Skip to main content

कौन पकड़ता है टिप्पणियों को भी कबूतरों की तरह ?


यह काम करता है एक डिज़ायनर ब्लॉगर और एक महिला ब्लॉगर इस हुनर की अच्छी माहिर बताई जाती है। कौन बता रहा है ?
अरे भाई और कौन बता सकता है ?
जो हिंदी ब्लॉगिंग गाइड लिख रहा है वही बता रहा है यह नायाब तरकीब।
आप चूहों की तरह टिप्पणियों के फंसने का इंतेज़ार छोड़िए और कबूतर की तरह पकड़ना सीखिए ,

कबूतर की तरह भी पकड़ी जाती हैं टिप्पणियां Hindi Blogging Guide (28)


Comments

DR. ANWER JAMAL said…
लोकपाल बिल बनने से कुछ हो या न हो लेकिन लोगों को कुछ पा लेने का अहसास तो हो ही जाएगा।
हम तो शुरू से ही कह रहे हैं कि सच्चे रब से डरो, जैसी उसकी ढील है वैसी ही सख्त उसकी पकड़ है।
अभी इंटेलेक्चुअल बने घूम रहे हैं लेकिन अगर भूकंप, बाढ़ और युद्धों ने घेर लिया तो कोई भी फ़िलॉस्फ़र बचा न पाएगा।
ईमानदारी के लिए ईमान चाहिए और वह रब को माने बिना और रब की माने बिना मिलने वाला नहीं है।
लोग उससे हटकर ही अपने मसले हल कर लेना चाहते हैं,
यही सारी समस्या है।
ख़ैर ,
आज सोमवार है और ब्लॉगर्स मीट वीकली 5 में आ जाइये और वहां शेर भी हैं।

Popular posts from this blog

क्या आप सूअर की चर्बी खा रहे हैं ?

बी. एस. पाबला  जी का लेख देख कर मन में यही विचार आया, क्योंकि हम तो लेज़ खाते नहीं हैं और हो सकता है कि दूसरे प्रोडक्ट्स में E 631 हम भी खा रहे हों जो कि हक़ीक़त में सूअर की चर्बी का कोड है . यूरोप और अमेरिका में जा बसे हिन्दू मुसलमान कहाँ तक बच पाते होंगे सूअर की चर्बी से . मुस्लिम देशों में इसे गाय या भेड़ की चर्बी कह प्रचारित किया गया लेकिन इसके हलाल न होने से असंतोष थमा नहीं और इसे प्रतिबंधित कर दिया गया। बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नींदउड़गई। आखिर उनका 75 प्रतिशत कमाई मारी जा रही थी इन बातों से। हार कर एक राह निकाली गई। अबगुप्तसंकेतोवालीभाषा का उपयोग करने की सोची गई जिसे केवल संबंधित विभाग ही जानें कि यह क्या है! आम उपभोक्ता अनजान रह सब हजम करता रहे। तब जनमहुआ E कोडका
तब से यह E631 पदार्थकईचीजोंमेंउपयोग किया जाने लगा जिसमे मुख्य हैं टूथपेस्ट, शेविंग क्रीम, च्युंग गम, चॉकलेट, मिठाई, बिस्कुट, कोर्न फ्लैक्स, टॉफी, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ आदि। सूची में और भी नाम हो सकते हैं। हाँ, कुछ मल्टी-विटामिनकी गोलियों में भी यह पदार्थ होता है। शिशुयों, किशोरों सहित अस्थमा और गठिया के रोगियों को

क्या आप मूत्र पीने के शौक़ीन हैं ?

मल मूत्र का नाम आते ही आदमी घृणा से नाक भौं सिकोड़ने लगता है लेकिन ऐसे लोगों की संख्या करोड़ों में है जो कि मूत्र पीते हैं। मूत्र पीने को आजकल बाक़ायदा एक थेरेपी के रूप में भी प्रचारित किया जाता है। मूत्र का सेवन करने वालों में आज केवल अनपढ़ और अंधविश्वासी जनता ही नहीं है बल्कि बहुत से उच्च शिक्षित लोग भी हैं और ऐसे लोग भी हैं जो कि दूसरे समुदाय के लोगों को आए दिन यह समझाते रहते हैं कि उन्हें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए लेकिन खुद कभी अपने पीने पर ध्यान नहीं देते कि वे क्या पी रहे हैं और क्यों पी रहे हैं ? बहरहाल यह दुनिया है और यहां रंग बिरंगे लोग हैं। सबकी अक्ल और सबकी पसंद अलग अलग है। जो लोग पेशाब पीते हैं , उन्हें भला कौन रोक सकता है ? देखिए एक लिंक -
Complete Guide Urine Therapy (Coen Van Der Kroon)  Urine therapy consists of two parts: internal appication (drinking urine) and external application (massaging with urine). Both aspects comple-ment each other and are important for optimal results. The basic principle of urine therapy is therefore quite simple: you drink and massag…

बवासीर

दोस्तों बवासीर ऐसी बीमारी है जो किसी भी आदमी का रात दिन का चैन सुकून छीन लेता है.....देसी दवाइयों से इसका कामयाब इलाज संभव है यदि परहेज़ ध्यान रखा जाए
............... पाइल्स (बवासीर, अर्श): वात, पित, कफ़ ये तीनो दोष त्वचा, मांस, मेदा को दूषित करके गुदा के अंदर और बाहरी स्थानों मैं मांस के अंकुर (मस्से/फफोले) तैयार करते हैं. इन्ही मांस के अंकुरों को बवासीर या अर्श कहते हैं ! ये मांस के अंकुर गुदामार्ग का अवरोध करते हैं और मलत्याग के समय शत्रु की भांति पीड़ा करते हैं ! इसलिए इनको अर्श भी कहा जाता है. ( चरक) बवासीर का सबसे उत्तम उपचार आयुर्वेद के द्वारा ही किया जा सकता है ! आयुर्वेदिक उपचार एक बहुत ही सुलझा और बिना साइड इफ़ेक्ट का उपचार है ! पाइल्स को पूरी तरह से आयुर्वेदिक तरीके से ही ठीक किया जा सकता है| बाहरी लक्षणों के कारण भेद: बवासीर 2 प्रकार (kind of piles) की होती हैं। एक भीतरी(खूनी) बवासीर तथा दूसरी (बादी) बाहरी बवासीर। भीतरी / ख़ूनी बवासीर / आन्तरिक / रक्‍त स्रावी अर्श / रक्तार्श ख़ूनी बवासीर में मलाशय की आकुंचक पेशी के अन्दर अर्श होता है तो वह म्युकस मेम्ब्रेन (Mucous Membran…