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क्या आप मूत्र पीने के शौक़ीन हैं ?


मल मूत्र का नाम आते ही आदमी घृणा से नाक भौं सिकोड़ने लगता है लेकिन ऐसे लोगों की संख्या करोड़ों में है जो कि मूत्र पीते हैं।
मूत्र पीने को आजकल बाक़ायदा एक थेरेपी के रूप में भी प्रचारित किया जाता है।
मूत्र का सेवन करने वालों में आज केवल अनपढ़ और अंधविश्वासी जनता ही नहीं है बल्कि बहुत से उच्च शिक्षित लोग भी हैं और ऐसे लोग भी हैं जो कि दूसरे समुदाय के लोगों को आए दिन यह समझाते रहते हैं कि उन्हें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए लेकिन खुद कभी अपने पीने पर ध्यान नहीं देते कि वे क्या पी रहे हैं और क्यों पी रहे हैं ?
बहरहाल यह दुनिया है और यहां रंग बिरंगे लोग हैं।
सबकी अक्ल और सबकी पसंद अलग अलग है।
जो लोग पेशाब पीते हैं , उन्हें भला कौन रोक सकता है ?
देखिए एक लिंक -

(Coen Van Der Kroon) 
Urine therapy consists of two parts: internal appication (drinking urine) and external application (massaging with urine). Both aspects comple-ment each other and are important for optimal results. The basic principle of urine therapy is therefore quite simple: you drink and massage yourself with urine. Even so, there are a number of different ways to apply urine therapy. After your initial experiences, you will be able to determine. Throughout the civilized world, blood and blood products are used in the medical world without evoking the repugnance associated with urine. We often use prepacked cells, plasma, white blood cells and countless other blood components. Urine is nothing other than a blood product. 

Comments

DR. ANWER JAMAL said…
हालात के क़दमों पे कलंदर नहीं गिरता
टूटे भी जो तारा, ज़मीं पे नहीं गिरता ,

गिरते हैं समंदर में बड़े शौक़ से दरिया
लेकिन किसी दरिया में समंदर नहीं गिरता,
...
समझो वहां फलदार शजर कोई नहीं है
वोह सहन कि जिसमें पत्थर नहीं गिरता,

हैरान है कई रोज़ से ठहरा हुआ पानी
तालाब में अब क्यूं कोई कंकर नहीं गिरता,

इस बंदा-ए-खुद्दार पे नबियों का है साया
जो भूख में भी लुकमा-ए-तर पर नहीं गिरता,

कायम है क़तील अब ये मेरे सर के सुतून पर
भूचाल भी आये तो मेरा घर नहीं गिरता .
_________ क़तील शिफाई

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