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darululoom deobandदारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मरगूबुर्रहमान chanceller

विश्व विख्यात दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मरगूबुर्रहमान का बुधवार को बिजनौर में इंतकाल हो गया। वह 96 वर्ष के थे। देर शाम उन्हें देवबंद में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। उनकी मौत की सूचना मिलने के बाद हजारों लोग उनके घर पर अफसोस जाहिर करने पहुंचे।
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव समेत कई नामचीन हस्तियों ने मौलाना साहब के निधन पर खिराजे अकीदत पेश की। मौलाना मरगूबुर्रहमान को 1982 में दारुल उलूम का मोहतमिम चुना गया था। उस वक्त दारुल उलूम विभाजन के तूफानी दौर से गुजर रहा था, लेकिन मौलाना अपनी ईमानदारी और सलाहियत से कश्ती को किनारे पर ले आए।
जमींदार घराने से ताल्लुक रखने वाले मौलाना बिना तनख्वाह दारुल उलूम की खिदमत करते रहे। उनके कार्यकाल में दारुल उलूम देवबंद ने नए आयाम स्थापित किए। मौलाना साहब ने मुस्लिम समाज में लड़कियों की तालीम पर खास अभियान चलाया। साथ ही मुगलकाल के बाद उन्होंने पत्थर की शानदार मस्जिद रशीद की तामीर कराई, जो दुनिया की खूबसूरत मस्जिदों में शुमार की जाती है।
मोहतमिम मौलाना मरगूबुर्रहमान के जनाजे की नमाज दारुल उलूम के अहता-ए-मौलसरी में अदा की गई। जिसमें हजारों लोगों ने शिरकत कर मोहतमिम साहब का अंतिम विदाई दी। उनके शव को मजारे कासमी में सुपुर्द ए-खाक किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में दारुल उलूम वक्फ के नायब मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी, मदरसा जामिया इमाम मुहम्मद अनवर शाह के मोहतमिम मौलाना अहमद खिंजर शाह मसूदी, जमीयत उलेमा हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना कारी मुहम्मद उस्मान, राज्यसभा सांसद व जमीयत प्रमुख मौलाना महमूद मदनी, पालिकाध्यक्ष मुहम्मद हसीब सिद्दीकी, मुस्लिम फंड ट्रस्ट के उप प्रबंधक हाजी नवाब मुजफ्फर उस्मानी, सपा नगर अध्यक्ष असद जमाल फैजी, सपा प्रदेश सचिव माविया अली, पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह राणा, अरबी विद्वान एवं लेखक मौलाना नदीमुलवाजदी, विख्यात शायर डा. नवाज देवबंदी, प्रशासक डा. अख्तर सईद, इस्लामिया डिग्री कालेज के प्रबंधक डा. अजीमुलहक, सपा नेता दिलशाद गौड़, इस्लामिक विद्वान मौलाना अरशद फारुकी, आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य मौलाना इस्लाम कासमी, मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर, मनरेगा के प्रदेश सचिव शाद फैजान सिद्दीकी, विधायक इमरान मसूद, पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह राणा, जिलाधिकारी आलोक कुमार व एसएसपी विनोद दोहरे शामिल रहे। इस दौरान मेरठ, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता से बड़ी संख्या में उलेमा भी शामिल रहे.

Comments

Dr. Ayaz Ahmad said…
मौलाना मरगूबुर्रहमान को 1982 में दारुल उलूम का मोहतमिम चुना गया था। उस वक्त दारुल उलूम विभाजन के तूफानी दौर से गुजर रहा था, लेकिन मौलाना अपनी ईमानदारी और सलाहियत से कश्ती को किनारे पर ले आए।
Dr. Ayaz Ahmad said…
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव समेत कई नामचीन हस्तियों ने मौलाना साहब के निधन पर खिराजे अकीदत पेश की।
Dr. Ayaz Ahmad said…
मोहतमिम मौलाना मरगूबुर्रहमान के जनाजे की नमाज दारुल उलूम के अहता-ए-मौलसरी में अदा की ग
इन्नालिल्लाही व इन्ना इलैही राजिउन.



निहायत ही दुःख भरी खबर है. अल्लाह, ता`आला उन्हें जन्नत-उल-फिरदौस में आला मक़ाम अता फमाए!
DR. ANWER JAMAL said…
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन .

मैं देवबंद परसों बरोज़ हफ़्ता पहुंचूगा . इंशा अल्लाह ।
DR. ANWER JAMAL said…
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन .

मैं देवबंद परसों बरोज़ हफ़्ता पहुंचूगा . इंशा अल्लाह ।
zubair said…
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन .
Dr. Ayaz Ahmad said…
अनवर भाई जानकर खुशी हुई कि आप देवबँद तशरीफ़ ला रहे हैं
Dr. Ayaz Ahmad said…
अनवर भाई श्रीनगर के क्या हाल हैं ? क्या श्रीनगर मे बर्फ पड़ रही है ?
imran said…
अल्लाह मोहतमिम साहब की मग़फ़िरत फरमाएं
imran said…
उनको जन्नत मे आला मुकाम अता फ़रमाए
मौलाना बहुत अज़ीम हस्ती थे
DR. ANWER JAMAL said…
Nice post .
औरत की बदहाली और उसके तमाम कारणों को बयान करने के लिए एक टिप्पणी तो क्या, पूरा एक लेख भी नाकाफ़ी है। उसमें केवल सूक्ष्म संकेत ही आ पाते हैं। ये दोनों टिप्पणियां भी समस्या के दो अलग कोण पाठक के सामने रखती हैं।
मैं बहन रेखा जी की टिप्पणी से सहमत हूं और मुझे उम्मीद है वे भी मेरे लेख की भावना और सुझाव से सहमत होंगी और उनके जैसी मेरी दूसरी बहनें भी।
औरत सरापा मुहब्बत है। वह सबको मुहब्बत देती है और बदले में भी फ़क़त वही चाहती है जो कि वह देती है। क्या मर्द औरत को वह तक भी लौटाने में असमर्थ है जो कि वह औरत से हमेशा पाता आया है और भरपूर पाता आया है ?
Shah Nawaz said…
अल्लाह, ता`आला उन्हें जन्नत-उल-फिरदौस में आला मक़ाम अता फमाए.......... आमीन!
इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन
अल्लाह, ता`आला उन्हें जन्नत-उल-फिरदौस में आला मक़ाम अता फमाए.......... आमीन

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