Saturday, October 29, 2011

जो हमारे देशभक्तों को राक्षस और दरिंदा कहे, वह कहीं खुद ही ग़ददार या दिमाग़ी दिवालिया तो नहीं है ?


यह सच है कि हैदर अली, टीपू सुल्तान, बहादुर शाह ज़फ़र, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, मौलाना आज़ाद, सरहदी गांधी खान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान और कर्नल शाहनवाज़ जैसे बहुत से लोगों ने आज़ादी की लड़ाई लड़ी और ये सब मांसाहारी थे। आज़ादी की हिफ़ाज़त की ख़ातिर आज भी हमारे जो जांबांज़ लोग सरहदों पर
खड़े हैं, उनमें भी अधिकतर मांसाहारी ही हैं। 
देशवासियों में भी अधिकतर लोग मांसाहारी हैं और समुद्र किनारे जितने भी प्रदेश हैं, उनके निवासियों का मुख्य भोजन भी मछली आदि जलीय जीव हैं।
जो कोई मांसाहारियों को राक्षस और दरिंदा कहता है, वह वतन के शहीदों और रखवालों को और अधिकतर भारतीयों को राक्षस और दरिंदा कहता है और ऐसे आदमी के ग़ददार होने में कुछ शक नहीं है या फिर वह जाहिल और पागल है।
ऐसा कुछ नहीं है तो फिर मनोरोगी तो वह है ही।
इस विषय पर पूरी संतुष्टि देता हुआ एक ब्लॉग :

7 comments:

DR. ANWER JAMAL said...

Nice post.

Gyan Darpan said...

दुनियां में अधिकतर लोग मांसाहारी ही है अत: इस पर विवाद करने का कोई फायदा नहीं|भोजन सब का व्यक्तिगत मामला है किसी को मांसाहार पसंद है तो किसी को शाकाहार|

इसमें दरिंदगी या राक्षसपन वाली बात करना बेहूदगी ही है|

Atul Shrivastava said...

अच्‍छी पोस्‍ट।

सुज्ञ said...

@इस विषय पर पूरी संतुष्टि देता हुआ एक ब्लॉग :
पशुबलि-कुरबानी , शाकाहार-मांसाहार , वैचारिक बहस- फ्री फॉर ऑल धर्मयुद्ध. : प्रवीण शाह

इस पोस्ट पर टिप्पणियों में आए बिन्दु-वार प्रत्युत्तर भी देखने लायक है।

सुज्ञ said...

@दुनियां में अधिकतर लोग मांसाहारी ही है अत: इस पर विवाद करने का कोई फायदा नहीं|

रतन जी,

दुनिया में अधिकतर लोगों का आचार मात्र होने से अनुकरणीय नहीं हो जाता।

सुज्ञ said...

Dr. Ayaz Ahmad साहब,

कृपया देशभक्तों और सैनिकों के बारे में भ्रम न फैलाएं। देशभक्ति के लिए माँसाहारी होना जरूरी नहीं है।

सुज्ञ said...

प्रवीण शाह साहब के 11 प्रश्नों के उत्तर यहां है………

पशुबलि-कुरबानी , शाकाहार-मांसाहार , वैचारिक बहस- फ्री फॉर ऑल धर्मयुद्ध... बीचों-बीच फंसे (प्रवीण शाह) जिनके जेहन से उठते ११ सवाल... और उत्तर देंगे हम।

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