Skip to main content

जो लोग विवाहित होते हैं उनकी औसत उम्र भी ज्यादा होती है.


खुशी का खजाना है दाम्पत्य जीवन

अध्ययन का केंद्र बिंदु यही है कि वैवाहिक संबंध स्त्री और पुरूष दोनों के लिए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कई सारे लाभ लाता है. और जब ये संबंध किसी वजह से नहीं रहता तो विपरीत असर दिखाने लगता है. शोध केवल शादीशुदा लोगों पर ही नहीं किया गया, बल्कि उन लोगों की मानसिक स्थिति पर भी किया गया जिनकी शादी नहीं हुई, जो कभी शादी नहीं करना चाहते या जिनकी शादी टूट चुकी है.

दाम्पत्य जीवन का अपना एक वैज्ञानिक पहलू होता है. विज्ञान के लिहाज से दाम्पत्य जीवन करामाती होता है. वैवाहिक जीवन लोगों की चिंताएं और परेशानियां दूर कर देता है, लेकिन तब जब दाम्पत्य जीवन जीया जाए.

एक अध्ययन में ये बात सामने आई है.वैवाहिक जीवन तनाव, अवसाद और चिंता से मुक्तिदिलाता है. और अगर किसी वजह से शादी टूट जाए, तलाक से, अलग होने से या एक साथी की मृत्यु से तो शरीर की सकारात्मक ऊर्जाएं बिखरने लगती हैं.

किसी को हमेशा जीवन में कोई ऐसा व्यक्तिचाहिए होता है- स्त्री को पुरुष, पुरुष को स्त्री. जिससे अपने मन की बात खुल कर कहा जा सके. अगर मन में निरंतर कोई चिंता, कोई अवसाद घिरा रहेगा तो उसका शरीर पर लगातार बुरा असर पड़ता है.

यह अगर किसी से बांट लिया जाए तो तय है की जो कष्ट है जो न सिर्फ मानसिक बल्कि शारीरिक भी है, क्योंकि ये पूरी एक जैव रासायनिक प्रक्रिया है जिसका शरीर पर बुरा असर पड़ता है. इस शोध में यह भी देखा गया है की शादीशुदा जिंदगी में अवसाद का असर औरत और मर्द पर अलग-अलग तरह से होता है.

यानी पुरूष, स्त्रियों से कम अवसादग्रस्त होते हैं. माना जाता है कि औरतों को कुछ मनोविकार अधिक होते हैं तो पुरूषों को भी कुछ मनोविकार अधिक होते हैं.

इसके जैव रासायनिक कारण हैं. जो हमें अच्छी अनुभूति देते हैं जिन्दगी में. उसमें उतार-चढ़ाव अधिक हों तो वह स्त्री हो या पुरुष दोनों में ही उसका असर दिखता है.

स्त्रियों में यह ज्यादातर होता है क्योंकि उनकी प्रजनन क्षमता में जो उतार-चढ़ाव उनके सेक्स हारमोंस में होते हैं, वे शरीर में परिलक्षित होते हैं.

शादीशुदा जिंदगी औरतों में ‘सब्सटेंस यूज डिसऑर्डर’ के खतरे को भी कम कर देती है. यह वो समस्या है जब कोई व्यक्तिअकेलेपन से निजात पाने के लिए नशे जैसी चीजों का सहारा लेता है.

वैवाहिक संबंध स्त्री और पुरूष दोनों के लिए मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कई सारे लाभ लाता है. और जब ये संबंध किसी वजह से नहीं रहता तो विपरीत असर दिखाने लगता है.

परिणाम यही निकलता है कि शादीशुदा लोग जीवन में यादा खुशहाल रहतें हैं. पाया गया है कि जो लोग विवाहित होते हैं उनकी औसत उम्र भी ज्यादा होती है.

मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से विवाह पुरूषों के लिए स्त्रियों के बनिस्बत  ज्यादा फायदेमंद है. स्कॉट के मुताबिक इसका फायदा दोतरफा है. वैवाहिक जीवन का प्रेम एक ऐसी दवा है जो लगातार आपके खून और और आपके दिलो-दिमाग में सक्रिय रहती है. रिश्ते की मजबूती इस दवा का खजाना भरती रहती है.
असल माखज़ - 
http://manishmalhotra.jagranjunction.com/2011/04/23/%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A4%A4-jagran-junction-forum/

Comments

Popular posts from this blog

क्या आप सूअर की चर्बी खा रहे हैं ?

