Monday, October 24, 2011

क्या आत्महत्या करके मरने वाले लोगों की जान की कोई क़ीमत ही नहीं है ?


हिन्दी ब्लोगर्स फ़ोरम इंटरनेश्नल  पर जमा किए गए लिंक्स हमेशा दिलो दिमाग़ को कुछ सोचने पर मजबूर कर देते हैं।
आत्महत्या करके मरने वाले लोगों की तादाद उनसे ज़्यादा है जो कि विदेशी आतंकवादियों का निशाना बनकर मरते हैं।
इसके बावजूद इन पर न तो कोई ध्यान देता है और न ही इन्हें बचाने के लिए कोई योजना ही बनाई जाती है।
क्या इनकी जान की कोई क़ीमत ही नहीं है ?
देखिये -

1 comment:

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

जब दिमाग सनक जाये तब कीमत की बात नहीं रहती।

लव जिहाद से लैंड जिहाद तक

 जिहाद से जुड़ी शब्दावली शायद कहीं खत्म हो ऐसा लगता नहीं है मुस्लिम विरोधी संगठन राजनीति में अपनी बढ़त के लालच में नए नए शब्द गढ़ते जा रहे ...