Monday, August 29, 2011

ब्लॉगर्स मीट वीकली 6 में एक शेर जो हमें पसंद आया


ब्लॉगर्स मीट वीकली 6 की ख़ास बात यह है कि इसमें बहुत आसान अल्फ़ाज़ में बता दिया है कि ज़िंदगी की हक़ीक़त असल में क्या है ?
इसी के साथ हिंदी ब्लॉगिंग गाइड के 31 मज़ामीन भी नज़्रे अवाम किए गए हैं.
अन्ना इस मीट में भी छाये रहे, अन्ना ने जितना बड़ा आंदोलन खड़ा किया और जिस तरह जनता ने उनका साथ दिया वह बेनज़ीर है लेकिन जाने हमें अब भी यही लगता है कि सरकार जनता के साथ फ़रेब से काम ले रही है.
पत्रकार भी झूठ का सहारा ले रहे हैं.
मीट में इस मौज़ू पर भी कई मज़ामीन हैं.
http://hbfint.blogspot.com/2011/08/6-eid-mubarak.html

एक शेर जो हमें पसंद आया वह यह है





फ़लक के चांद को मुश्किल में डाल रखा है
ये किसने खिड़की से चेहरा निकाल रखा है 

'बुनियाद' पर कुछ  उम्दा शेर

3 comments:

Sunil Kumar said...

khubsurat sher hai .......

शिखा कौशिक said...

अयाज जी
आप या तो अनवर जी के शागिर्द हैं या उनकी पोस्ट को बहुत ध्यान से पढते हैं .आपकी पोस्ट और अनवर जी की पोस्ट में काफी समानता रहती है .कभी कभी तो भ्रम हो जाता है कि ये आप लिख रहे हैं या अनवर जी .आपके द्वारा प्रस्तुत पोस्ट सोने पर सुहागा ही है मतलब एक तो ब्लोगर मीट वीकली और उस पर आपकी पोस्ट .ईद की अग्रिम शुभकामनायें .आपको भी और अनवर जी को भी .

Dr. Ayaz Ahmad said...

@ वकील साहिबा की स्कॉलर बहन शिखा कौशिक जी ! ध्यान से तो हम आपकी पोस्ट भी पढ़ते हैं लेकिन कमेंट से थोड़ा बचते हैं क्योंकि कई बार इस कमेंट की वजह से ग़लतफ़हमियां और झगड़े खड़े हो गए हैं।
हम अनवर जमाल साहब के शागिर्द नहीं हैं लेकिन उनके साथी हैं।
लखनऊ में जब उन्हें अवार्ड से नवाज़ा गया तो हम तब भी उनके साथ ही गए थे क्योंकि वह और हम एक ही शहर में रहते हैं और हम दोनों एक ही मक़सद के लिए ब्लॉगिंग करते हैं लेकिन हमने बहुत कम कर दिया था। उन्होंने फिर आवाज़ दी तो हम मुतहर्रिक हो गए।
वेद कुरआन और हिंदी फ़ोरम पर चल रही स्लाइड में भी आप हमें उनके साथ देख सकती हैं।
आप हमें ग़ौर के साथ पढ़ती हैं, यह देखकर अच्छा लगा।
अभी हमारे एक साथी डा. असलम क़ासमी भी ब्लॉग पर पोस्ट नहीं डाल रहे हैं, उन्हें देखकर तो आपको बिल्कुल भी वहम नहीं होगा कि वह और मैं एक हैं या उस्ताद शागिर्द हैं।
क्या आपने उनका ब्लॉग देखा है ?
उनकी पोस्ट का तो लिंक भी देना मुश्किल है।

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