Monday, August 8, 2011

दिव्या जी का शुक्रिया सही सलाह के लिए


ब्लॉगर्स मीट वीकली 3  के बारे में हमें कुछ पसोपेश था . हमने सलाह मांगी . ज़्यादातर ने तो सुनी और अनसुनी कर दी लेकिन दिव्या जी और सुनील कुमार जी ने ध्यान दिया और सही सलाह दी . हमने उनकी सलाह पर अमल किया और सहरी के वक्त यानि लगभग 4 बजे रात को पहला कमेंट देकर अपनी हाज़िरी भी दर्ज करा दी है. डा. अनवर जमाल साहब ने बताया कि लगभग 500 पेज व्यूज़ हो गए हैं और यह पोस्ट ब्लॉग की लोकप्रिय पोस्ट बन गई है पहले दिन ही .
सदर साहिब ने , जनाब रूपचंद शास्त्री साहिब ने भी अपने सदारती ख़ुत्बे में अच्छी बातें कही हैं .



डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...







हिन्दी ब्लॉगर्स फोरम इंटरनेशनल पर आयोजित ब्लॉगर्स मीट वीकली (3) में मैं आप सभी पाठकों का इस्तकबाल करता हूँ!
सबसे पहले तो इस ब्लॉगर मीट को सजाने सँवारने वाले DR. ANWER JAMAL साहिब का शुक्रिया करता हूँ कि उन्होंने मुझ नाच़ीज़ को इस काबिल समझा कि मैं इसकी सदारत कर सकूँ। जबकि मैं खुद को इसके काबिल समझने में सर्वथा अयोग्य पाता हूँ! मगर इनका प्यार भरा आग्रह मैं ठुकरा न सका! क्योंकि इनके आग्रह में बहुत बल था!
बहन प्रेरणा अर्गल का भी इस ब्लॉग को सँवारने में बहुत बड़ा योगदान है। मैं उनका भी शुक्रगुज़ार हूँ!
मित्रों!
आप जो पोस्टों का गुलदस्ता यहाँ पर देख रहे हैं। इसके पीछे इस ब्लॉग व्यवस्थापक की मेहनत स्पष्ट ही झलक रही है। न जाने इस शख़्श ने इसको सजाने-सँवारने में अपनी कितनी रातों की नींद कुर्बान होगी! तब कहीं जाकर इस खुश्बूदार सुमनों के पुष्पगुच्छ की महक हमारे सामने बहार बनकर आई है।
नये पुराने सभी ब्लॉगरों की पोस्टों की चर्चा बहुत सलीके से आज की ब्लॉगर मीट में की गई है!
मुझे आशा ही नहीं अपितु विश्वास भी है कि अपके ब्लॉगों की यहाँ पर चर्चा होने से आपके ब्लॉगों पर लोगों की आवाजाही निश्चित रूप से बढ़ेगी!
शुभकामनाओं के साथ-
आपका
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
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दिव्या जी की केवल सलाह ही उम्दा नहीं थी बल्कि उनके ख़ुद आने से भी हिंदी ब्लॉग जगत में हैरानी महसूस की जा रही है और ऐसा वह अक्सर करती हैं . उनका आना भी एक मिसाल बन गया है . जहां इतने खुले दिल के लोग मौजूद हों वहां से जुड़े रहना सचमुच एक ख़ुशी की बात है .

थैंक्स दिव्या जी ...

अच्छी राह बताने के लिए
मंच पर साथ आने के लिए

'ब्लॉगर्स मीट वीकली 3' वाले दिन पेज व्यूज़ 496


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