Sunday, August 14, 2011

आंख के बदले आंख का इंसाफ ??? ( एक रिपोर्ट जिसे सुना भी जा सकता है )


क्या आंख के बदले आंख का इंसाफ जायज है.. आप कहेंगे नहीं... लेकिन अगर कोई आपकी आंख में तेजाब डाल कर आपको जिंदगी भर के लिए अपाहिज कर दे तो...

 
चौबीस साल की आमने बहरामी ईरान में इंजीनियरिंग पढ़ती थी. बेहद ज़हीन और बला की खूबसूरतउसी के साथ पढ़ने वाला माजिद मोहाविदी उसके पीछे पड़ गयाउससे शादी की जिद करने लगाबहरामी को माजिद में कोई दिलचस्पी नहीं थीउसने एक बार और बार बार मना कियाएक लड़की का इनकार माजिद की फर्जी मर्दानगी को भेद गया और उसने बाल्टी भर तेजाब आमने के जिस्म पर उंडेल दिया. एक रिपोर्ट जिसे सुना भी जा सकता है 
इस ख़बर को आप सुन भी सकते हैं इस लिंक पर :

1 comment:

शिखा कौशिक said...

aise me striyon dwara virodh swaroop koi bhi aandolan kiya jana samay ki maang hai .aakhir kab tak ve is prakar ki amanviy ghatnaon ka shikar banti rahengi .

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