Sunday, August 14, 2011

क्या यह चमत्कार नहीं है ?


आजकल आधुनिक दिखने के लिए चमत्कार का इन्कार करना ज़रूरी हो गया है .
फ़र्ज़ी बाबा हाथ की सफ़ाई दिखाकर लोगों को ठगते हैं तो उनकी पोल खोलनी चाहिए न कि चमत्कार का ही इन्कार करना चाहिए.
चमत्कार क्या है ?
जिस काम को इंसान ख़ुद कर न सके और अपनी अक्ल से उसे समझ न सके कि यह काम हुआ कैसे ?
उसे चमत्कार माना जाता है .
ऐसे बहुत से काम आज भी होते रहते हैं.
भयंकर सुनामी हादसे में जहां पूरी बस्ती तबाह हो गई वहां मस्जिद का सुरक्षित रह जाना एक चमत्कार ही है , जिसे हरेक आदमी अपनी आंखों से देख सकता है.

Tsunami mosques


http://www.youtube.com/watch?feature=player_embedded&v=wa7Lqxzm9NE

ये चमत्कार बताते हैं कि सब कुछ इंसान की अक्ल में नहीं समा सकता.
इंसान की अक्ल और ताक़त महदूद और सीमित है जबकि इस कायनात में जो घटनाएं हो रही हैं उन सबको समझने के लिए लामहदूद और असीमित अक्ल और ताक़त की ज़रूरत है.
ऐसा इंसान के लिए इस दुनिया में संभव नहीं है .
इस्लाम यही बताता है .

कौन है जो इस हक़ीक़त को झुठला सके ?

यह इस्लाम का सबसे बड़ा चमत्कार है कि दलील की बुनियाद पर कोई इसे झुठला नहीं सकता .
अल्लाह ने हमें ऐसी दौलत बख्शी है.
हम मुसलमानों को इसकी क़द्र करनी चाहिए और अल्लाह के हुक्म पर अमल करना चाहिए .
चमत्कार का मक़सद भी यही होता है कि लोगों को अल्लाह के वुजूद का यक़ीन हासिल हो जाए .
अगर आदमी ग़ौर करे तो उसे यह यक़ीन हासिल हो सकता है .

3 comments:

Tarkeshwar Giri said...

Dharm ke prati itni kathorta ise kattarta ki taraf dhakelti hai.

DR. ANWER JAMAL said...

अयाज़ साहब , आपका भेजा हुआ लिंक मिला, आपकी पोस्ट देखी तो पाया कि आपने बड़ी बात को बहुत आसानी से समझा दिया है। यह हक़ीक़त है कि आदमी इस कायनात के सारे राज़ कभी जान ही नहीं सकता।
जितना वह जानता है , उससे बहुत ज़्यादा वह है जो वह नहीं जानता।
इसके बावजूद भी वह बहुत सी बातों का इंकार महज़ इसलिए कर देता है क्योंकि उसके अंदर एक ज़िद और दुराग्रह पाया जाता है।
सच्चाई को केवल वही पा सकता है जो निष्पक्ष होकर तथ्यों पर विचार कर सके।

शुक्रिया !

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

प्रकृति में कुछ भी चमत्कार नहीं होता। हर घटना के पीछे भौतिक कारण होते हैं। जो नहीं समझते वे उसे चमत्कार कहते हैं।

लव जिहाद से लैंड जिहाद तक

 जिहाद से जुड़ी शब्दावली शायद कहीं खत्म हो ऐसा लगता नहीं है मुस्लिम विरोधी संगठन राजनीति में अपनी बढ़त के लालच में नए नए शब्द गढ़ते जा रहे ...