोज़ा के आध्यात्मिक लाभ

आध्यात्मिक लाभः  (1) इस्लाम में रोजा का मूल उद्देश्य ईश्वरीय आज्ञापालन और ईश-भय है, इसके द्वारा एक व्यक्ति को इस योग्य बनाया जाता है कि उसका समस्त जीवन अल्लाह की इच्छानुसार व्यतीत हो। एक व्यक्ति सख्त भूक और प्यास की स्थिति में होता है, खाने पीने की प्रत्येक वस्तुयें उसके समक्ष होती हैं, एकांत में कुछ खा पी लेना अत्यंत सम्भव होता है, पर वह नहीं खाता पीता। क्यों ? इस लिए कि उसे अल्लाह की निगरानी पर दृढ़ विश्वास है। वह जानता है कि लोग तो नहीं देख रहे हैं पर अल्लाह तो देख रहा है। इस प्रकार एक महीने में वह यह शिक्षा ग्रहण करता है कि सदैव ईश्वरीय आदेश का पालन करेगा और कदापि उसकी अवज्ञा न करेगा। (2) रोज़ा ईश्वरीय उपकारों को याद दिलाता औऱ अल्लाह कि कृतज्ञता सिखाता है क्योंकि एक व्यक्ति जब निर्धारित समय तक खान-पान तथा पत्नी के साथ सम्बन्ध से रोक दिया जाता है जो उसकी सब से बड़ी इच्छा होती है फिर वही कुछ समय बाद मिलता है तो उसे पा कर वह अल्लाह ती प्रशंसा बजा लाता है। (3) रोज़ा से कामवासना में भी कमी आती है। क्योंकि जब पेट भर जाता है तो कामवासना जाग उठता है परन्तु जब पेट खाली रहता है …

[प्यारी माँ] एक आवाज़ बीमार भ्रूण हत्या के खि़लाफ़

ईमेल से प्राप्त :-
प्यारी बेटी अनम की याद में, जो जन्नत का फूल बन गई है. अनम ने हमें बताया है कि हर साल न जाने कितने करोड़ ऐसे अनाम मासूम होते हैं, जिनके क़त्ल में हमारी ख़ामोश हिस्सेदारी है, जिन्हें हमने कभी देखा नहीं बल्कि जिन्हें हम जानते तक नहीं हैं।
अनम हमारे दिलों में आज भी मौजूद है। हम भी उसकी मौजूदगी को बनाए रखना चाहते हैं। अनम की याद के बहाने हम उस जैसे करोड़ों मासूमों को याद कर पाते हैं। हो सकता है कि कभी लोगों में समझदारी जागे और वे इनके हक़ में भी कभी आवाज़ बुलंद करें।
बीमार भ्रूणों की रक्षा के लिए आप यह पोस्ट देखें और इस आवाज़ को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करें- http://pyarimaan.blogspot.in/2012/07/blog-post_22.html
यह एक सामाजिक मुददा है। यह तवज्जो चाहता है। विकलांग या बीमार होना कोई जुर्म नहीं है। उनके लिए भी हमारे दिलों में और हमारी दुनिया में जगह होनी चाहिए।

इसलाम के आर्थिक मॉडल की कामयाबी की वजह क्या है ?

इसलाम में आर्थिक व्यवस्था के मार्गदर्शक सिद्धांत Islamic Economics लेखक : डा. सैयद ज़फ़र महमूद info@zakatindia.org अनुवाद: डा. अनवर जमाल
पूरी क़ौम के एक बड़े से केक में से सारे नागरिकों को एक बड़ा टुकड़ा मिलेगा। यह बात तक़सीम के ग़ैर बराबरी वाले सिस्टम की वजह से यक़ीनी नहीं है। (यानि पूरी क़ौम या देश की कुल पैदावार बहुत ज़्यादा होने के बावजूद यह ज़रूरी नहीं है कि सारे ही नागरिकों की आमदनी का स्तर बढ़ गया है) इसके खि़लाफ़ इसलाम के आर्थिक मॉडल की कामयाबी यह है कि यह हरेक नागरिक की बुनियादी ज़रूरतों की पूर्ति को यक़ीनी बनाने की क्षमता रखता है।
http://www.islamdharma.blogspot.in/2012/07/islamic-economics.html

ब्लॉगिंग क्या है ?

