Saturday, November 12, 2011

गुलछर्रे मुबारक, कमेंट ऑप्शन बंद बिल्कुल भी नहीं है


कोई देश तीर्थ के लिए मशहूर है दुनिया में और कोई दुनिया की दौलत के लिए.
दौलत के भूखे तीर्थ का देश छोड़कर चले जाते हैं ऐसे देश में जहां वे अपनी आस्थाओं पर प्रहार होते चुपचाप देखते रहते हैं.
वहां गाय काटी जाती है और वे चुप रहते हैं सिर्फ़ माल की ख़ातिर.
वहां बैठकर वे गऊ रक्षा की बातें करते हैं अपने ब्लाग पर केवल उस देश के लोगों के लिए जहां से भागे हुए हैं.
यह है इनकी नैतिकता.
ये गंगा को छोड़कर गए , ये हिमालय को छोड़कर गए, ये अपनी बूढ़ी मां को छोड़कर गए, ये अपने रिश्ते नातों को छोड़कर गए, ये सब कुछ छोड़कर गए सिर्फ़ एक माल की ख़ातिर.
ये अपना ज़मीर कुचल कर विदेश में रहते हैं और फिर भी नैतिकता का उपदेश पिलाते हैं अपने देश के लोगों को.
तुम माल की बातें करो, नैतिकता की बातें हम कर लेंगे.
तुम्हें सीखना हो धर्म और नैतिकता तो हमसे सीखो.
या फिर ख़ामोश ही रहो.
जिस मैदान में तुम्हें कोई तजर्बा ही नहीं है.
उसमें बात क्यों करते हो ?
क्यों विदेशियों के साथ प्यार से रहते हो ?
और देश में हिंदू मुस्लिमों के दरम्यान नफ़रत की आग भड़काते हो ?

जो तीर्थ, गंगा और हिमालय ही छोड़ गया माल के लिए,
उसे हक़ भी क्या है किसी को उपदेश देने का ?
कुछ त्याग किया होता तो बोलते हुए अच्छे भी लगते.

गुलछर्रे मुबारक हों आपको।
उड़ाओं ख़ूब गुलछर्रे ...

7 comments:

समयचक्र said...

मुबारक हों आपको
उड़ाओं ख़ूब गुलछर्रे ...

kya baat hai joradaar vaah..

DR. ANWER JAMAL said...

ज़रूरतें, मजबूरियां और तक़दीर किसे कब कहां ले जाएं, कौन जान सकता है ?
जिसके मुक़द्दर की रोज़ी जहां उतरी है, उसे वहां जाना ही पड़ेगा।
हमारे जीवन पर हमारा नियंत्रण ही कब है ?

see entire article :
http://vedquran.blogspot.com/2011/11/qurbani.html

Shah Nawaz said...

Bilkul wahiyaat, betuki aur bekar post hai...

Ayaz ahmad said...

@ महेंद्र मिश्र जी ! आपकी तारीफ़ से हमारा दिल बढ़ा।
इसके लिए आपका शुक्रिया !

@ अनवर जमाल साहब ! मजबूरियां , ज़रूरतें और तक़दीर इंसान को कहीं भी ले जाती हैं , यह सच है मगर यह भी सच है कि इंसान अपनी ख़ुदग़र्ज़ी और लालच में भी दर ब दर की ठोकरें खाता फिरता है।

@ शाहनवाज़ जी ! आपके कमेंट से पता चला कि हमारी पोस्ट ठीक बराबर के वज़्न की बन गई है। आपकी तारीफ़ का यह अंदाज़ भी हमें पसंद आया।
दुनिया क्या समझेगी और आप कह क्या गए ?

Ayaz ahmad said...
This comment has been removed by the author.
Shah Nawaz said...

अयाज़ भाई, अगर आप मेरे एतराज़ और कटु शब्दों को भी तारीफ समझें तो क्या कहा जा सकता है??? इतना ही कहूँगा कि यह पोस्ट बहुत ही हलके स्तर की है...

Ayaz ahmad said...

@ शाहनवाज़ भाई ! आपने किसी भी पोस्ट पर कटु शब्द आज तक न कहे लेकिन यहां आपने कहे तो कोई ख़ास ताल्लुक़ ही तो समझते होंगे न आप ?
जहां ऐसा ताल्लुक़ हो,
वहां क्या हम आपकी बात को न समझेंगे कि आप क्या कहना चाह रहे हैं और किसे दिखाना चाह रहे हैं ?

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