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हिंदी क्या भारत की राष्ट्र भाषा है?


हिंदी क्या भारत की राष्ट्र भाषा है?

            आज भारत की सबसे बड़ी समस्या में से एक है , उसके राष्ट्र भाषा की पहचान क्या है ? जी हाँ , शायद आपको यह जान कर ताज्जुब होगा, की दुनिया के सबसे बड़े  गणतंत्र भारत की संवैधानिक रूप से कोई भी राष्ट्र भाषा नहीं है । आज के परिवेश में हिंदी अपने ही देश में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है ।  आज भी हिंदी एक राजभाषा है । पर सवाल ये है की अपने ही राष्ट्र में हिंदी इतनी मजबूर क्यूं है ।  अगर गहराई से सोचे तो इसके पीछे मूल कारण हमारी अपनी प्रांतीय, सामुदायिक लड़ाई है । आंध्र अपनी भाषा को वरीयता देता है , पंजाब के लोग पंजाबी चाहते है , बंगाल के लोग बंगाली को वरीयता देते हैं ।  
                  पर असल में हम अपने कुंठित विरासत को बचने हेतु अपनी वास्तविक विरासत ''अनेकता में एकता" को ही नष्ट कर रहे है।  हिंदी को ये तो स्वीकार कर लिया जाता है की ये दो भाषाओं के मध्य संपर्क सूत्र का काम करती है , जैसे एक स्थल पर बंगाली और पंजाबी मिलते है तो आपस में भाषा प्रवाह की समस्या उत्पन्न हो जाती है , ऐसे में दो विभिन्न भाषियों के मध्य हिंदी  तथा अंग्रेजी ही एक ऐसी भाषा बचती है जो इन्हें आपस में जोड़ सकती है ।                          परन्तु अंग्रेजी एक विदेशी भाषा होने के नाते बहुत कम दुरी तक सिमीत  है  अतः हिंदी ही एक स्वदेशी भाषा के रूप में बचती है जो आम जनमानस को आपस में जोड़ दे । 
सारांशतः यदि हिंदी राष्ट्रीय संपर्क भाषा के रूप में स्थापित है तो सैधांतिक  रूप से भी राष्ट्र भाषा का दर्जा हिंदी को ही मिलनी चाहिए ।   
-शेखर तिवारी
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