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आखि़री प्यार बनाम पहला प्यार उर्फ़ धोखे की दास्तान


प्यार तो प्यार है क्या पहला और क्या आखि़री लेकिन ऐसा नहीं होता। प्यार की गिनती भी की जाती है और पति अपनी पत्नि को शान से बताता है कि उससे पहले वह कितनी लड़कियों को फ़्लर्ट कर चुका है या शादी से पहले उस पर कितनी लड़कियां मरती थीं। जबकि औरत अपने पति से इसके ठीक उल्टा कहती है। वह कहती है कि उसके अलावा तो उसके मन मंदिर में कोई आया ही नहीं, कभी कोई समाया ही नहीं। अगर यह सच है तो फिर देस भर के मर्द किन लड़कियों से फ़्लर्ट करते रहे ?
वे भी तो किसी की पत्नियां बनी होंगी और उसे बता यही बता रही होंगी कि मेरा पहला प्यार तो आप ही हैं ?
पता नहीं कौन किसे धोखा दे रहा है ?
औरतें मर्दों को या फिर मर्द औरतों को ?
या दोनों ख़ुद ही धोखा खा रहे हैं ?

बहुत सी लड़कियों को लाइन मार चुकने के बाद मर्द नई लड़की को अपने झांसे में लेने के लिए कहता है कि ‘तुम पर आकर तो बस मेरी सारी तलाश और सारी जुस्तजू ही ख़त्म हो गई है। तुम मेरा आखि़री प्यार हो।‘

औरत और मर्द की सोच में कितना अंतर है ?

Comments

Arunesh c dave said…
सटीख लिखा है आपने कम शब्दो मे बड़ी बात। ईश्वर कहो या खुदा देखता वही है और देखता सब है। दूसरों को धोखा देने वाले खुद भी वही पाते हैं।
DR. ANWER JAMAL said…
गहरी नज़र !

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