Saturday, November 26, 2011

वह कभी टंकी पर नहीं चढ़ी ...


 क्या बड़ा ब्लॉगर टंकी पर ज़रूर चढता है ?

ऐसी मान्यता क्यों बन गई है कि बड़ा ब्लॉगर वही कहला सकता है जो कि टंकी पर चढ  जाए और ज़ोर ज़ोर  से चिल्लाए-'ब्लॉग वालो, तुमसे मेरी ख़ुशी  देखी नहीं जाती, तुम मुझसे जलते हो, मेरी टिप्पणियों से जलते हो, लो मैं चला/चली।' 

5 comments:

Udan Tashtari said...

अब यह मान्यता खत्म हो गई है...आदिकाल की प्रथा है बाल विवाह सी... :)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

वाह!
ब्लॉगिंग में टंकी भी अमर हो गई है!

Arunesh c dave said...

आप तौर पर ऐसा तभी होता है जब "उसकी चोरी पकड़ी गयी क्योंकी रोशन था बजाज" वाला पुराना विज्ञापन बजने लगता है।

डॉ टी एस दराल said...

यह बड़ा ब्लोगर क्या होता है ?

बी एस पाबला BS Pabla said...

कभी हम उनको, कभी अपने आप को देखते हैं :-)

लव जिहाद से लैंड जिहाद तक

 जिहाद से जुड़ी शब्दावली शायद कहीं खत्म हो ऐसा लगता नहीं है मुस्लिम विरोधी संगठन राजनीति में अपनी बढ़त के लालच में नए नए शब्द गढ़ते जा रहे ...