Wednesday, November 23, 2011

मज़दूर की मज़दूरी उसके शरीर का पसीना सूखने से पहले दे दो

अल्लाह कहता है कि परलोक में मैं तीन आदमियों का दुश्मन हूंगा। 
एक: जिसने मेरा नाम लेकर (जैसे-‘अल्लाह की क़सम’ खाकर)  किसी से कोई वादा किया, फिर उससे मुकर गया, 
दो: जिसने किसी आज़ाद आदमी को बेचकर उसकी क़ीमत खाई; 
तीन: जिसने मज़दूर से पूरी मेहनत ली और फिर उसे पूरी मज़दूरी न दी।

हदीस-शास्त्र !



4 comments:

Unknown said...

हकीकत बयां की आपने डॉ अयाज़ साहब.

दिनेशराय द्विवेदी said...

अल्लाह ने या जिस किसी ने उस के नाम से फरमाया, बजा फरमाया।
पर सुन कौन रहा है अल्लाह की?
आजाद आदमियों के लिए इतने फरमान लेकिन गुलामों के लिए?
यह कौन है जो गुलामी की प्रथा को बनाए रखना चाहता है?
गुलामों को आजाद कर देने के लिए एक शब्द भी नहीं? यकीनन ये अल्लाह नहीं हो सकता। संपत्तिवानों का बनाया कोई खुदा लगता है।

DR. ANWER JAMAL said...

Nice post .
इस तरह की पोस्ट्स लोगों का मार्गदर्शन करती हैं।
कृप्या इस तरह की पोस्ट्स पर विशेष ध्यान दें।

शुक्रिया !

Mohsin ansari said...

Nice post

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