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Showing posts from September, 2011

हिंदी ब्लॉग जगत की यह रीत अजीब है

ब्लॉगर्स मीट वीकली (10) Stop Complaining
के बारे में हमारी राय - प्रेरणा जी की और अनवर भाई की मेहनत रंग ला रही है।
यह पोस्ट बहुत पढ़ी गई है, इस बात का पता चल रहा है HBFI के लोकप्रिय कॉलम में दिखाई देने से। इसके बावजूद इस पोस्ट पर इतने कमेंट्‌स नहीं आ रहे हैं। इसका मतलब यह है कि लोग पढने तो आते हैं लेकिन किसी वजह से वे कमेंट से जान बचाकर निकल जाते हैं।कहीं झगडा हो तो ये नसीहतें करने ज रूर पहुंच जाएंगे लेकिन कहीं लोग प्यार से मिल जुल रहे हों तो इन्हें दो शब्द कहने की तौफीक नहीं होती।

हिंदी ब्लॉग जगत की यह रीत अजीब है।

ब्लॉगर्स मीट वीकली (9) का यह वीडियो देखकर तो दिल छलनी हो गया

रहम ए मादर में बच्चियों को मारने वाले मां बाप और डाक्टर को जितना बुरा कहा जाए, कम है.
आपकी पोस्ट का वीडियो देखकर यही लगा.
शास्त्र के बारे में भी आपने ख़ूब बताया.
आदमी जब किसी वेबसाइट का पता टाइप करता है तो वही टाइप करता है जो कि दिया गया है लेकिन दीन-धर्म के नाम पर उसे ज्ञानी गुरू जो बताते हैं, उसे करने के बजाय अपनी पसंद से जो चाहे वह करता रहता है.
ब्लॉगर्स मीट वीकली (9) Against Female Feticide में यही मुद्दा उठाया गया है।
इन मुद्दों को हरेक मंच से उठाया जाना चाहिए.

देखिये कमाने के कुछ जायज़ तरीके (वीडियो), बड़ा ब्लॉगर कैसे बनें पर

अनवर भाई को नव भारत टाइम्स वेबसाइट ने उनका ब्लॉग उनके हवाले कर दिया है कि जब चाहे तब अपनी पोस्ट छाप दीजिए और जितनी मर्ज़ी उतनी छाप दीजिए.
और दूसरी तरफ़ हम हैं कि हमारा ब्लॉग ही नहीं है वहां.
...और वहां बनाकर करेंगे भी क्या ?
यहां का तो रोज़ लिखा नहीं जा रहा है.
उधर वहां बड़ा ब्लॉगर कैसे बनें पर जाकीर और मनोज पांडे जाने क्या क्या कह रहे हैं ?
हमें तो उस पोस्ट में बस यह काम की चीज़ लगी है.

देखिये कमाने के कुछ जायज़ तरीके (वीडियो)

इंटरनेट के ज़रिये आमदनी भी शुरू (एक अच्छी ख़बर) ब्लॉगर्स मीट वीकली (7) Earn Money online

यह भी एक अच्छी ख़बर है कि अब इंटरनेट के ज़रिये आमदनी भी शुरू हो गई है।
शुरूआत कितनी ही मामूली क्यों न हो लेकिन अहम होती है।
हाजी अब्दुल रहीम अंसारी साहब जैसे उस्ताद के बारे में जानकर ख़ुशी हुई .

यह एक अच्छा ख़याल है। इस मजलिस के बहाने आपस में एक दूसरे के ख़यालात पता चल जाते हैं और यह जानकर अच्छा लगता है कि ज़्यादातर लोग अच्छा ही सोचते हैं।
यह ताक़त अगर संगठित हो जाए तो फिर थोड़े से बुरे लोग मुल्क की दौलत और मुल्क के अमन को बर्बाद नहीं कर सकते।
फ़र्क़ यही है कि अच्छे लोग अच्छे होने के बावजूद बंटे हुए हैं और इसी बंटवारे का फ़ायदा ये बुरे लोग उठा रहे हैं और अच्छे लोगों को सता रहे हैं।

अपने मज़मून के उनवान यहां देखकर अच्छा लगा।
शुक्रिया ।
देखें -  ब्लॉगर्स मीट वीकली (7) Earn Money online

दुनिया में गुणवत्ता व मापदंड वाले 200 विश्वविद्यालयों में भारत का एक भी विश्वविद्यालय नहीं है

अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी भारत की प्रतिभाएं छाई हुई हैं और सबसे अधिक वैज्ञानिक भारत से ही हैं। ऐसे बहुत से उदाहरण हैं, जिनसे समझ में  आता है कि भारत में शिक्षा की नींव काफी मजबूत रही है, मगर अभी ऐसा कुछ भी नहीं है। प्रतिभाएं, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के कारण पूरी तरह दम तोड़ रही हैं और वे विदेशों में बेहतर भविष्य की चाह लिए पलायन करने मजबूर हैं। इसके लिए निश्चित ही हमारी शिक्षा नीति ही जिम्मेदार है। इस बात पर गहन विचार करने की जरूरत है। भारतीय शिक्षा में तमाम तरह की खामियां हैं, जिसकी खाई में देश की प्रतिभाएं समाती जा रही हैं। स्कूली शिक्षा में जहां-तहां देश में आंकड़ों के लिहाज से बेहतर स्थिति के लिए सरकार अपनी पीठ थपथपा सकती है, लेकिन उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा में उनके सभी दावों की पोल खुलती नजर आती है। एक आंकड़े के अनुसार देश में हर बरस 22 करोड़ छात्र स्कूली शिक्षा ग्रहण करते हैं, या कहें कि बारहवीं की शिक्षा प्राप्त करते हैं। दूसरी ओर देश की उच्च शिक्षा में व्याप्त भर्राशाही व खामियों का इस बात से पता चलता है कि यही आंकड़े यहां 12 से 15 फीसदी के रह जाते हैं। …

कार्य स्थल पर यौन शोषण ?

