Friday, April 1, 2011

अंजाम

इंसान अपने अंजाम से बैखबर है हालांकि ज़माना उसको बहुत तेजी से उस वक्त की तरफ लिए जा रहा है जब फसल काटने का वक्त आ जाएगा । जबकि वह दुनियावी फायदोँ को हासिल करने में व्यस्त है और समझता है कि मैं सही कार्य कर रहा हूँ । दरअसल वो अपने अमूल्य समय को व्यर्थ गँवा रहा है जबकि उसके सामने एक अच्छा अवसर है जिसमे वह अच्छे काम करके अपने लिए एक अनोखे भविष्य का निर्माण कर सकता है मगर वह कंकरियोँ से खेल रहा है । जबकि इसका रब उसको जन्नत की तरफ बुला रहा है । जो हमेशा हमेशा कायम रहने वाली है ,आराम और सुख से परिपूर्ण है मगर वह चंद दिनों की झूठी लज़्ज़तो मे खोया हुआ है। वो समझता है कि मैं बहुत कुछ हासिल कर सकता हूँ जबकि वह सिर्फ गँवा रहा है । दुनिया में मकान बनाकर वह समझता है कि मैं अपनी जिंदगी की निर्माण कर रहा हूँ जबकि वह सिर्फ रेत की दीवारेँ उठा रहा है जो इसलिए बनती है कि बनने के बाद ढह जाए ।

लव जिहाद से लैंड जिहाद तक

 जिहाद से जुड़ी शब्दावली शायद कहीं खत्म हो ऐसा लगता नहीं है मुस्लिम विरोधी संगठन राजनीति में अपनी बढ़त के लालच में नए नए शब्द गढ़ते जा रहे ...