अपने ख़यालात ज़ाहिर करने का एक तरीक़ा है. जो लोग ब्लॉगिंग नहीं करते, वे भी अपने ख़यालात ज़ाहिर करते ही हैं. कोई पान की दुकान पे तो तो कोई यूं ही बिना किसी दुकान के. औरतें भी अपना ख़याल ज़ाहिर करती हैं और मर्दों से ज़्यादा करती हैं. हरेक का ख़याल है कि वह सबसे ज़्यादा अक्लमंद है और दूसरे उसकी बात मान लें तो उनका बेड़ा पार हो जाएगा. ऐसा सोचने में कोई हरज भी नहीं है. अपना दिल है जो चाहे सोचो. दिक्कत तब आती है जब ख़यालात आपस में टकरा जाएं. ख़याल आपस में टकरा जाते हैं तो दरहक़ीक़त दिल आपस में टकराते हैं. इसका दिल टूटे या उसका या दोनों का. टकराव होगा तो टूट फूट ज़रूर होगी. आपकी ब्लॉगिंग में आपकी शख्सियत झलकती है
तंज़ करने वाले भी तंज़ सहने की ताक़त नहीं रखते. पढ़े लिखे लोगों की मजलिस में बुरी बातें देखकर एक लंबे अर्से तक ब्लॉग पर कुछ लिखने का जज़्बा ही सर्द पड़ गया था . ब्लॉगिंग को जुड़ने का ज़रिया बनाया जाए तो अच्छा रहेगा. अपनी बात कहिए और दूसरे की सुनिए. धौंस धमकी और अपमान की भाषा बोलने से बचिए. इसके लिए अपने दिल को धोइये. जब तक नफ़रतें दिल में रहेंगी ज़ुबान से आप मुहब्बत के फूल खिला ही नह…

मुक़ददमेबाज़ी से अच्छी मुसीबत क्या हो सकती है ?

आपकी ब्लॉगिंग में आपकी शख्सियत झलकती है
तंज़ करने वाले भी तंज़ सहने की ताक़त नहीं रखते. पढ़े लिखे लोगों की मजलिस में बुरी बातें देखकर एक लंबे अर्से तक ब्लॉग पर कुछ लिखने का जज़्बा ही सर्द पड़ गया.  ब्लॉगिंग को जुड़ने का ज़रिया बनाया जाए तो अच्छा रहेगा. अपनी बात कहिए और दूसरे की सुनिए. धौंस धमकी और अपमान की भाषा बोलने से बचिए. इसके लिए अपने दिल को धोइये. जब तक नफ़रतें दिल में रहेंगी ज़ुबान से आप मुहब्बत के फूल खिला ही नहीं सकते. अपने घमंड की ख़ातिर कभी औरत मर्द का मुददा यहां बना दिया जाता है और कभी उसे हिन्दू मुस्लिम का मुददा बना दिया जाता है. यह बुरी बात है.  ब्लॉगिंग क्या है ? अपने ख़यालात ज़ाहिर करने का एक तरीक़ा है. जो लोग ब्लॉगिंग नहीं करते, वे भी अपने ख़यालात ज़ाहिर करते ही हैं. कोई पान की दुकान पे तो तो कोई यूं ही बिना किसी दुकान के. औरतें भी अपना ख़याल ज़ाहिर करती हैं और मर्दों से ज़्यादा करती हैं. हरेक का ख़याल है कि वह सबसे ज़्यादा अक्लमंद है और दूसरे उसकी बात मान लें तो उनका बेड़ा पार हो जाएगा. ऐसा सोचने में कोई हरज भी नहीं है. अपना दिल है जो चाहे सोचो. दिक्कत तब आती है जब ख…

जानते हैं शादी की सबसे अच्छी बात क्या है ?

