तुम में से कोई उस समय तक वास्तविक मुसलमान नहीं हो सकता जब तक कि वह अपने भाई के लिए वही पसन्द न करे जो वह अपने लिए पसन्द करता है .
वह जो पेट भर खाता है जबकि उसका पड़ोसी भूखा रहता है वह मुसलमान नहीं |
सच्चा और ईमानदार व्यापारी ईशदूतों, सदाचारियों, सिद्दीकों और शहीदों के साथ होगा |
ताक़तवर वह नहीं जो दूसरों को पछाड़ दे बल्कि ताक़तवर वह है जो गुस्सा पर क़ाबू पा ले |
अल्लाह तुम्हारे जिस्मों और तुम्हारी सूरतों को नहीं देखता बल्कि वह तुम्हारे दिलों को देखता है |
अल्लाह तुम्हारे तुम्हारी सूरतों और मालों को नहीं देखता बल्कि वह तुम्हारे दिलों और कर्मों को देखता है |
4 comments:
बहुत ही अच्छी बात कही अयाज़ साहब.
Nice post.
तो फिर बनो वास्तविक मुसलमान !!!
आये थे बनने यहाँ इंसान हम सब लोग।
बद नसीबी से बने हम, हिंदु मुसलमान।।
धर्म है इंसान के शोषण का रास्ता।
धर्म के बिना नहीं जी सकता क्या इंसान।।
इंसानियत के सिवा धर्म दूसरा नहीं।
मैं तो हूँ भाई ओर सभी धर्म से अनजान।।
धर्म ने बताओ हमको क्या दिया है दोस्त।
मैंने तो देखा धर्म ने ली आदमी की जान।।
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