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लोग इन्हें धर्म गुरू कहते हैं जबकि ये पक्के मतलब गुरू हैं.


घर को आग लगा रहे हैं घर के चराग़
अख़तर ख़ान साहब ने स्वामी अग्निवेश के बारे में किसी वकील साहब का क़ौल नक़ल करते हुए अपनी एक पोस्ट में लिखा है कि ‘वह आर्य समाज की जायदाद पर क़ब्ज़ा जमाए हुए हैं और सरकारी दलाल हैं।‘
लोग उनसे इसलिए भी ख़फ़ा हैं कि उन्होंने अन्ना से ग़द्दारी की.

स्वामी अग्निवेश जैसे बहुत से मौलवी और सूफ़ी मुसलमानों में भी हैं जो कांग्रेस से लेकर बीजेपी तक हरेक पार्टी के साथ हैं. इसका मतलब यह है कि उनमें से जिसका मतलब जिस पार्टी से पूरा हो रहा है, वह उसके साथ हैं.

लोग इन्हें धर्म गुरू कहते हैं जबकि ये पक्के मतलब गुरू हैं.
अपने मतलब के लिए ये अपनी क़ौम को बेच देते हैं.
जनता आपस में टकरा रही है और ये गुरू मौज मार रहे हैं.
किसी टकराव में इनमें से कोई भी नहीं मरता, यह सोचने वाली बात है.
ये इलेक्शन भी नहीं लड़ते तब भी रईसी शान से बसर करते हैं.
इसी तरह के लोग हरेक क़ौम में मिलेंगे, इनका क्या इलाज है ?

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