पुरानी ब्लागर पुराने लिंक बांट रही है. कल देखा तो 3 पुरानी पोस्ट के लिंक थे. उनमें उसकी फ़ज़ीहत के क़िस्से थे. अक्ल पुरानी हो और उसमें टेंशन भी घुस जाए तो ब्लागर ऐसा कर देता है. किसी ने समझाया होगा तो उसने वे तीनों पोस्ट के लिंक हटा दिए. आज सुबह खोला तो पेज़ एक्ज़िस्ट नहीं था और अब ‘कारण बताओ‘ के शीर्षक पर क्लिक करो तो वहां अब न यह शीर्षक है और न ही वे 3 पुराने लिंक. थोड़ा सा भी ईगो पर चोट लग जाए तो ब्लागर कितना अपसैट हो जाता है ? वह किसी काम का नहीं रह जाता. बस नए पुराने लिंक ही बांटता रहता है. ख़ुद भी बेचैन रहता है और दूसरों में भी चेतावनियां दे कर बेचैनी फैलाता रहता है. ऐसे ही लोगों ने ब्लागिंग का कबाड़ा करके रख दिया है. आज ही अख़बार में भी आया है- फ़ेसबुक बढ़ा रहा है बेचैनी

हिंदी ब्लागिंग का हाल देखो तो यह बेचैनी के साथ परेशानी भी बढ़ा रही है. 
शीशा हमें तो आपको पत्थर कहा गया दोनों के सिलसिले में ये बेहतर कहा गया
ख़ुददारियों की राह पे जो गामज़न रहे उनको हमारे शहर में ख़ुदसर कहा गया
इक मुख्तसर सी झील न जो कर सका उबूर इस दौर में उसी को शनावर कहा गया
उसने किया जो ज़ुल्म तो हुआ न कुछ…

DR. ANWER JAMAL के मज़मून का एक जुज़

हरेक चीज़ का एक मक़सद होता है।
इंसान का भी एक मक़सद है।
हरेक मक़सद हासिल करने के लिए एक रास्ता होता है।
इंसान के लिए भी एक रास्ता है, जिस पर चलकर उसे अपना मक़सद हासिल करना है।
जब इंसान अपना मक़सद ही भूल जाता है तो फिर वह रास्ते को भी भूल जाता है। आज इंसान अपने मक़सद को भूल गया है। इसीलिए वह अपने रास्ते से हट गया है। ...अनन्त जीवन देने वाले परमेश्वर को पाना ही इंसान का सच्चा मक़सद है।
समाज सुधार के लिए इंसान को उसका मक़सद याद दिलाना होगा
सत्य के अंश से मनुष्य के जीवन की अंश मात्र समस्याएं हल होती है जबकि पूर्ण सत्य से मनुष्य की आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक और आध्यात्मिक सभी समस्याएं हल हो जाती हैं। 
समस्याओं के हल का स्तर ही यह तय करता है कि किस ग्रन्थ में सत्य अंश मात्र है और किस ग्रन्थ में पूर्ण है ?

हिंदी ब्लागर किस पोस्ट को ज़्यादा पढ़ते हैं ?-एक सर्वे जनहित में

एक बार एक कवि ने कहा था कि आपको पोस्ट लिखने की ज़रूरत ही नहीं है। बस वक्ष वक्ष वक्ष और ऐसे ही अल्फ़ाज़ लिख दीजिए। लोग पागलों की तरह उसे ऐसे पढ़ने के लिए टूट पड़ेंगे जैसे उन्होंने कभी वक्ष देखा ही न हो। कुछ शरपसंद ब्लागर ऐसे हैं कि जब उनकी बात नहीं मानी जाती तो वे अपने निजी मुददे को सांप्रदायिकता से जोड़ देते हैं। कहते हैं कि फ़लां ब्लाग पर उस विशेष पार्टी की औरतों के नाम और फ़ोटो हैं और उस ब्लाग की पोस्ट में ऐसे वैसे अल्फ़ाज़ भी हैं और ऐसे वैसे अल्फ़ाज़ वाली पोस्ट उस ब्लाग पर सबसे ज़्यादा पसंद की जा रही हैं। भाई पढ़ने वाले भी तुम्हारी पार्टी के ही हैं। इस तरह तो तुम ख़ुद यह बता रहे हो कि हमारे लोग उन पोस्टों पर टूट कर पड़ते हैं जिनमें ऐसे वैसे अल्फ़ाज़ हों। उसी ब्लाग पर सैकड़ों दूसरी पोस्टें भी हैं जिनमें ये अल्फ़ाज़ नहीं हैं। उन्हें पढ़ा होता तो ‘लाइक‘ के कालम में वे दूसरी पोस्टें आ जातीं जिनमें टेक्नीकल जानकारी या दूसरी बातें बताई गई हैं। ‘लाइक‘ कालम में ऐसी वैसी पोस्टों को लाया कौन ? हिंदी ब्लागर ही लाए हैं और कौन लाया है !!! इसी विशेष ब्लाग पर नहीं हर ब्लाग पर ऐसी पोस्टों के पाठक …

