Skip to main content

कार्य स्थल पर यौन शोषण ?


कार्य स्थल पर यौन शोषण की रोकथाम

क्या करें

  • याद रखें कि संविधान के तहत महिलाओं को निम्नलिखित मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं:
    - लिंग के आधार पर किसी तरह के भेदभाव के खिलाफ लिंग समानता का अधिकार
    - कोई भी व्यवसाय चलाना या कोई भी व्यापार, व्यवसाय, अथवा कारोबार संचालित करना 
    - जीवन और स्वाधीनता का अधिकार 
  • कार्यस्थल पर उनका उचित ध्यान रखा जाना चाहिए।
  • याद रखें कि भारत के संविधान में यह अपेक्षा है कि सरकार महिलाओं को न्‍यायोचित और कार्य की मानवोचित स्थिति तथा मातृत्व राहत के लिए प्रावधान करे। कामकाजी महिलाओं को कार्य स्थल पर ये सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

क्या न करें

  • महिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न करें क्योंकि वे संविधान के अनुच्छेद 32 के अन्तर्गत प्रवर्तनीय हैं तथा इनका हनन करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
  • महिलाओं के लिए बनाए गए विशेष प्रावधानों में बाधा पैदा न करें क्योंकि उन्हें भारत के संविधान के अनुरूप बनाया गया है।
  • फैक्ट्री अधिनियम की धारा 66 के अनुसार किसी भी महिला से प्रात: 0600 बजे से सायं 0700 बजे के बीच के कार्य के घंटों को छोड़कर किसी भी समय में काम नहीं लिया जा सकता/अथवा उसे काम की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
  • महिला कर्मचारियों और साथियों के प्रति भद्र व्‍यवहार करना न भूलें।
  • कार्य स्थल पर कोई भी कर्मचारी महिला कर्मचारी के यौन उत्पीड़न में संलिप्त नहीं होना चाहिए। यदि आप ऐसा करते हैं तो आपके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही हो सकती है।
  • प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से महिला कर्मचारियों के शारीरिक संपर्क आदि में संलिप्त न हों। अन्यथा इसे यौन शोषण माना जाएगा।

क्या करें

  • याद रखें कि संविधान में भी प्रत्येक भारतीय नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह महिलाओं की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए कार्य करे। इसके विरुद्ध उनकी रक्षा की जानी चाहिए।
  • सदैव कार्य के लिए प्रेरणात्मक वातावरण सृजित करने का प्रयास करें।
  • याद रखें कि हम सब की यह संयुक्त जिम्मेदारी है कि हम अपने मानवाधिकारों की रक्षा करें और ऐसे व्यवहार को दूर करें जो कि अस्वीकार्य और भेदभाव वाला हो।
  • महिलाओं के अधिकार मानवाधिकार हैं।
  • कर्मचारियों, विशेषकर महिलाओं की पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करें।
  • कार्य स्थल पर यौन शोषण की रोकथाम के लिए समुचित कदम उठाएं।

