Skip to main content

क्या यह चमत्कार नहीं है ?


आजकल आधुनिक दिखने के लिए चमत्कार का इन्कार करना ज़रूरी हो गया है .
फ़र्ज़ी बाबा हाथ की सफ़ाई दिखाकर लोगों को ठगते हैं तो उनकी पोल खोलनी चाहिए न कि चमत्कार का ही इन्कार करना चाहिए.
चमत्कार क्या है ?
जिस काम को इंसान ख़ुद कर न सके और अपनी अक्ल से उसे समझ न सके कि यह काम हुआ कैसे ?
उसे चमत्कार माना जाता है .
ऐसे बहुत से काम आज भी होते रहते हैं.
भयंकर सुनामी हादसे में जहां पूरी बस्ती तबाह हो गई वहां मस्जिद का सुरक्षित रह जाना एक चमत्कार ही है , जिसे हरेक आदमी अपनी आंखों से देख सकता है.

Tsunami mosques


http://www.youtube.com/watch?feature=player_embedded&v=wa7Lqxzm9NE

ये चमत्कार बताते हैं कि सब कुछ इंसान की अक्ल में नहीं समा सकता.
इंसान की अक्ल और ताक़त महदूद और सीमित है जबकि इस कायनात में जो घटनाएं हो रही हैं उन सबको समझने के लिए लामहदूद और असीमित अक्ल और ताक़त की ज़रूरत है.
ऐसा इंसान के लिए इस दुनिया में संभव नहीं है .
इस्लाम यही बताता है .

कौन है जो इस हक़ीक़त को झुठला सके ?

यह इस्लाम का सबसे बड़ा चमत्कार है कि दलील की बुनियाद पर कोई इसे झुठला नहीं सकता .
अल्लाह ने हमें ऐसी दौलत बख्शी है.
हम मुसलमानों को इसकी क़द्र करनी चाहिए और अल्लाह के हुक्म पर अमल करना चाहिए .
चमत्कार का मक़सद भी यही होता है कि लोगों को अल्लाह के वुजूद का यक़ीन हासिल हो जाए .
अगर आदमी ग़ौर करे तो उसे यह यक़ीन हासिल हो सकता है .

Comments

Tarkeshwar Giri said…
Dharm ke prati itni kathorta ise kattarta ki taraf dhakelti hai.
DR. ANWER JAMAL said…
अयाज़ साहब , आपका भेजा हुआ लिंक मिला, आपकी पोस्ट देखी तो पाया कि आपने बड़ी बात को बहुत आसानी से समझा दिया है। यह हक़ीक़त है कि आदमी इस कायनात के सारे राज़ कभी जान ही नहीं सकता।
जितना वह जानता है , उससे बहुत ज़्यादा वह है जो वह नहीं जानता।
इसके बावजूद भी वह बहुत सी बातों का इंकार महज़ इसलिए कर देता है क्योंकि उसके अंदर एक ज़िद और दुराग्रह पाया जाता है।
सच्चाई को केवल वही पा सकता है जो निष्पक्ष होकर तथ्यों पर विचार कर सके।

शुक्रिया !
प्रकृति में कुछ भी चमत्कार नहीं होता। हर घटना के पीछे भौतिक कारण होते हैं। जो नहीं समझते वे उसे चमत्कार कहते हैं।

Popular posts from this blog

क्या आप सूअर की चर्बी खा रहे हैं ?

बी. एस. पाबला  जी का लेख देख कर मन में यही विचार आया, क्योंकि हम तो लेज़ खाते नहीं हैं और हो सकता है कि दूसरे प्रोडक्ट्स में E 631 हम भी खा रहे हों जो कि हक़ीक़त में सूअर की चर्बी का कोड है . यूरोप और अमेरिका में जा बसे हिन्दू मुसलमान कहाँ तक बच पाते होंगे सूअर की चर्बी से . मुस्लिम देशों में इसे गाय या भेड़ की चर्बी कह प्रचारित किया गया लेकिन इसके हलाल न होने से असंतोष थमा नहीं और इसे प्रतिबंधित कर दिया गया। बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नींदउड़गई। आखिर उनका 75 प्रतिशत कमाई मारी जा रही थी इन बातों से। हार कर एक राह निकाली गई। अबगुप्तसंकेतोवालीभाषा का उपयोग करने की सोची गई जिसे केवल संबंधित विभाग ही जानें कि यह क्या है! आम उपभोक्ता अनजान रह सब हजम करता रहे। तब जनमहुआ E कोडका
तब से यह E631 पदार्थकईचीजोंमेंउपयोग किया जाने लगा जिसमे मुख्य हैं टूथपेस्ट, शेविंग क्रीम, च्युंग गम, चॉकलेट, मिठाई, बिस्कुट, कोर्न फ्लैक्स, टॉफी, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ आदि। सूची में और भी नाम हो सकते हैं। हाँ, कुछ मल्टी-विटामिनकी गोलियों में भी यह पदार्थ होता है। शिशुयों, किशोरों सहित अस्थमा और गठिया के रोगियों को