औरतों की मौजूदगी में व्यक्ति बहस से बच नहीं सकता

हम कई बार तय नहीं कर पाते कि  इस पोस्ट पर क्या कमेन्ट दें ?
मेरे साथ यही हुआ जब मैंने 'ब्लॉग  की ख़बरें' देखीं .
औरतों की मौजूदगी में व्यक्ति काम वासना के आकर्षण से बच नहीं सकता. यह महात्मा बुद्ध ने बताया था . यह पोस्ट पढ़कर मुझे लगा कि
औरतों की मौजूदगी में व्यक्ति बहस से बच नहीं सकता. कोई मुझे बताये कि इस पोस्ट पर क्या कमेन्ट दिया जाए ?
धर्म के नाम पर 'सेक्स' का खेल

झंडे का रंग कोई भी हो, डंडा हमारा ही चलेगा.

दोस्त का काम है मिलना . सो वो मिले. हमने कहा कि  अगर झंडे का रंग भगवा हो जाए तो कैसा रहेगा ?
बोले, अच्छा रहेगा.
हमने कहा कि हमारे लिए कोई डरने वाली बात तो नहीं है न ?
बोले, डरने वाली बात उस दिन होगी जब डंडे का साइज़ और उसका रंग डिस्कस किया जाएगा.
हमने कहा तब कोई डर नहीं है.
दोस्त ने हैरत से पूछा, क्यों ?
भाई, आजकल अपने डंडे की बड़ी डिमांड है. झंडे का रंग कोई भी हो. डंडा हमारा ही लिया जाता है. हमारे डंडे में जान है न !
अतः झंडे का रंग कोई भी हो, डंडा हमारा ही चलेगा.

विज्ञान ने खोजा गॉड पार्टिकल

बह्मांड की उत्पत्ति और जीवन के सृजन संबंधी कई प्रश्नों का जवाब देने में सक्षम गॉड पार्टिकल को बुधवार को खोज लिया गया।

स्विटजरलैंड और फ्रांस की सीमा पर स्थित 27 किलोमीटर लंबी एक भूमिगत सुरंग में हिग्स बोसोन पर वर्ष 2009 से दिन-रात शोध कर रही यूरोपीय परमाणु शोध संगठन (सर्न) की दो टीमों (एटलस) और (सीएमएस) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में इससे मिलते-जुलते कण के अस्तित्व की बात स्वीकार की।

सर्न की ओर से जारी बयान में कहा गया कि हमें अपने आंकड़ों में एक नए कण के पाए जाने के स्पष्ट संकेत मिले हैं। यह हमारे शोध संयंत्र लार्ज हेड्रोन कोलाइडर के 125 और 126 जीईवी क्षेत्र में स्थित है। यह एक अद्भुत क्षण हैं। हमने अब तक मिले सभी बोसोन कणों में से सबसे भारी बोसोन को खोज निकाला है। सर्न ने इन नए आंकड़ों को सिग्मा 05 श्रेणी में स्थान दिया है, जिसके मायने होतें हैं नए पदार्थ की खोज। सेर्न के महानिदेशक राल्फ ह्यूर ने कहा कि प्रकृति को लेकर हमारी समझ में इजाफा करने की दिशा में हमने एक मील का पत्थर हासिल कर लिया। सेर्न के शोध निदेशक सेर्गियो बर्तालुकी ने हिग्स बोसोन के आस्तित्व की दिशा में प्रबल संकेत मिलन…