क्या न करें

  • महिला कर्मचारियों पर यौन संबंधी फब्तियां न कसें।
  • कोई भी कर्मचारी प्रत्यक्ष या परोक्ष अथवा लाक्षणिक रूप से महिला कर्मचारियों को अश्‍लील साहित्‍य न दिखाए और न ही इसका प्रयास करे। यह महिला कर्मचारी के यौन शोषण की श्रेणी में आता है।
  • किसी भी महिला कर्मचारी के साथ यौन प्रकृति का अप्रिय शारीरिक, मौखिक या गैर मौखिक आचरण न करें। इस प्रकार किया गया कोई भी बर्ताव महिला कर्मचारी के यौन शोषण की श्रेणी में आता है।
  • महिला कर्मचारी को यौन की वस्तु न समझें। महिला कर्मचारियों के लिए उनके रोजगार के सिलसिले में उन्‍हें असुविधाजनक एवं अलाभकर स्‍थान में तैनात न करें।
*संविधान का अनुच्छेद 51 क(ड.). 10*  माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने विशाफका और अन्य तथा राजस्थान सरकार एवं अन्य के मामले में, एआईआर 1997 एससी 3012 में अपना निर्णय सुनाया, जिसमें "यौन शोषण को निम्नानुसार परिभाषित किया गया है :
"यौन शोषण में ऐसा अप्रिय यौन संबंधी आचरण शामिल है, जो कि प्रत्यक्ष या निहितार्थ रूप में किया गया है,जैसे कि : क) शारीरिक संपर्क और प्रस्ताव करना, ख) यौन संबंधी कोई मांग या अनुरोध, ग) यौन संबंधी टिप्पणियां, घ) अश्लील साहित्य दिखाना, ङ) यौन प्रकृति के संबंध में किसी प्रकार का अन्‍य अनुचित शारीरिक, मौखिक या गैर-मौखिकआचरण"
*यह एफ.एन.8 क्या करें में संदर्भित सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुरूप है:
  • किसी तीसरे पक्ष या बाहरी व्यक्ति द्वारा किए गए किसी कृत्य या गलती के कारण जहां कहीं यौन शोषण की घटना होती है तो प्रभावित व्यक्ति की सहायता और बचाव की कार्रवाई के रूप में सभी जरूरी तथा न्यायोचित कदम अवश्‍य उठाएं।
  • यौन शोषण के शिकार व्यक्ति  के पास यह विकल्प होना चाहिए कि वह या तो इसके लिए जिम्मेदार व्‍यक्‍ति अथवा स्वयं का स्थानांतरण करा ले।
  • याद रखें कि महिलाओं के यौन शोषण को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया है *13 तथा यह वादयोग्य है (इसके उल्लंघन को अदालत में चुनौती दी जा सकती है)।
  • सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार यौन शोषण एक अनुशासनहीन अपराध है। अत: कर्मचारियों के आचरण और अनुशासन से संबंधित नियमों/विनियमों तथा स्थाई आदेशों में संशोधन किए जाने की आवश्यकता है ताकि ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई की जा सके।
  • कम्पनी के पास महिला कर्मचारियों के यौन शोषण के मामलों की देखरेख के लिए शाखा कार्यालयों में पदनामित समन्वयक के रूप में एक "शिकायत समिति" कार्यरत है। जिस किसी को भी कोई शिकायत हो तो वह इससे संपर्क कर सकता है।
  • यौन शोषण के लिए विभागीय कार्रवाई के अलावा अनुशासन प्राधिकारी को भारतीय दंड संहिता के अन्तर्गत आपराधिक कार्रवाई शुरू करने से नहीं चूकना चाहिए:
    -अनुच्छेद 354 के तहत किसी महिला पर उसकी मर्यादा भंग करने के इरादे से उस पर हमले करने या आपराधिक बल प्रयोग करने पर 2 वर्ष की कैद की सजा या जुर्माना या दोनों के दंड का प्रावधान है।
    -किसी महिला की शालीनता को नुकसान पहुंचाने के इरादे से किसी शब्द का प्रयोग करना या कोई चेष्‍टा करना अनुच्छेद 509 के तहत एक संज्ञेय अपराध है। इसके लिए 1 वर्ष की कैद की सजा या जुर्माना अथवा दोनों दंड का प्रावधान है।
  • उत्पीड़न की आधारहीन शिकायत न करें। इससे व्यक्तिगत तौर पर शिकायतकर्ता की विश्वसनीयता और सामान्यत: महिलाओं की प्रतिष्ठा पर दुष्प्रभाव पड़ेगा।

