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हमारी वाणी को नफ़रत फैलाने वाली ऐसी पोस्ट को प्रकाशित नहीं करना चाहिए

ZEAL: 'लाश' खाने के शौक़ीन हैं आप ?
कायस्थों में मांसाहार प्रचलित है, कुछ नहीं भी खाते होंगे जैसे कि डा. दिव्या नहीं खातीं लेकिन उन्होंने मांसाहारियों को राक्षस और दरिंदा घोषित कर दिया और इस सिलसिले में उन्होंने राष्ट्रभक्तों तक को नहीं बख्शा।
संसद भवन के रेस्टोरेंट में गोरक्षकों को भी मांसाहार करते देखा जा सकता है।
उन्होंने बक़र ईद पर कुरबानी की भी निंदा कर डाली।
हमारी वाणी का दावा है वह किसी भी धर्म की निंदा वाली पोस्ट प्रकाशित नहीं करेगी लेकिन उसने डा. दिव्या की पोस्ट को प्रकाशित किया और उसे सादर अपनी हॉट लिस्ट में जगह भी दी।
यह ग़लत बात है।
जो लोग खुद न घर के हैं और न घाट के हैं, मोटा माल कमाने के लालच में विदेश भागे हुए ये खुदग़र्ज़ लोग अब लोगों को बता रहे हैं कि मांसाहार करने वाले वाले दरिंदे और राक्षस हैं।
उनका यह कथन निंदनीय है।
हमारी वाणी को नफ़रत फैलाने वाली ऐसी पोस्ट को प्रकाशित नहीं करना चाहिए।

Comments

DR. ANWER JAMAL said…
हमने दिव्या जी की पोस्ट पर ये तीन सवाल पूछे थे लेकिन उन्होंने इसे पब्लिश ही नहीं किया। ऐसे में कोई भी सार्थक बहस कैसे हो सकती है ?
अब यही सवाल हम यहां कमेंट के रूप में पेश कर रहे हैं-
1- दिव्या जी आप जेसी जी को जवाब देते हुए कह रही हैं कि इस संसार में जो कुछ घटता है वह सब हरि की इच्छा से ही घटता है।
क्या जीवों की मृत्यु भी हरि की इच्छा से ही घटित होती है या वह उसकी इच्छा के बिना घटित हो जाती है ?

2- क्या आलू और टमाटर खाए जा सकते हैं ?
या इन्हें खाने में भी कोई दोष है ?
कृप्या बताएं ?

3-भाई राकेश कुमार जी ने कबीर साहिब के नाम से कुछ लिख डाला है जो कि उनके ग्रंथ बीजक में तो है नहीं, फिर उन्होंने कहां से लिखा है ?
इसका उद्धरण दें तो अच्छा रहेगा ?
रविकर said…
रवि को रविकर दे सजा, चर्चित चर्चा मंच

चाभी लेकर बाचिये, आकर्षक की-बंच ||

रविवार चर्चा-मंच 681
सुज्ञ said…
मेरे कुछ प्रश्न है…………

हिंसा के खिलाफ लिखना किसी वर्ग के लिए नफ़रत फैलाना कैसे हो सकता है। क्या वह वर्ग और हिंसा एक दूसरे के प्रयाय है?

क्या मांसभक्षी जानवरों के लिए दरिंदा शब्द नहीं है?

देशभक्तों को राक्षस कहां कहा गया है, सन्दर्भ सहित बताईए, या फिर यह कथन देशभक्तों को भड़काने के उद्देश्य से किया गया है?

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