Blog News: धर्म के नाम पर 'सेक्स' का खेल

अख्तर खान साहब ने वह पोस्ट ही मिटा डाली है जो उनके सचिव ने भास्कर डोट कॉम से एक अंश उठाकर उनके ब्लॉग  पर पोस्ट बना दी थी. जिन ब्लॉगर्स ने अख्तर साहब के ब्लॉग पर मात्र एक अंश पर आपत्ति प्रकट की , उनमें से किसी ने भास्कर डोट कॉम की पूरी पोस्ट  पर भी कोई आपत्ति प्रकट नहीं की जो कि 8 गुना ज़्यादा है , है न कमाल की बात ? कुछ हिंदी ब्लॉगर्स ऐसी दोहरी सोच लेकर भी बुद्धिवादी कहलाते हैं.
Read entire story :
Blog News: धर्म के नाम पर 'सेक्स' का खेल

आत्महत्या, ड्रग्स और परिवार नियोजन

आज भारत में हर चौथे मिनट पर एक नागरिक आत्महत्या कर रहा है. हरेक उम्र के आदमी मर रहे हैं. अमीर ग़रीब  सब मर रहे हैं. उत्तर दक्षिण में सब जगह मर रहे हैं। हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई सब मर रहे हैं। बच्चे भी मर रहे हैं। जिनके एक दो हैं वे ज्यादा मर रहे हैं और जिनके दस पांच हैं वे कम मर रहे हैं। जिनके एक बच्चा था और वही मर गया तो माँ बाप का परिवार नियोजन सारा रखा रह  जाता  है। दस पांच में से एक चला जाता है तो भी माँ  बाप के जीने के सहारे बाक़ी रहते हैं। जिन्हें दुनिया ने कम करना चाहा वे बढ़ रहे हैं और जो दूसरों का हक़ भी अपनी औलाद के लिए समेट  लेना चाहते थे उनके बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं  या फिर ड्रग्स लेकर मरने से बदतर जीते रहते हैं।  कोई अक्लमंद अब इन्हें बचा नहीं सकता। ऊपर वाला ही बचाए तो बचाए .  लेकिन वह किसी को क्यों बचाए जब वह  उसकी मानता ही नहीं . जिसके सुनने के कान हों वह सुन ले।

नई नस्ल को आत्महत्या से कैसे बचाएं ?

अपने माँ-बाप के प्रति कृतज्ञ हो

याद करो जब लुकमान ने अपने बेटे से, उसे नसीहत करते हुए कहा, "ऐ मेरे बेटे! अल्लाह का साझी न ठहराना। निश्चय ही शिर्क (बहुदेववाद) बहुत बड़ा ज़ुल्म है।" (13)और हमने मनुष्य को उसके अपने माँ-बाप के मामले में ताकीद की है - उसकी माँ ने निढाल होकर उसे पेट में रखा और दो वर्ष उसके दूध छूटने में लगे - कि "मेरे प्रति कृतज्ञ हो और अपने माँ-बाप के प्रति भी। अंततः मेरी ही ओर आना है (14)किन्तु यदि वे तुझपर दबाव डाले कि तू किसी को मेरे साथ साझी ठहराए, जिसका तुझे ज्ञान नहीं, तो उसकी बात न मानना और दुनिया में उसके साथ भले तरीके से रहना। किन्तु अनुसरण उस व्यक्ति के मार्ग का करना जो मेरी ओर रुजू हो। फिर तुम सबको मेरी ही ओर पलटना है; फिर मैं तुम्हें बता दूँगा जो कुछ तुम करते रहे होगे।"- (15)
-क़ुरआन, 31, 12-21

