Friday, August 26, 2011

दोस्तो ! आपकी जेब भर सकती है ‘हातिम ताई तकनीक‘

हातिम ताई तकनीक की यह सबसे बड़ी सफलता है कि इसे इस्तेमाल करने वाला खलनायक भी नायक जैसा ही सम्मान पाता है और मसीहा समझा जाता है।
एक नया ब्लॉगर भी इसे आसानी से आज़मा सकता है। 
जो इस तकनीक पर चलना चाहे तो उसे ख़ुद को लोगों के मददगार और मसीहा के रूप में पेश करना होगा। अगर आपके पास ठीक ठाक दौलत है तो आप हिंदी ब्लॉगर की रूपयों पैसों से मदद करने की बात भी अपनी पोस्ट और अपनी टिप्पणियों में कह सकते हैं। यह बात आपको बार बार दोहरानी चाहिए। यह बात इतनी ज़्यादा बार दोहरानी चाहिए कि आप नाम याद आते ही रूपये का ध्यान बेइख्तियार ही आ जाए।
ग़रीबों की मदद करने के लिए आप कोई ट्रस्ट भी बना लें वर्ना बेहतर तो यह है कि अपना ब्लॉग बनाने से पहले एक ट्रस्ट ज़रूर बना लें। जो लोग नाजायज़ तरीक़ों से कमा रहे हैं और अपने नाजायज़ रास्तों में ही ख़र्च कर रहे हैं, उनकी आत्मा पर बहुत बोझ हो जाता है। ऐसे में जब वे कुछ दान करते हैं तो उन्हें अपनी आत्मा पर से कुछ बोझ कम होता हुआ लगता है। अपनी आत्मा की शांति के लिए वे बार बार दान करते रहते हैं। दान करने से एक तरफ़ तो उन्हें शांति मिलती है और दूसरी तरफ़ उनकी शान भी टपकती रहती है। ऐसे लोगों का माल लूटने के लिए तो बहुत से लोग गुरू होने का ढोंग भी रचाए फिर रहे हैं लेकिन फिर भी ऐसे गुरू सभी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे लोग आपके ट्रस्ट को चंदा भी देंगे।
अमीर लोगों की दिनचर्या बहुत बिज़ी होती है और ग़रीब का भी सारा दिन रोटी के जुगाड़ में ही निकल जाता है। दोनों ही बिज़ी हैं। अमीर के पास तो फिर भी संडे सैटरडे को या सुबह शाम को घूमने फिरने या क्लब में जाने का समय मिल जाता है लेकिन ग़रीब आदमी के पास तो इतना समय भी नहीं होता। ऐसे में ग़रीब आदमी किसी से मदद मांगने के लिए जाए भी तो किस दिन और किस समय ?
आपका ट्रस्ट ग़रीबों की यही समस्या हल करेगा। 
इसके लिए आप भी नियमित रूप से क्लब जाना शुरू कर दीजिए। आपको वहां कुछ काम न हो तो अपनी बेटी को ही उस क्लब का मेंबर बना दीजिए और आप उसके साथ जाने लगिए या फिर ख़ुद मेंबर बन जाइये और उसे साथ ले जाने लगिए। उसे रस्सी कूद कर पेट घटाने पर और लटक लटक कर क़द बढ़ाने पर लगा दीजिए और आप ख़ुद टेनिस खेलिए या फिर तीरंदाज़ी कीजिए। इससे आप बिल्कुल एक अमीर आदमी के माफ़िक लगेगा और अपने जैसे के पास ही आदमी उठता बैठता है। 
बस अमीर आदमी आपके पास आने जाने लगेंगे। बातचीत में आप बस यूं ही अपने ट्रस्ट का ज़िक्र कर दीजिएगा। दान देने के लिए उसकी आत्मा जब भी फड़फड़ाएगी , वह आपको ज़रूर याद करेगा। ट्रस्ट के वार्षिक समारोह में उसे चीफ़ गेस्ट बनाएंगे तो वह आपको दान हंड्रेड परसेंट देगा।
ग़र्ज़ यह कि इस तकनीक से आप किसी को देंगे बाद में और आपको मिलेगा पहले और वह भी दें तो दें और न दें तो न दें। 
एक रब के सिवा के और कौन देख रहा है ?
लड़की के रिश्ते की समस्या भी यही तकनीक दूर करेगी। लोग अच्छा ससुर उसे मानते हैं जो ज़्यादा दे और आप तो बैठे ही देने के लिए हैं। लड़की का रंग और क़द हल्का हो तो भी चल जाता है लेकिन बाप की जेब हल्की हो तो नहीं चलेगी।
इसलिए आज हरेक आदमी पर लाज़िम है कि वह अमीरी के दो चार उपकरण का जुगाड़ ज़रूर कर ले और एक लग्ज़री कार और एक कुत्ता इनमें सबसे ज़रूरी उपकरण हैं। ब्लड हाउंड, अलसेशियन और बुलडॉग कुत्तों का लुक ‘हातिम ताई तकनीक‘ के पात्र से मैच नहीं करता। सफ़ेद पॉमेरियन इस पात्र की सौम्यता से पूरी तरह मैच करता है।

पूरी पोस्ट में इसी तरह की बातें हैं , आप देखना चाहें तो जाइए इस लिंक पर -

आपकी जेब भर सकती है ‘हातिम ताई तकनीक‘ Hindi Blogging Guide (30)

1 comment:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

बेहतरीन व्यंग्य! बधाई!

लव जिहाद से लैंड जिहाद तक

 जिहाद से जुड़ी शब्दावली शायद कहीं खत्म हो ऐसा लगता नहीं है मुस्लिम विरोधी संगठन राजनीति में अपनी बढ़त के लालच में नए नए शब्द गढ़ते जा रहे ...