क्या न करें

  • जहां कहीं आप जटिल प्रक्रिया पाएं तो उन्हें चिह्नित करने में संकोच न करें तथा उनमें सुधार का सुझाव दें, क्योंकि इससे भ्रष्टाचार और दुराचरण के अवसर पैदा हो सकते हैं।
  • मत भूलें कि भ्रष्टाचार से आपके संगठन की छवि धूमिल होती है, इसे दूर भगाएं।
  • कम्पनी के नियमों और विनियमों के उल्लंघन के प्रति ढील न दर्शाएं। स्थिति के अनुरूप दंडात्मक या निरोधात्मक कार्रवाई करें।
  • मत भूलें कि आपकी सतर्कता कम्पनी में चोरी, संसाधनों की हानि, लीकेज और अन्य अनुत्‍पादक गतिविधियों पर अंकुश लगा सकती है, और इस तरह प्रक्रिया में लक्ष्य हासिल करने हेतु नेतृत्व प्रदान करें।
  • किसी कर्मचारी विशेष या कनिष्ठ कर्मचारी के साथ अत्यधिक निकटता न बनाएं अन्यथा आपकी निष्पक्षता पर प्रश्न चिह्न लग सकता है।
  • जब आपकी जानकारी में सत्यनिष्ठा की कमी के मामले सामने आएं तो कठोर कार्रवाई करने से संकोच न करें।
  • अपनी संपत्ति विवरणिका समय पर प्रस्तुत करना न भूलें।

क्या करें

  • संगठन की न्यायपूर्ण कार्य प्रणाली के बारे में कर्मचारियों का विश्वास कायम करने के लिए जांचों को एक न्यायोचित गति के साथ और तटस्थ भावना से पूरा करें।
  • सतर्कता विभाग को संगठन का एक मित्र मानें तथा दिल खोलकर उसका सहयोग करें।
  • याद रखें इलाज से बचाव अच्छा होता है तथा भ्रष्टाचार से बचाव, अपराध करने के बाद सजा देने से ज्यादा बेहतर हो सकता है। अत: भ्रष्टाचार के प्रति जनता को संवेदनशील बनाने के लिए केंद्रीय सतर्कता आयुक्त ने अपने अधीन सभी संगठनों से कहा है कि वे कार्यालय के स्वागत कक्ष में एक मानक, सूचना पट्ट लगाएं जिसमें अंग्रेजी और स्‍थानीय भाषा में निम्न प्रकार लिखा गया हो : "किसी को भी रिश्वत न दें। यदि इस कार्यालय का कोई व्यक्ति रिश्वत मांगता है या आपके पास इस कार्यालय में किसी तरह के भ्रष्टाचार की कोई सूचना है या आप इस कार्यालय में रिश्चत का शिकार हुए हैं तो आप विभागाध्यक्ष या मुख्य सतर्कता अधिकारी और केंद्रीय सतर्कता आयुक्त को शिकायत कर सकते हैं (प्रत्येक के साथ नाम, पूर्ण पते और टेलीफोन नंबरों का भी उल्लेख करना होगा)।
  • याद रखिए जहां सतर्कता का अंत होता है, वहीं से समस्याएं शुरू होती हैं।

क्या न करें

  • कभी मत भूलें कि सभी फैसले संगठन के हित में हों और यथार्थ कारणों से लिए गए हों। प्रक्रिया संबंधी छोटी-मोटी त्रुटियों को नजर अंदाज किया जा सकता है लेकिन मनमानापूर्ण व्यवहार से बचा जाना चाहिए। लेकिन प्रक्रियागत विचलनों के कारणों को दर्ज करना न भूलें।
  • अपने अधीनस्थों के किसी भी आचरण पहलू को नोट करने से न चूकें, जैसे कि रहन-सहन का तरीका या उन व्यक्तियों के साथ उदारता जिनके साथ कार्यालयी कार्य व्यवहार जुड़ा है, जिससे उसकी सत्यनिष्ठा के बारे में संदेह पैदा हो सकता है।
  • अस्पष्ट आदेश जारी न करें। इससे अनियमितताओं को पनपने का आधार मिलता है।
  • आपको सतर्कता विभाग पर आशंका नहीं करनी चाहिए। सच कहें, सतर्कता विभग सभी ईमानदार लोगों का मित्र होता है।