सफलता उन्हें ही मिलती है जो सफलता के लिए दृढ़ संकल्प होकर प्रयास करते हैं

सफलता में मेहनत का कोई विकल्प नहीं
करिअर निर्माण में लाखों छात्र अपने-अपने ढंग से सफलता के लिए जद्दोजहद करते नज़र आते हैं। परन्तु अधिकांश छात्रों को यह शिकायत रहती है कि उन्हें सफलता नहीं मिली जबकि उन्होंने इसके लिए कड़ी मेहनत की थी। आखिर अधिकतर छात्रों को यह शिकायत क्यों होती है? क्यों उन्हें लगता है कि सफलता उन्हें नहीं मिली जबकि वे इसके लिए सतत प्रयासरत थे। अधिकतर छात्र इससे निराश हो जाते हैं तथा उनका मनोबल गिरता जाता है और इससे उनकी क्षमता अत्यधिक प्रभावित होती है। इससे उनकी रुचि तथा यहां तक कि याददाश्त क्षमता भी प्रभावित हो जाती है। इससे अगली विफलता का मार्ग प्रशस्त हो जाता है और उनकी सारी योजनाएं धरी रह जाती हैं।
विफलता अगली सफलता को प्रभावित करती है जबकि छात्रों को विफलता का उपयोग अगली बार सफलता को प्राप्त करने में करना चाहिए। यह मान्य तथ्य है कि छात्रों के पास समय का अभाव होता है तथा एक निश्चित अवधि के भीतर ही उन्हें अपनी सभी योजनाओं को कार्यान्वित करना होता है। फलस्वरूप अधिकांश छात्र किसी ऐसे मंत्र या जादू की तलाश में लग जाते हैं जो पलक झपकते ही उनकी मुश्किलें आसान कर दे।

छा…

बुज़ुर्गों के साथ शर्मनाक हादसे

शराब के नशे में 65 साल की सास के साथ किया रेप [Translate] नागपुर।। नागपुर में एक शर्मनाक घटना सामने आई है। आरोप के मुताबिक, यहां पर शराब के नशे में एक शख्स ने अपनी 65 साल की सास का रेप कर दिया। घटना के बाद से ही आरोपी रमेश गव्हाणे फरार है। रेप की शिकार महिला की बेटी ने कोराडी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस गव्हाणे की तलाश में जुट गई है। पुलिस का कहना है कि सोमवार की रात गव्हाणे की पत्नी अपनी बेटी को उसके ससुराल काटोल पहुंचाने गई थी। उसी रात 11 बजे गव्हाणे शराब के नशे में घर लौटा। पहले उसने अपने बेटे को पीटा और उसे घर से बाहर निकलने को कहा। उस समय उसकी सास सो रही थीं। गव्हाणे ने उन पर हमला बोल दिया और फिर उनके साथ रेप किया। गव्हाणे 3 बच्चों का बाप है। पुलिस सब इंस्पेक्टर पी.वी. फाडे ने बताया, ‘पड़ोस में रहने वाली एक औरत अगले दिन जब गव्हाणे की सास से मिलने आई तो उनकी साड़ी पर लगे खून के धब्बे से उसको शक हुआ कि कुछ गलत हुआ है। जब उसने इस बाबत पूछा तो पीड़िता रोने लगीं और उन्होंने पूरी घटना के बारे में उसको बताया। पड़ोसन ने तुरंत कोराडी पुलिस को खबर दी और रमेश की ब…

Hindi Bloggers Forum International (HBFI): दहेज मांगने वाले गधे और कुत्ते से भी बदतर हैं

Hindi Bloggers Forum International (HBFI): दहेज मांगने वाले गधे और कुत्ते से भी बदतर हैं
गधे और कुत्ते, दोनों की ज़िंदगी इस बात की गवाह है कि वे दहेज कभी नहीं मांगते।
दहेज एक बुरी रस्म है। जिसने इसकी शुरूआत की उसने एक बड़ी बेवक़ूफ़ी की और जिसने भी सबसे पहले दहेज मांगा, उसने लालच की वजह से ही ऐसा किया। आज भी यह रस्म जारी है। एक ऐसी रस्म, जिसने लड़कियों के जीवन का नर्क बना दिया और लड़कों को आत्म सम्मान से ख़ाली एक बिकाऊ माल।
यही बिकाऊ दूल्हे वास्तव में गधे और कुत्ते से बदतर हैं।

