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Showing posts from January, 2011

नए दौर में भी भेदभाव की पुरानी मानसिकता क्यों पाले हुए हैं हिंदू बुद्धिजीवी ?

@ श्याम जी ! डा. अनवर जमाल साहब की बात ऐतराज़ जताकर इस सारे बखेड़े की शुरूआत करने वाले आप ही तो हैं जबकि किसी भी मुसलमान ने आपकी पुराण संबंधी पोसट पर आज तक कोई सवाल नहीं किया ?
मुसलमानों की इस उदारता और सभ्यता के बावजूद आप इस्लाम को रिजिड मत बताते हैं ?
शर्म नहीं आती आपको इस्लाम को बदनाम करते हुए ?
Shame on you .
अब पूछे गये सवालों के जवाब दीजिए।
@ हरीश जी ! आपने ऐलान किया था कि अधिकतर मुसलमान बुरे होते हैं और आपने कुछ सवाल भी किए थे जिनमें आपने कुरआन पर और मुसलमानों पर ऐतराज किए थे । उनमें से अक्सर सवालों के जवाब आपको दे दिए गए हैं । अब आप बताएँ कि अभी आपकी शंकाएं दूर हुई हैं या उनमें से कोई अभी बाक़ी है ?
कुरआन और मुसलमान के बारे में अब आपकी क्या राय है ?
इतिहास का वह दौर बताईये जबकि वर्णवादी हिंदुओं ने सबको सुखी और निरोग बनाने का प्रयास किया हो ?
झूठी अफ़वाहें फैलाने से क्या फ़ायदा ?

क्या साध्वी प्रज्ञा को भी कोई अब्दुलकलीम मिलेगा ?

जब स्वामी असीमानंद हैदराबाद जेल मे थे तो वहाँ पर उनकी मुलाकात अपने किए गए गुनाह (मक्का मस्जिद बम विस्फोट ) के आरोप मे बंद मासूम युवक से हुई जिसका नाम अब्दुल कलीम है । कलीम ने स्वामी जी की बहुत सेवा की तो स्वामी जी की आँखे खुली की खुली रह गई क्योंकि उन्हे तो मुसलमानों का कुछ और ही रूप दिखाया गया था और उन्हे वह रूप दिखा कर "बम का जवाब बम " देने के लिए तैयार किया गया था और स्वामी उन देशद्रोही गतिविधियों मे संघ परिवार का साथ देने के लिए तैयार हो गए मगर अब उन्हे अपनी गलती का एहसास होने लगा और उन्होने अपने किए गए तमाम बम धमाकों का इकरार कर लिया । हालाँकि अभी तक उन्ही बम धमाकों के आरोप मे जेल में बंद मुस्लिम युवक छूटे नही लेकिन अब लगता है कि वह सब छूट जाएँगे । लेकिन अभी साध्वी प्रज्ञा का साधुवाद जगाने वाला ऐसा कोई नही मिला पर हमें पूरी उम्मीद है एक दिन वह भी होगा कि जब साध्वी भी सही रास्ते पर आ जाएगी । क्योकि ईश्वर के यहाँ देर है अँधेर नही ।

इंग्लैंड मे मुसलमान बनने वालों की संख्या ने रिकार्ड बनाया ।

विभिन्न धर्मों के बीच काम करने वाले एक थिँक टैँक ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में कहा है कि इंग्लैंड में पिछली दहाई में धर्म बदल कर मुसलमान होने वालों मे काफी वृद्धि हुई है कैठ मैटर्स नाम के इस थिँक टैँक ने धर्म बदलने वाले अंग्रेजो के बारे मे कहा है कि ऐसे लोगों की संख्या एक लाख तक पहुँच सकती है जबकि पाँच हज़ार सालाना लोग मुसलमान बन रहे हैं हालाँकि इस सर्वे से पहले धर्म परिवर्तन करने वालों की संख्या 14 हज़ार से 25 हज़ार के बीच बताई गई थी । धर्म परिवर्तन करने वालों की ये संख्या दर्शाती है कि अमेरिका में 11 सितम्बर और लंदन में 7 जुलाई को हुए हमलों का धर्म परिवर्तन पर कोई खास असर नही पड़ा है । इंग्लैंड के मुख्य समाचार पत्र "द इंडीपैँडेँट" के मुताबिक इस सर्वे मे 2001 की स्काटिश जनगणना के हवाले का प्रयोग किया गया है। सर्वे मे शामिल लोगों से ये पूछा गया कि जन्म के समय उनका धर्म क्या था और अब उनका धर्म क्या है ? इसके अलावा सर्वेकारोँ ने लंदन की मस्जिदों का भी दौरा किया और ये पता किया कि एक साल के अंदर धर्म परिवर्तन के कितने मामले होते हैं । मस्जिदों में पिछले साल धर्म परिवर्तन…