बवासीर

दोस्तों बवासीर ऐसी बीमारी है जो किसी भी आदमी का रात दिन का चैन सुकून छीन लेता है.....देसी दवाइयों से इसका कामयाब इलाज संभव है यदि परहेज़ ध्यान रखा जाए
............... पाइल्स (बवासीर, अर्श): वात, पित, कफ़ ये तीनो दोष त्वचा, मांस, मेदा को दूषित करके गुदा के अंदर और बाहरी स्थानों मैं मांस के अंकुर (मस्से/फफोले) तैयार करते हैं. इन्ही मांस के अंकुरों को बवासीर या अर्श कहते हैं ! ये मांस के अंकुर गुदामार्ग का अवरोध करते हैं और मलत्याग के समय शत्रु की भांति पीड़ा करते हैं ! इसलिए इनको अर्श भी कहा जाता है. ( चरक) बवासीर का सबसे उत्तम उपचार आयुर्वेद के द्वारा ही किया जा सकता है ! आयुर्वेदिक उपचार एक बहुत ही सुलझा और बिना साइड इफ़ेक्ट का उपचार है ! पाइल्स को पूरी तरह से आयुर्वेदिक तरीके से ही ठीक किया जा सकता है| बाहरी लक्षणों के कारण भेद: बवासीर 2 प्रकार (kind of piles) की होती हैं। एक भीतरी(खूनी) बवासीर तथा दूसरी (बादी) बाहरी बवासीर। भीतरी / ख़ूनी बवासीर / आन्तरिक / रक्‍त स्रावी अर्श / रक्तार्श ख़ूनी बवासीर में मलाशय की आकुंचक पेशी के अन्दर अर्श होता है तो वह म्युकस मेम्ब्रेन (Mucous Membran…

शुक्राणुहीनता NIL SPERM

शुक्राणु की कमी के कारण और निवारण आदमी दिखनें में तन्दरुस्त हो ताकतवर हो लेकिन उसके शुक्राणु अगर दुर्बल हैं तो वो गर्भ धारण नहीं करवा सकते - तो जानें वीर्य में स्वस्थ शुक्राणुओं को बढ़ाने के चंद तरीके - पुरुष के वीर्य में शुक्राणु होते हैं ये शुक्राणु स्त्री के डिम्बाणु को निषेचित कर गर्भ धारण के लिये जिम्मेदार होते हैं - वीर्य में इन शुक्राणुओं की तादाद कम होने को शुक्राणु अल्पता की स्थिति कहा जाता है। शुक्राणु की कमी को ओलिगोस्पर्मिया कहते हैं लेकिन अगर वीर्य में शुक्राणुओं की मौजूदगी ही नहीं है तो इसे एज़ूस्पर्मिया संज्ञा दी जाती है ऐसे पुरुष संतान पैदा करने योग्य नहीं होते हैं। वीर्य में स्वस्थ शुक्राणुओं की तादाद कम होने के निम्न कारण हो सकते हैं-- * वीर्य का दूषित होना * अंडकोष पर गरमी के कारण वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है। ज्यादा तंग अन्डर वियर पहिनने,गरम पानी से स्नान करने, बहुत देर तक गरम पानी के टब में बैठने और मोटापा होने से शुक्राणु अल्पता हो जाती है। * हस्तमैथुन से बार बार वीर्य स्खलित करना * थौडी अवधि में कई बार स्त्री समागम करना * अधिक शारीरिक और मानसिक …