ख़ुशी रईसों की दाश्ता है

अजब मसायल से वास्ता है
न हल है कोई न रास्ता है

गुज़र रहा है ज़माना कुछ यूं
उसूल कोई न ज़ाब्ता है

मिज़ाज क्यूं हो गया है ऐसा
ग़र्ज़ किसी से न वास्ता है

ग़रीबों का हमनवा है ग़म और
ख़ुशी रईसों की दाश्ता है

निशात के दिन गुज़र गए ‘शाज़‘
उदास लम्हों से राब्ता है

शाज़ रहमानी,
कटिहार, बिहार

AHSAS KI PARTEN: मुस्लिम छात्र ने खिड़की से कूदकर नंगी लड़कियों से जान बचाई

AHSAS KI PARTEN: मुस्लिम छात्र ने खिड़की से कूदकर नंगी लड़कियों से जान बचाई
यह वाक़या एक ऐसी यूनिवर्सिटी में हुआ है जिसमें शिक्षा सत्र पूरा होने के बाद 5 हज़ार लड़कियां नंगे होकर मैराथन रेस में हिस्सा लेती हैं। उनकी कपड़ों की निगरानी यूनिवर्सिटी की तरफ़ से की जाती है। उनके कपड़ों को तौला गया तो आधा टन वज़्न हुआ।

यह ख़बर कल 15 मई 2012 को राष्ट्रीय सहारा उर्दू के पृ. 12 पर छपी।
इस ख़बर से इस्लाम और पश्चिमी दुनिया की सोच और किरदार एक साथ सामने आ जाते हैं। पश्चिमी दुनिया का नंगापन हिंदुस्तान में भी आम होता जा रहा है। नई तालीम दिलाने वाले मां-बाप अपनी औलाद के लिए ऊंचे ओहदे का ख़याल तो रखते हैं लेकिन उसके किरदार का क्या होगा ?

हरेक समस्या का अंत , आत्मावलोकन से

एक अहम् बात यह है कि  समय समय पर महापुरूष आए और ‘अपना कर्म‘ करके चले गए। अब महापुरूषों की इस पावन भूमि पर आप हैं। सद्-प्रेरणा लेना-देना और सत्कर्म करना अब आपकी ज़िम्मेदारी है। देखिए कि आप क्या कर रहे हैं ?
इसी आत्मावलोकन से हरेक समस्या का अंत आप कर सकते हैं तुरंत।
इंसान का असल इम्तेहान यही है कि वह अपने ज्ञान और अपनी ताक़त का इस्तेमाल क्या करता  है ? हरेक समस्या का अंत आप कर सकते हैं तुरंत Easy Solution

देख कर चेहरे को हाले दिल समझ जाती है मां

भूक जब बच्चों को आंखों से उड़ा देती है नींद
रात भर क़िस्से कहानी कह के बहलाती है मां

सब की नज़रें जेब पर हैं, इक नज़र है पेट पर
देख कर चेहरे को हाले दिल समझ जाती है मां

इटालियन राजदूत के दिल में दाखि़ल हुआ नूरे इस्लाम

इस्लाम हरेक ज़माने में अपनी सच्चाई के बल पर फैलता आया है और आज भी फैलता चला जा रहा है। इस्लाम क्या है ?
एक ख़ुदा को अपना मालिक और सब हाकिमों का हाकिम मानकर ज़िंदगी गुज़ारना, इस यक़ीन के साथ कि जो कुछ मैं कर रहा हूं, वह उसे देख रहा है। मुझे बुराई से बचना है और भलाई की राह पर चलना है कि यही उसने मेरा फ़र्ज़ मुक़र्रर किया है।
देखिए बिना तलवार के कैसे और कहां फैल रहा है इस्लाम ? Those whom Allah (in His Plan) willeth to guide He openeth their breast to Islam; those whom He willeth to leave straying He maketh their breast close and constricted as if they had to climb up to the skies: thus doth Allah (heap) the penalty on those who refuse to believe. {Al An’am (06):125}
The Italian Ambassador to Saudi Arabia Reverts To IslamCardeilli, who speaks Arabic, is the first ambassador to revert to Islam in Saudi Arabiahome to Islam's holiest sites in Makkah and Madinah, according to a dawah center in Batha which handles Muslim reversions. Nouh ibn Nasser, director of the Batha center, said the Italian conv…