चिकित्सा प्रतिपूर्ति

क्या करें

  • सदैव चिकित्सा प्रतिपूर्ति के सही दावे प्रस्तुत करें।
  • याद रखें कि वर्तमान में अस्पताल में भर्ती संबंधी चिकित्सा प्रतिपूर्ति योजना के अनुसार भुगतान प्रधान कार्यालय तथा शाखा कार्यालय, नोएडा और बंगलूरु के लिए पीजीआई/एम्स की दरों पर तथा हैदराबाद में जीएईटीईसी परियोजना हेतु निज़ाम अस्पताल/वीएआईआईएमएस की दरों पर प्रतिपूर्ति की जाती है।
  • अस्पताल से मुक्त होने के तत्काल बाद इलाज संबंधी दावा अनुमोदित प्रपत्र में विधिवत हस्ताक्ष कर तुरंत प्रस्तुत करें।
  • अस्पताल में भर्ती के दौरान प्रयुक्त सभी दवाइयां/उपभोग की वस्तुएं केवल पंजीकृत कैमिस्ट से ही खरीदें।

क्या न करें

  • कम्पनी के नियमानुसार ऐसे पारिवारिक सदस्यों/संबंधियों के इलाज हेतु चिकित्सा प्रतिपूर्ति के दावे प्रस्तुत न करें जो आपके आश्रित नहीं हैं।
  • अपने आश्रित पारिवारिक सदस्य के एवज में अपने संबंधियों का इलाज न कराएं,जैसे कि अपने माता/पिता के स्थान पर सास/ससुर का, अपनी पुत्री/पुत्र के बदले अपनी पुत्रवधु/दामाद का; अपनी पत्‍नी के स्‍थान पर चचेरी बहिन/शाली का इलाज न कराएं।
  • कभी भी जाली दावे प्रस्तुत न करें, यह कदाचार की श्रेणी में आता है तथा पता चलने पर आपके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
  • अस्‍पताल/नर्सिंग होम के नाम और पते के उल्लेख के साथ किसी प्रक्रिया/ऑपरेशन की पूर्व सूचना देने से न चूकें।
  • अस्‍पताल में भर्ती होने तथा ऑपरेशन की संभावित तारीख का उल्‍लेख करना न भूलें।
  • दावा प्रपत्र में पूर्ण विवरण जैसे कि ई.सी. नं., मूल वेतन तथा रोगी के नाम/दावाकर्ता के साथ संबंध आदि का पूर्ण विवरण देने से न चूकें।
  • अस्पताल में भर्ती होने पर इलाज के दौरान किसी निजी रूम/जनरल वार्ड के लिए अपनी पात्रता से अधिक की राशि का दावा प्रस्तुत न करें.
असल माखज़ -
http://mit.gov.in/hindi/node/561

Comments

DR. ANWER JAMAL said…
Nice post .

http://commentsgarden.blogspot.com/2011/09/blog-post.html
यह हिंदी ब्लॉगिंग है, यहां कोई भी ब्लॉगर कुछ भी कर सकता है लेकिन उसका भला तब तक हो भी नहीं सकता जब तक कि वह नफ़रत को दिल से निकाल न दे।
PLEASE SEND THIS POST ON MY MAIL ''shikhakaushik666@hotmail.com ''.this is very relevant on ''BHARTIY NARI ''BLOG .IF YOU HAVE SOME PROBLEM YOU CAN SEND THROUGH ANWAR JAMAL JI .

Popular posts from this blog

बवासीर

दोस्तों बवासीर ऐसी बीमारी है जो किसी भी आदमी का रात दिन का चैन सुकून छीन लेता है.....देसी दवाइयों से इसका कामयाब इलाज संभव है यदि परहेज़ ध्यान रखा जाए
............... पाइल्स (बवासीर, अर्श): वात, पित, कफ़ ये तीनो दोष त्वचा, मांस, मेदा को दूषित करके गुदा के अंदर और बाहरी स्थानों मैं मांस के अंकुर (मस्से/फफोले) तैयार करते हैं. इन्ही मांस के अंकुरों को बवासीर या अर्श कहते हैं ! ये मांस के अंकुर गुदामार्ग का अवरोध करते हैं और मलत्याग के समय शत्रु की भांति पीड़ा करते हैं ! इसलिए इनको अर्श भी कहा जाता है. ( चरक) बवासीर का सबसे उत्तम उपचार आयुर्वेद के द्वारा ही किया जा सकता है ! आयुर्वेदिक उपचार एक बहुत ही सुलझा और बिना साइड इफ़ेक्ट का उपचार है ! पाइल्स को पूरी तरह से आयुर्वेदिक तरीके से ही ठीक किया जा सकता है| बाहरी लक्षणों के कारण भेद: बवासीर 2 प्रकार (kind of piles) की होती हैं। एक भीतरी(खूनी) बवासीर तथा दूसरी (बादी) बाहरी बवासीर। भीतरी / ख़ूनी बवासीर / आन्तरिक / रक्‍त स्रावी अर्श / रक्तार्श ख़ूनी बवासीर में मलाशय की आकुंचक पेशी के अन्दर अर्श होता है तो वह म्युकस मेम्ब्रेन (Mucous Membran…