बी. एस. पाबला  जी का लेख देख कर मन में यही विचार आया, क्योंकि हम तो लेज़ खाते नहीं हैं और हो सकता है कि दूसरे प्रोडक्ट्स में E 631 हम भी खा रहे हों जो कि हक़ीक़त में सूअर की चर्बी का कोड है . यूरोप और अमेरिका में जा बसे हिन्दू मुसलमान कहाँ तक बच पाते होंगे सूअर की चर्बी से . मुस्लिम देशों में इसे गाय या भेड़ की चर्बी कह प्रचारित किया गया लेकिन इसके हलाल न होने से असंतोष थमा नहीं और इसे प्रतिबंधित कर दिया गया। बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नींदउड़गई। आखिर उनका 75 प्रतिशत कमाई मारी जा रही थी इन बातों से। हार कर एक राह निकाली गई। अबगुप्तसंकेतोवालीभाषा का उपयोग करने की सोची गई जिसे केवल संबंधित विभाग ही जानें कि यह क्या है! आम उपभोक्ता अनजान रह सब हजम करता रहे। तब जनमहुआ E कोडका
तब से यह E631 पदार्थकईचीजोंमेंउपयोग किया जाने लगा जिसमे मुख्य हैं टूथपेस्ट, शेविंग क्रीम, च्युंग गम, चॉकलेट, मिठाई, बिस्कुट, कोर्न फ्लैक्स, टॉफी, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ आदि। सूची में और भी नाम हो सकते हैं। हाँ, कुछ मल्टी-विटामिनकी गोलियों में भी यह पदार्थ होता है। शिशुयों, किशोरों सहित अस्थमा और गठिया के रोगियों को

बवासीर

दोस्तों बवासीर ऐसी बीमारी है जो किसी भी आदमी का रात दिन का चैन सुकून छीन लेता है.....देसी दवाइयों से इसका कामयाब इलाज संभव है यदि परहेज़ ध्यान रखा जाए
............... पाइल्स (बवासीर, अर्श): वात, पित, कफ़ ये तीनो दोष त्वचा, मांस, मेदा को दूषित करके गुदा के अंदर और बाहरी स्थानों मैं मांस के अंकुर (मस्से/फफोले) तैयार करते हैं. इन्ही मांस के अंकुरों को बवासीर या अर्श कहते हैं ! ये मांस के अंकुर गुदामार्ग का अवरोध करते हैं और मलत्याग के समय शत्रु की भांति पीड़ा करते हैं ! इसलिए इनको अर्श भी कहा जाता है. ( चरक) बवासीर का सबसे उत्तम उपचार आयुर्वेद के द्वारा ही किया जा सकता है ! आयुर्वेदिक उपचार एक बहुत ही सुलझा और बिना साइड इफ़ेक्ट का उपचार है ! पाइल्स को पूरी तरह से आयुर्वेदिक तरीके से ही ठीक किया जा सकता है| बाहरी लक्षणों के कारण भेद: बवासीर 2 प्रकार (kind of piles) की होती हैं। एक भीतरी(खूनी) बवासीर तथा दूसरी (बादी) बाहरी बवासीर। भीतरी / ख़ूनी बवासीर / आन्तरिक / रक्‍त स्रावी अर्श / रक्तार्श ख़ूनी बवासीर में मलाशय की आकुंचक पेशी के अन्दर अर्श होता है तो वह म्युकस मेम्ब्रेन (Mucous Membran…

शुक्राणुहीनता NIL SPERM

शुक्राणु की कमी के कारण और निवारण आदमी दिखनें में तन्दरुस्त हो ताकतवर हो लेकिन उसके शुक्राणु अगर दुर्बल हैं तो वो गर्भ धारण नहीं करवा सकते - तो जानें वीर्य में स्वस्थ शुक्राणुओं को बढ़ाने के चंद तरीके - पुरुष के वीर्य में शुक्राणु होते हैं ये शुक्राणु स्त्री के डिम्बाणु को निषेचित कर गर्भ धारण के लिये जिम्मेदार होते हैं - वीर्य में इन शुक्राणुओं की तादाद कम होने को शुक्राणु अल्पता की स्थिति कहा जाता है। शुक्राणु की कमी को ओलिगोस्पर्मिया कहते हैं लेकिन अगर वीर्य में शुक्राणुओं की मौजूदगी ही नहीं है तो इसे एज़ूस्पर्मिया संज्ञा दी जाती है ऐसे पुरुष संतान पैदा करने योग्य नहीं होते हैं। वीर्य में स्वस्थ शुक्राणुओं की तादाद कम होने के निम्न कारण हो सकते हैं-- * वीर्य का दूषित होना * अंडकोष पर गरमी के कारण वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है। ज्यादा तंग अन्डर वियर पहिनने,गरम पानी से स्नान करने, बहुत देर तक गरम पानी के टब में बैठने और मोटापा होने से शुक्राणु अल्पता हो जाती है। * हस्तमैथुन से बार बार वीर्य स्खलित करना * थौडी अवधि में कई बार स्त्री समागम करना * अधिक शारीरिक और मानसिक …