कार्य स्थल पर यौन शोषण की रोकथामComplaint Commitee to deal with the complaints of sexual harassment in the Department of Information Technologyक्या करेंयाद रखें कि संविधान के तहत महिलाओं को निम्नलिखित मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं:
- लिंग के आधार पर किसी तरह के भेदभाव के खिलाफ लिंग समानता का अधिकार
- कोई भी व्यवसाय चलाना या कोई भी व्यापार, व्यवसाय, अथवा कारोबार संचालित करना 
- जीवन और स्वाधीनता का अधिकार कार्यस्थल पर उनका उचित ध्यान रखा जाना चाहिए।याद रखें कि भारत के संविधान में यह अपेक्षा है कि सरकार महिलाओं को न्‍यायोचित और कार्य की मानवोचित स्थिति तथा मातृत्व राहत के लिए प्रावधान करे। कामकाजी महिलाओं को कार्य स्थल पर ये सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।क्या न करेंमहिलाओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन न करें क्योंकि वे संविधान के अनुच्छेद 32 के अन्तर्गत प्रवर्तनीय हैं तथा इनका हनन करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।महिलाओं के लिए बनाए गए विशेष प्रावधानों में बाधा पैदा न करें क्योंकि उन्हें भारत के संविधान के अनुरूप बनाया गया है।फैक्ट्री अधिनियम की धारा 66 के अनुसार किसी भी …

इस्लामी हिजाब इस्तेमाल करने के कुछ तरीक़े (सानिया मिर्ज़ा हिजाब में)

हिजाब मर्द के लिए भी लाज़िमी है और औरत के लिए भी लेकिन दोनों की शारीरिक संरचना में अंतर होने के कारण दोनों के हिजाब के हिस्सों और तरीक़ों में भी अंतर है।
आजकल ग़ैर मुस्लिम लड़कियां भी धूल और धूप से बचने के लिए हिजाब का इस्तेमाल करते हुए देखे जा सकती हैं।
ऐसे में यह जानकारी काम दे सकती है कि हिजाब के तरीक़े क्या हैं ?
इस मौज़ू पर बहन अंजुम शेख़ की यह पोस्ट बहुत काम देती है जिसमें हिजाब बांधने के कुछ तरीक़े बताए गए हैं।
देखिए :-

हिजाब बांधने के कुछ तरीके

अब बात करते हैं हिजाब बांधने के कुछ तरीकों की, नीचे कुछ पिक्चर्स हैं, जिन्हें देखकर हिजाब पहना जा सकता है, मतलब पर्दा किया जा सकता है.

अक्सर लोग परदे को घृणा के दृष्टि से देखते हैं, हालाँकि हर धर्म और देश में इसे मान्यता प्राप्त है, केवल कुछ जंगली प्रजातियाँ ही शरीर का पर्दा नहीं करती हैं, वर्ना सभी सभ्यताओं में इसे उचित स्थान प्राप्त था. हमारे देश हिन्दुस्तान की भी यही तहज़ीब रही है, और शरीर को दिखने की यहाँ कभी भी प्रथा नहीं रही. हिजाब, ना केवल शरीर को बल्कि बालों को भी तहज़ीब के साथ अच्छी तरह ढकता है.

अक्सर नए ज़माने को बरतरी देने वाली …

हुस्न ने घर की छत से लेकर चने और गन्ने के खेत तक में जो शोध किया है इश्क़ पर उसका किसी को पता ही नहीं है

शायर की कल्पना यह है कि हुस्न इतना ग़ाफ़िल है कि उसे इश्क का पता ही नहीं है।
लेकिन जब शायर मिलेगा हुस्न से तो उसे पता चलेगा कि उसने हुस्न को कम करके आंका है, हुस्न ने घर की छत से लेकर चने और गन्ने के खेत तक में जो शोध किया है इश्क़ पर उसका किसी को पता ही नहीं है।
ग़ाफ़िल शायर के तौर पर मशहूर हैं देखिए वे क्या कह रहे हैं-



ऐ हुस्न तुझे इश्क़ का पता ही नहीं है।
पेश आया भी जैसे के कुछ हुआ ही नहीं है।।


उसका भी फ़ैसला है याँ दरबारे-हुस्न में,
जिस इश्क़ की कभी कोई ख़ता ही नहीं है।


तड़पे है तेरे ज़ेरे-क़दम इश्क़ बेतरह,
और तू कहे के ये तो कुछ सज़ा ही नहीं है।


ग़ाफ़िल को ना ग़ुमान था याँ के रिवाज़ का,
सब कुछ है यहाँ एक बस वफ़ा ही नहीं है।।
-ग़ाफ़िल


असल माखज़ - http://cbmghafil.blogspot.com/2011/09/blog-post.html