Wednesday, November 9, 2011

त्रिया की बदबूदार पोस्ट


जैसे कि बहादुरी को मर्दानगी और डरकर भाग जाने को बुज़दिली कहा जाता है , ठीक ऐसे ही पति की वफ़ादार औरत को सती और बेवफ़ा को त्रिया कहा जाता है। औरत और मर्द, दोनों में ही दोनों तरह के लोग हमेशा से पाए जाते हैं। ब्लॉगिंग की दुनिया में भी इन्हें देखा जा सकता है।
ब्लॉगिंग किसी भी भाषा में और किसी भी देश में की जा रही हो लेकिन सभी ब्लॉगर अच्छे, सच्चे और नेक नहीं होते।
कुछ लालची और ग़ददार भी होते हैं।
ये लोग अपने ऐब छिपाने के लिए दूसरों पर बेवजह इल्ज़ाम लगाते रहते हैं और इस तरह  उनकी पोस्ट्स से नफ़रत और बदबू फैलती रहती है।
जो आदमी अपनी बीवी का और जो औरत अपने शौहर की वफ़ादार नहीं है और ग़ैरों के साथ इश्क़ फ़रमा रहे हैं, इनसे किसी नेकी और सुधार की उम्मीद करना ही बेकार है।
बस इनसे होशियार रहने की ज़रूरत है।
नीचे जिस पोस्ट का लिंक है, वह ऐसी ही किसी त्रिया चरित्र ब्लॉगर की कारस्तानी है , आप देखें और अपनी राय न भी दें तो भी चलेगा।
10 things I hate about India

6 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

दोस्त न होना दुखद है लेकिन दुश्मन न होना और भी दुखद है।

Dineshrai Dwivedi said...

निन्दक नियरे राखिए!
जनाब! मुझे उस पोस्ट पर कोई बुराई नजर नहीं आयी। बल्कि आप द्वारा की गई निन्दा के स्तर से आप के बारे में उचित धारणा बनाने में मदद मिली।
यह तो ऐसे ही हुआ की आप की पैंट की फ्लाई की चैन खुली रह गयी और जिसने याद दिलाया वही बदनाम हो गया कि उसकी निगाह वहाँ क्यों थी।

हौसलेवाला said...

हिंदी में होती तो और ज्यादा अच्छा था

Dr. Ayaz Ahmad said...

विनोद हौसलेवाला जी ! आपके लेख नवभारत टाइम्स पर पढ़ता रहता हूं। यहां आपको देखकर ताज्जुब हुआ। आपके ब्लॉग पर गया तो वहां रमेश कुमार जैन सिरफिरा जी को भी आपके साझा ब्लॉग का सदस्य पाया।
इस साइट पर आपके ब्लॉग का स्वागत है।
भाई साहब ! केवल उदाहरण के लिए चुना गया लिंक ही अंग्रेज़ी में है और वह तो ऐसे ही गूगल की मदद से टटोल कर उठा लिया गया था वर्ना असल मुददा तो वह है जो कि पोस्ट में बयान किया गया है और वह सारा का सारा हिंदी में ही है।

Dr. Ayaz Ahmad said...

@ वकील साहब ! हम तो काफ़ी पुराने ब्लॉगर हैं और हमारे बारे में आपकी राय भी बनी बनाई ही है और आपके बारे में हमारी।
आपका कमेंट पढ़कर ताज्जुब हुआ कि बुद्धिजीवी कहलाने वाले लोगों का यह हाल है।
भारत में कमियां नहीं हैं, इस बात से किसे इन्कार है ?
लेकिन कौन सा देश ऐसा है जिसके शासन प्रशासन और राजनेताओं में कमियां नहीं हैं ?
कमियों की निशानदेही करना तो ठीक है लेकिन उनकी आड़ लेकर भारत से नफ़रत का ऐलान करना सरासर ग़लत है। हमारी पोस्ट का विषय यही नफ़रत है।
कमियों की तरफ़ ध्यान दिलाना ठीक है लेकिन यह काम प्यार के साथ किया जाए तो हमदर्दी है और नफ़रत के साथ किया जाए तो मज़ाक़ उड़ाना है।
कोई भारत की मज़ाक़ उड़ाए , यह हम तो बर्दाश्त नहीं करेंगे ,
आप करना चाहें तो बेशक आप करें।
लेकिन ऐसा करने के बाद अपने बारे में खुद आपकी राय क्या बनेगी ?
इस पर कभी विचार कीजिएगा।

भारत एक प्यारा देश है और कमियों के बावजूद इसमें और इसके रहने वालों में ऐसी ख़ूबियों की भी कमी नहीं है जिन्हें देखकर भारत से प्यार हो जाता है और यही वजह है कि जो एक बार यहां आ गया , वह हमेशा के लिए यहीं का होकर रह गया।

Dr. Ayaz Ahmad said...

यह सही है कि दोस्त की तरह ही दुश्मन भी अकेलेपन के कष्ट को पास फटकने नहीं देता।
सही कहा आपने जमाल साहब !

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