क्या आप सूअर की चर्बी खा रहे हैं ?

बी. एस. पाबला  जी का लेख देख कर मन में यही विचार आया, क्योंकि हम तो लेज़ खाते नहीं हैं और हो सकता है कि दूसरे प्रोडक्ट्स में E 631 हम भी खा रहे हों जो कि हक़ीक़त में सूअर की चर्बी का कोड है . यूरोप और अमेरिका में जा बसे हिन्दू मुसलमान कहाँ तक बच पाते होंगे सूअर की चर्बी से . मुस्लिम देशों में इसे गाय या भेड़ की चर्बी कह प्रचारित किया गया लेकिन इसके हलाल न होने से असंतोष थमा नहीं और इसे प्रतिबंधित कर दिया गया। बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नींदउड़गई। आखिर उनका 75 प्रतिशत कमाई मारी जा रही थी इन बातों से। हार कर एक राह निकाली गई। अबगुप्तसंकेतोवालीभाषा का उपयोग करने की सोची गई जिसे केवल संबंधित विभाग ही जानें कि यह क्या है! आम उपभोक्ता अनजान रह सब हजम करता रहे। तब जनमहुआ E कोडका
तब से यह E631 पदार्थकईचीजोंमेंउपयोग किया जाने लगा जिसमे मुख्य हैं टूथपेस्ट, शेविंग क्रीम, च्युंग गम, चॉकलेट, मिठाई, बिस्कुट, कोर्न फ्लैक्स, टॉफी, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ आदि। सूची में और भी नाम हो सकते हैं। हाँ, कुछ मल्टी-विटामिनकी गोलियों में भी यह पदार्थ होता है। शिशुयों, किशोरों सहित अस्थमा और गठिया के रोगियों को

शुक्राणुहीनता NIL SPERM

शुक्राणु की कमी के कारण और निवारण आदमी दिखनें में तन्दरुस्त हो ताकतवर हो लेकिन उसके शुक्राणु अगर दुर्बल हैं तो वो गर्भ धारण नहीं करवा सकते - तो जानें वीर्य में स्वस्थ शुक्राणुओं को बढ़ाने के चंद तरीके - पुरुष के वीर्य में शुक्राणु होते हैं ये शुक्राणु स्त्री के डिम्बाणु को निषेचित कर गर्भ धारण के लिये जिम्मेदार होते हैं - वीर्य में इन शुक्राणुओं की तादाद कम होने को शुक्राणु अल्पता की स्थिति कहा जाता है। शुक्राणु की कमी को ओलिगोस्पर्मिया कहते हैं लेकिन अगर वीर्य में शुक्राणुओं की मौजूदगी ही नहीं है तो इसे एज़ूस्पर्मिया संज्ञा दी जाती है ऐसे पुरुष संतान पैदा करने योग्य नहीं होते हैं। वीर्य में स्वस्थ शुक्राणुओं की तादाद कम होने के निम्न कारण हो सकते हैं-- * वीर्य का दूषित होना * अंडकोष पर गरमी के कारण वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है। ज्यादा तंग अन्डर वियर पहिनने,गरम पानी से स्नान करने, बहुत देर तक गरम पानी के टब में बैठने और मोटापा होने से शुक्राणु अल्पता हो जाती है। * हस्तमैथुन से बार बार वीर्य स्खलित करना * थौडी अवधि में कई बार स्त्री समागम करना * अधिक शारीरिक और मानसिक …