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दिव्या जी के द्वारा कुछ कमेँट्स का जवाब न देना विरक्ति नहीं कहलाएगा।

आज हमने दिव्या जी की नई पोस्ट पढ़ी और उस पर टिप्पणी करनी चाही तो टिप्पणी का ऑप्शन बंद था. सो यहाँ अपनी पोस्ट में कमेंट कर देते हैं ।
'दिव्या जी , ग़लत नीयत से टिप्पणी करने वालों को आपके द्वारा जवाब न देना परिपक्वता कहलाएगा, विरक्ति नहीं ।'

इस तरह हमने आज की सक्रियता का कोटा पूरा कर लिया है ।

Comments

aur aaj ke din ek sakriya vyakti ko
hamne tipa........aapse sahmati....

salam
Dr. Ayaz Ahmad said…
Sanjay ji , Aapka Salaam Qubool hai hamen .

Shukriya aapka bahut bahut .

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बवासीर

दोस्तों बवासीर ऐसी बीमारी है जो किसी भी आदमी का रात दिन का चैन सुकून छीन लेता है.....देसी दवाइयों से इसका कामयाब इलाज संभव है यदि परहेज़ ध्यान रखा जाए
............... पाइल्स (बवासीर, अर्श): वात, पित, कफ़ ये तीनो दोष त्वचा, मांस, मेदा को दूषित करके गुदा के अंदर और बाहरी स्थानों मैं मांस के अंकुर (मस्से/फफोले) तैयार करते हैं. इन्ही मांस के अंकुरों को बवासीर या अर्श कहते हैं ! ये मांस के अंकुर गुदामार्ग का अवरोध करते हैं और मलत्याग के समय शत्रु की भांति पीड़ा करते हैं ! इसलिए इनको अर्श भी कहा जाता है. ( चरक) बवासीर का सबसे उत्तम उपचार आयुर्वेद के द्वारा ही किया जा सकता है ! आयुर्वेदिक उपचार एक बहुत ही सुलझा और बिना साइड इफ़ेक्ट का उपचार है ! पाइल्स को पूरी तरह से आयुर्वेदिक तरीके से ही ठीक किया जा सकता है| बाहरी लक्षणों के कारण भेद: बवासीर 2 प्रकार (kind of piles) की होती हैं। एक भीतरी(खूनी) बवासीर तथा दूसरी (बादी) बाहरी बवासीर। भीतरी / ख़ूनी बवासीर / आन्तरिक / रक्‍त स्रावी अर्श / रक्तार्श ख़ूनी बवासीर में मलाशय की आकुंचक पेशी के अन्दर अर्श होता है तो वह म्युकस मेम्ब्रेन (Mucous Membran…

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